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हाथरस : टिकट वितरण में जातीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा भाजपा ने

Sat, 22 Jan 2022 12:21 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jan 2022 12:21 AM IST
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Hathras: BJP took full care of caste equations in ticket distribution
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले की तीनों विस सीटों पर टिकट देते समय भाजपा ने राष्ट्रवाद के साथ-साथ जातिवाद का भी बखूबी आंकलन किया है। पार्टी ने जहां पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को टिकट देकर ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश की तो सिकंदराराऊ के विधायक वीरेंद्र सिंह राना का टिकट बरकरार रखकर क्षत्रिय समाज के वोटरों को भी खुश रखने का प्रयास किया है। सदर विधायक हरीशंकर माहौर का पार्टी ने टिकट तो काटा है, लेकिन उनके स्थान उनकी बिरादरी की ही महिला को पार्टी ने टिकट दिया है, जिससे इस बिरादरी का वोटर पार्टी से न छिटके।
मोदी और योगी के सहारे विधानसभा चुनाव को फिर जीतने के लिए जोर लगा रही भाजपा ने यहां टिकट वितरण के दौरान जातीय समीकरण का भी पूरा ध्यान रखा है। भाजपा ने रामवीर उपाध्याय व उनके परिवार के राजनीति में वर्चस्व को देखते हुए उन्हें फिर से टिकट देकर यहां व आसपास के जिलों के ब्रामतदाताओं को अपने पाले में लेने का प्रयास किया है। पार्टी की कोशिश है कि इस बहाने जिले के ही नहीं बल्कि आस-पास के ब्राह्मण समाज के वोट भी उसे आसानी से मिल जाएंगे। क्षत्रिय समाज ने पिछले चुनाव में भाजपा का साथ दिया था। ऐसे में भाजपा ने वीरेंद्र सिंह राना का टिकट इसलिए नहीं काटा, क्योंकि वह इस समाज से जुड़े हैं। साथ ही उनका संगठन में तालमेल भी ठीक है। उनके स्थान पर पार्टी किसी और समाज के व्यक्ति को टिकट देकर क्षत्रिय समाज की नाराजगी नहीं लेना चाहती थी।
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सिकंदराराऊ और हाथरस सदर सीट पर इस बिरादरी का काफी वोट है। बात यदि सदर सीट की करें तो सदर विधायक हरीशंकर माहौर का पार्टी ने टिकट जरूर काटा है। इसकी वजह कार्यकर्ताओं में उनकी घुसपैठ कम होना बताई जा रही हैं। वैसे भी वह पार्टी से चार बार विधायक रहे हैं। बढ़ती उम्र के साथ-साथ पार्टी उन्हें आराम करने देना चाहती थी। यहां यह बात भी दीगर है कि कोरी समाज के वोटरों ने भाजपा का काफी साथ दिया है। ऐसे में पार्टी ने अंजुला माहौर को टिकट दिया है। यानि माहौर को टिकट काटकर उनकी की बिरादरी की महिला को टिकट देकर पार्टी ने यह रणनीति भी तय की है कि इस बिरादरी का वोटर उससे दूर न हो। संवाद
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संगठन में गहरी घुसपैठ आई अंजुला के काम
हाथरस। संगठन में गहरी घुसपैठ की वजह से बाहरी होने के बाद भी अंजुला माहौर यहां से टिकट पाने में कामयाब रही। सूत्रों की मानें तो अंजुला माहौर यहां जिले की प्रभारी रही हैं। ऐसे में उनका यहां के पदाधिकारियों से अच्छा तालमेल है। वहीं सदर विधायक को लेकर कार्यकर्ता में विरोध था। हालांकि माहौर समाज के पूर्व चेयरमैन डौली माहौर का नाम भी चला था, लेकिन लोकायुक्त में नाम फंसने के कारण वह टिकट नहीं पा सकी। ऐसे में इसी समाज के अंजुला को पार्टी ने यहां के टिकट दे दिया। संवाद
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