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हाथरस : चंदपा पुलिस की गतिविधि संदेह के घेरे में
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हाथरस : गांव बिसाना में मौके पर जानकारी करते डीआईजी दीपक कुमार। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
मारपीट, पथराव और फायरिंग में घायल राजकुमार उर्फ राजू पुत्र जुल्फी सिंह निवासी गांव बिसाना को पूरी रात पुलिस थाने से लेकर जिला अस्पताल तक अपनी अभिरक्षा में घुमाती रही। राजू का पर्याप्त उपचार नहीं कराया और यही उसकी मौत का मुख्य कारण बना।
राजू की जब तबियत बिगड़ी तो उसके परिजनों को सूचित भी नहीं किया गया। गांव बिसाना में सोमवार की रात्रि में जब मारपीट, पथराव और फायरिंग हुई तो इसमें राजू घायल हो गया। पुलिस ने उसे और दूसरे पक्ष के आकाश को हिरासत में ले लिया। पुलिस राजू को मेडिकल परीक्षण के लिए रात्रि करीब 12 बजे पुलिस बागला जिला अस्पताल लेकर पहुंची। परिजनों का कहना है कि वहां उसकी हालत को देखते हुए चिकित्सक ने पुलिसकर्मियों से कहा था कि वह उसे अस्पताल में दाखिल कर दें, लेकिन पुलिस उसे घसीटते हुए एक स्विफ्ट कार में डालकर ले गई।
उसके बाद सुबह चार बजे उसकी तबियत बिगड़ी तो उसे जिला अस्पताल लेकर आई। वहां उसे इंजेक्शन लगाया गया और उपचार दिया गया। पुलिस ने फिर जल्दबाजी दिखाई और उसे फिर थाने ले आई। ऐसे में करीब डेढ़ घंटे बाद थाने से फिर जिला अस्पताल लेकर आई। तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी और उसने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। सुबह जब पहली बार राजू की तबियत बिगड़ी तो उसके परिजनों को सूचित भी नहीं किया गया। उन्हें सूचना जब दी गई, तब तक राजू की जान जा चुकी थी। संवाद
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मारपीट, पथराव और फायरिंग में घायल राजकुमार उर्फ राजू पुत्र जुल्फी सिंह निवासी गांव बिसाना को पूरी रात पुलिस थाने से लेकर जिला अस्पताल तक अपनी अभिरक्षा में घुमाती रही। राजू का पर्याप्त उपचार नहीं कराया और यही उसकी मौत का मुख्य कारण बना।
राजू की जब तबियत बिगड़ी तो उसके परिजनों को सूचित भी नहीं किया गया। गांव बिसाना में सोमवार की रात्रि में जब मारपीट, पथराव और फायरिंग हुई तो इसमें राजू घायल हो गया। पुलिस ने उसे और दूसरे पक्ष के आकाश को हिरासत में ले लिया। पुलिस राजू को मेडिकल परीक्षण के लिए रात्रि करीब 12 बजे पुलिस बागला जिला अस्पताल लेकर पहुंची। परिजनों का कहना है कि वहां उसकी हालत को देखते हुए चिकित्सक ने पुलिसकर्मियों से कहा था कि वह उसे अस्पताल में दाखिल कर दें, लेकिन पुलिस उसे घसीटते हुए एक स्विफ्ट कार में डालकर ले गई।
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उसके बाद सुबह चार बजे उसकी तबियत बिगड़ी तो उसे जिला अस्पताल लेकर आई। वहां उसे इंजेक्शन लगाया गया और उपचार दिया गया। पुलिस ने फिर जल्दबाजी दिखाई और उसे फिर थाने ले आई। ऐसे में करीब डेढ़ घंटे बाद थाने से फिर जिला अस्पताल लेकर आई। तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी और उसने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। सुबह जब पहली बार राजू की तबियत बिगड़ी तो उसके परिजनों को सूचित भी नहीं किया गया। उन्हें सूचना जब दी गई, तब तक राजू की जान जा चुकी थी। संवाद
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