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हाथरस : भूपेंद्र चौधरी का नाम जाट वोटरों को रिझाने में आएगा काम
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
भारतीय जनता पार्टी द्वारा पंचायतराज मंत्री भूपेंद्र चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद जिले की सियासत पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। यहां के राजनेता अपने-अपने हिसाब से आंकलन कर रहे हैं। भूपेंद्र चौधरी के सहारे भाजपा की कोशिश जाटलैंड में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की है।
यदि भाजपा की पकड़ जाटलैंड पर मजबूत हुई तो इसका असर इस जिले की सियासत पर भी पड़ेगा। जाटलैंड सादाबाद में भाजपा और मजबूत होगी और वहां रालोद के सामने सियासी जमीन को बचाए रखने की चुनौती होगी। जाट बहुल सादाबाद विधानसभा सीट पर भाजपा को वर्ष 1996 के बाद से आज तक सफलता नहीं मिली है।
भाजपा ने भूपेंद्र चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। भूपेंद्र चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने जाट मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव होंगे। वैसे यदि हाथरस संसदीय सीट का हिसाब देखें तो इसमें शामिल सादाबाद और इगलास विधानसभा सीट जाट बहुल हैं। इगलास सीट अलीगढ़ जिले में शामिल है। सादाबाद सीट हाथरस में शामिल है। संसदीय चुनाव में जरूर हाथरस सीट पर भाजपा या उसके सहयोगी वर्ष 1991 से लगातार जीतते रहे हैं, लेकिन जाट बहुल सादाबाद सीट पर भाजपा की स्थिति कमजोर रही है। यहां वर्ष 1996 के बाद से भाजपा को इस विस सीट पर सफलता नहीं मिली है।
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इस साल हुए विधानसभा चुनाव भी सादाबाद से रालोद के प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी ने भाजपा के प्रत्याशी रामवीर उपाध्याय को हराकर जीता। सादाबाद सीट पर वर्ष 2001 के उपचुनाव में से रालोद के लहटू ताऊ जीते थे। वर्ष 2002 में रालोद के प्रताप चौधरी ने जीत हासिल की थी। वर्ष 2007 में रालोद के डॉ. अनिल चौधरी ने विजय श्री प्राप्त की थी।
वर्ष 2017 में जब पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर चल रही थी। तब भी सादाबाद सीट पर मुकाबला बसपा और रालोद के बीच हुआ था और रालोद दूसरे नंबर पर रहा था। रालोद के परंपरागत जाट मतदाताओं ने सादाबाद क्षेत्र में रालोद की स्थिति को मजबूत बना रखा है।
अब भूपेंद्र चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने जाट मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। ऐसे में भाजपा का यह प्रयोग यदि सफल रहा तो संसदीय सीट पर तो उसका दबदबा रहेगा ही, साथ ही जाटलैंड में वह मजबूत हो जाएगी। इसका असर सादाबाद सीट पर भविष्य में पड़ेगा। इस जिले की सियासत में यदि जाटलैंड में भाजपा मजबूत हुई तो इसका सीधा असर रालोद पर पड़ेगा और उसकी सियासी जमीन दरकेगी। संवाद
जिपं के उपचुनाव में भी रालोद ने कराया ताकत का अहसास
हाथरस। इसी माह जिला पंचायत के वार्ड नंबर 16 से सदस्य पद के लिए उपचुनाव हुआ था। यह इलाका जाट बहुल है। भाजपा ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन जाट बहुल इलाके में रालोद के प्रत्याशी केशवदेव चौधरी ने ही जीत हासिल की थी और फिर रालोद ने अपनी ताकत का अहसास कराया था। भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। संवाद
भूपेंद्र चौधरी का इस जिले की राजनीति से है नाता
हाथरस। भाजपा के नये प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का इस जिले की राजनीति से जुड़ाव है। इसका मुख्य कारण यह है कि करीब ढाई साल तक वह जिले के प्रभारी मंत्री रहे हैं। पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव के दौरान वह प्रभारी मंत्री थे। वह कई-कई दिन तक यहां डेरा जमाए रहे और ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा को सफलता मिली। साथ ही विधानसभा चुनाव में भी सिकंदराराऊ और हाथरस सीट पर भाजपा का कब्जा हो गया। हालांकि सादाबाद सीट भाजपा नहीं जीत पाई। भूपेंद्र चौधरी की स्थानीय भाजपा नेताओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। जिले के दूसरे दलों के कई बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल कराने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
सभी राजनीतिक दल अपनी पार्टियों में तरह-तरह के प्रयोग करते रहते हैं। भाजपा किसी को भी पदाधिकारी बनाए, इससे हमारी पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रालोद से जुड़ा मतदाता उससे अलग नहीं होगा। बेहद विषम परिस्थितियों में रालोद ने सादाबाद सीट का चुनाव जीता, वह भी तब जबकि भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इतना ही नहीं इस माह हुए जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी रालोद ने जीता। ऐसे में कोई पार्टी किसी को भी पदाधिकारी बनाए, हमारी पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
-प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी, विधायक सादाबाद
भाजपा को हर वर्ग का समर्थन प्राप्त है। भूपेंद्र चौधरी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। इस जिले के प्रभारी मंत्री भी रहे हैं। उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने सही निर्णय लिया है। जिले में पार्टी और ज्यादा मजबूत होगी।
