{"_id":"619fcdce61e68c5f1438d502","slug":"hathras-census-should-be-based-on-caste-elections-should-be-done-by-ballot-paper-sadabad-news-ali2790495127","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : जाति आधारित हो जनगणना, मतपत्र से हों चुनाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : जाति आधारित हो जनगणना, मतपत्र से हों चुनाव
विज्ञापन
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारी एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए।
- फोटो : SADABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ओबीसी मोर्चा के बैनर तले बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति के नाम उपजिलाधिकारी विपिन कुमार शिवहरे को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जाति आधारित जनगणना कराने, ईवीएम के साथ लगी पेपर ट्रेल मशीन से निकलने वाली पर्चियों का सौ फीसदी मिलान करने या फिर मतपत्र से चुनाव कराने की मांग की गई।
मोर्चा के तहसील अध्यक्ष दामोदर सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा है गया कि आजाद भारत में ओबीसी की जनगणना या फिर जाति आधारित जनगणना एक बार भी नहीं कराई गई है। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि पिछड़े वर्ग के सही आंकड़े ही नहीं आए। ओबीसी के विकास की योजनाएं एवं शासन प्रशासन में उनको पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की नीतियां समुचित तरीके से नहीं बन पाईं।
पिछड़ा वर्ग आजादी के 74 वर्षों में भी अधिकार से वंचित रह गया, इसलिए पिछड़े वर्ग की जाति आधारित जनगणना होना अति आवश्यक है। समस्त सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों की वर्ष अप्रैल 2004 से बंद पुरानी पेंशन बहाल की जाए। निजीकरण समाप्त किया जाए। निजी क्षेत्रों में संवैधानिक आरक्षण दिया जाए। असम में एनआरसी के कारण 19 लाख लोग नागरिकता से वंचित हुए हैं।
विज्ञापन
एनआरसी लागू ही करना है तो डीएनए के आधार पर लागू किया जाए। मांगें पूरी न होने पर 10 दिसंबर को भारत बंद आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने वालों में भगवान सिंह कुशवाहा, सोनपाल, कृष्णपाल, शिशुपाल कुशवाहा, जगदीश प्रसाद कुशवाहा, यशपाल कुशवाहा, पूरन सिंह कुशवाहा आदि थे।
विज्ञापन
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ओबीसी मोर्चा के बैनर तले बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति के नाम उपजिलाधिकारी विपिन कुमार शिवहरे को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जाति आधारित जनगणना कराने, ईवीएम के साथ लगी पेपर ट्रेल मशीन से निकलने वाली पर्चियों का सौ फीसदी मिलान करने या फिर मतपत्र से चुनाव कराने की मांग की गई।
मोर्चा के तहसील अध्यक्ष दामोदर सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा है गया कि आजाद भारत में ओबीसी की जनगणना या फिर जाति आधारित जनगणना एक बार भी नहीं कराई गई है। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि पिछड़े वर्ग के सही आंकड़े ही नहीं आए। ओबीसी के विकास की योजनाएं एवं शासन प्रशासन में उनको पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की नीतियां समुचित तरीके से नहीं बन पाईं।
विज्ञापन
पिछड़ा वर्ग आजादी के 74 वर्षों में भी अधिकार से वंचित रह गया, इसलिए पिछड़े वर्ग की जाति आधारित जनगणना होना अति आवश्यक है। समस्त सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों की वर्ष अप्रैल 2004 से बंद पुरानी पेंशन बहाल की जाए। निजीकरण समाप्त किया जाए। निजी क्षेत्रों में संवैधानिक आरक्षण दिया जाए। असम में एनआरसी के कारण 19 लाख लोग नागरिकता से वंचित हुए हैं।
विज्ञापन
एनआरसी लागू ही करना है तो डीएनए के आधार पर लागू किया जाए। मांगें पूरी न होने पर 10 दिसंबर को भारत बंद आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने वालों में भगवान सिंह कुशवाहा, सोनपाल, कृष्णपाल, शिशुपाल कुशवाहा, जगदीश प्रसाद कुशवाहा, यशपाल कुशवाहा, पूरन सिंह कुशवाहा आदि थे।