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हाथ्ररस : व्यापारियों के उत्पीड़न और भ्रष्टाचार में संलिप्त रहते हैं सीएफआई

Wed, 04 Aug 2021 10:57 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 10:57 PM IST
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Hathras: CFIs are involved in harassment and corruption of traders
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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व्यापारियों की शिकायत के बाद हुई जांच में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी (सीएफआई) हरेंद्र सिंह को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की संस्तुति शासन से की गई है। तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा की जांच आख्या में यह कहा गया है कि सीएफआई अपने पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार में संलिप्त रहते हैं। जांच आख्या के आधार पर कार्रवाई के लिए डीएम ने प्रमुख सचिव खाद्य एवं औषधि प्रशासन अनुभाग को पत्र भेजा है। आरटीआई में इसका खुलासा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल खाद्य विभाग की टीम की नमूनों की जांच के चलते शहर में कई स्थानों पर तड़का-भड़की हुई थी। व्यापारियों ने उच्च स्तर के अलावा डीएम से भी मुख्य खाद्य निरीक्षक हरेंद्र सिंह की शिकायत की थी। कन्हैया वार्ष्णेय पुत्र मदनलाल वार्ष्णेय निवासी नयागंज सहित कई व्यापारियों ने मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हरेंद्र सिंह पर सैंपलिंग के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न करने और चौथ वसूली करने के आरोप लगाए थे। उद्योग व्यापार मंडल ने इसकी शिकायत डीएम से भी की थी। कन्हैया वार्ष्णेय ने कहा था कि 21 फरवरी 2020 को सीएफआई ने उनके भाई की फर्म पर छापा मारा और 20 हजार रुपये की मांग की। मना करने पर जबरन पामोलीन रिमाइंड ऑयल का नमूना ले लिया। बाद में अनियमितता दर्शाकर इसे अधोमानक घोषित कर दिया।
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इसके बाद 22 अक्तूबर को भी सादाबाद में उनके भाई की फर्म पर सीएफआई के इशारे पर नमूना लिया गया। तदुपरांत 50 हजार रुपये की मांग की गई। कन्हैया वार्ष्णेय ने कहा था कि उन्होंने इसकी शिकायत आईजीआरएस पर भी दर्ज कराई थी, लेकिन कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद फिर उनकी फर्म पर छापा मारा गया था। 25 नंबवर को फिर छापा मारा गया।
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मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने यह सब बदले की भावना से किया है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम से साथ व्यापारियों की तड़का-भड़की भी हुई थी। इस प्रकरण की जांच तत्कालीन एसडीएम सदर प्रेमप्रकाश मीणा (आईएएस) ने की थी। कई व्यापारियों ने अपने शपथपत्र भी दिए थे और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए थे। तत्कालीन एसडीएम की जांच में सीएफआई को दोषी पाया गया है।
अपनी जांच आख्या में तत्कालीन एसडीएम ने कहा है कि हरेंद्र सिंह उनके समक्ष प्रस्तुत नहीं हुए और न ही अपने बचाव के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया। ऐसे में इस घटनाक्रम से यह प्रतीत होता है कि हरेंद्र सिंह द्वारा जानबूझकर बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है। हरेंद्र सिंह पहले भी इस जिले में तैनात रहे हैं। उन्होंने फिर अपनी तैनाती इस जिले में करा ली है। उनकी कार्यशैली हमेशा व्यापारियों का शोषण करने और नमूने भरने के नाम पर आर्थिक शोषण करने की रही है।

यह भी बात संज्ञान में आई है कि वह व्यापारियों के यहां से नमूने तो लेते हैं, लेकिन वह नमूने भरने के लिए नहीं भेजते और व्यक्तिगत लाभ के लिए स्थानीय स्तर पर ही इन्हें निस्तारित कर लेते हैं। उनकी पत्नी के एक कंपनी में पद पर कार्यरत होने पर हरेंद्र सिंह खुद कंपनी की सेमिनारों में भाग लेते हैं। इसके साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं। जांच में कहा गया है कि हरेंद्र सिंह का रवैया व्यापारियों के शोषण का रहा है। वह शासन की नीतियों के विरुद्ध कार्य करते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हैं। तत्कालीन एसडीएम सदर ने अपनी यह जांच आख्या पांच मार्च को डीएम को भेजी थी। डीएम ने इसे कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिया है। इस जांच आख्या का खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दिए गए आवेदन में हुआ है।
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