-गौरव आर्य, जिलाध्यक्ष भाजपा
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भारतीय जनता पार्टी द्वारा पंचायतराज मंत्री भूपेंद्र चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद जिले की सियासत पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। यहां के राजनेता अपने-अपने हिसाब से आंकलन कर रहे हैं। भूपेंद्र चौधरी के सहारे भाजपा की कोशिश जाटलैंड में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की है।
यदि भाजपा की पकड़ जाटलैंड पर मजबूत हुई तो इसका असर इस जिले की सियासत पर भी पड़ेगा। जाटलैंड सादाबाद में भाजपा और मजबूत होगी और वहां रालोद के सामने सियासी जमीन को बचाए रखने की चुनौती होगी। जाट बहुल सादाबाद विधानसभा सीट पर भाजपा को वर्ष 1996 के बाद से आज तक सफलता नहीं मिली है।
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भाजपा ने भूपेंद्र चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। भूपेंद्र चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने जाट मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव होंगे। वैसे यदि हाथरस संसदीय सीट का हिसाब देखें तो इसमें शामिल सादाबाद और इगलास विधानसभा सीट जाट बहुल हैं। इगलास सीट अलीगढ़ जिले में शामिल है। सादाबाद सीट हाथरस में शामिल है। संसदीय चुनाव में जरूर हाथरस सीट पर भाजपा या उसके सहयोगी वर्ष 1991 से लगातार जीतते रहे हैं, लेकिन जाट बहुल सादाबाद सीट पर भाजपा की स्थिति कमजोर रही है। यहां वर्ष 1996 के बाद से भाजपा को इस विस सीट पर सफलता नहीं मिली है।
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इस साल हुए विधानसभा चुनाव भी सादाबाद से रालोद के प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी ने भाजपा के प्रत्याशी रामवीर उपाध्याय को हराकर जीता। सादाबाद सीट पर वर्ष 2001 के उपचुनाव में से रालोद के लहटू ताऊ जीते थे। वर्ष 2002 में रालोद के प्रताप चौधरी ने जीत हासिल की थी। वर्ष 2007 में रालोद के डॉ. अनिल चौधरी ने विजय श्री प्राप्त की थी।
वर्ष 2017 में जब पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर चल रही थी। तब भी सादाबाद सीट पर मुकाबला बसपा और रालोद के बीच हुआ था और रालोद दूसरे नंबर पर रहा था। रालोद के परंपरागत जाट मतदाताओं ने सादाबाद क्षेत्र में रालोद की स्थिति को मजबूत बना रखा है।
अब भूपेंद्र चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने जाट मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। ऐसे में भाजपा का यह प्रयोग यदि सफल रहा तो संसदीय सीट पर तो उसका दबदबा रहेगा ही, साथ ही जाटलैंड में वह मजबूत हो जाएगी। इसका असर सादाबाद सीट पर भविष्य में पड़ेगा। इस जिले की सियासत में यदि जाटलैंड में भाजपा मजबूत हुई तो इसका सीधा असर रालोद पर पड़ेगा और उसकी सियासी जमीन दरकेगी। संवाद
जिपं के उपचुनाव में भी रालोद ने कराया ताकत का अहसास
हाथरस। इसी माह जिला पंचायत के वार्ड नंबर 16 से सदस्य पद के लिए उपचुनाव हुआ था। यह इलाका जाट बहुल है। भाजपा ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन जाट बहुल इलाके में रालोद के प्रत्याशी केशवदेव चौधरी ने ही जीत हासिल की थी और फिर रालोद ने अपनी ताकत का अहसास कराया था। भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। संवाद
भूपेंद्र चौधरी का इस जिले की राजनीति से है नाता
हाथरस। भाजपा के नये प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का इस जिले की राजनीति से जुड़ाव है। इसका मुख्य कारण यह है कि करीब ढाई साल तक वह जिले के प्रभारी मंत्री रहे हैं। पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव के दौरान वह प्रभारी मंत्री थे। वह कई-कई दिन तक यहां डेरा जमाए रहे और ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा को सफलता मिली। साथ ही विधानसभा चुनाव में भी सिकंदराराऊ और हाथरस सीट पर भाजपा का कब्जा हो गया। हालांकि सादाबाद सीट भाजपा नहीं जीत पाई। भूपेंद्र चौधरी की स्थानीय भाजपा नेताओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। जिले के दूसरे दलों के कई बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल कराने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
सभी राजनीतिक दल अपनी पार्टियों में तरह-तरह के प्रयोग करते रहते हैं। भाजपा किसी को भी पदाधिकारी बनाए, इससे हमारी पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रालोद से जुड़ा मतदाता उससे अलग नहीं होगा। बेहद विषम परिस्थितियों में रालोद ने सादाबाद सीट का चुनाव जीता, वह भी तब जबकि भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इतना ही नहीं इस माह हुए जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी रालोद ने जीता। ऐसे में कोई पार्टी किसी को भी पदाधिकारी बनाए, हमारी पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
-प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी, विधायक सादाबाद
भाजपा को हर वर्ग का समर्थन प्राप्त है। भूपेंद्र चौधरी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। इस जिले के प्रभारी मंत्री भी रहे हैं। उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने सही निर्णय लिया है। जिले में पार्टी और ज्यादा मजबूत होगी।
-गौरव आर्य, जिलाध्यक्ष भाजपा