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हाथरस: नोटबंदी के तीन साल बाद एटीएम बेहाल
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हाथरस में आगरा रोड घास की मंडी स्थित स्टेट बैंक के एटीएम पर लगी लंबी लाइन।
- फोटो : HATHRAS
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नोटबंदी के तीन साल बाद एटीएम बेहाल
नकदी निकासी की व्यवस्था आज भी बेहाल
नकदी के लिए इधर उधर घूम रहे लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। नोटबंदी के शुक्रवार को तीन साल पूरे हो गए। लेकिन अभी बैंक व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। एटीएम ने नकदी निकासी की व्यवस्था अभी तक बेहाल है। इस कारण नकदी के लिए लोग इधर उधर भटकते रहते हैं। वहीं जिले में कैशलेश गांव की डगर भी धीमी है। बैंक अधिकारी इंटरनेट कनेक्टिविटी का रोड़ा होने की बात कह रहे हैं।
उल्लेखनीय है आठ नवंबर 2016 की रात को पीएम ने अचानक रात 12 बजे नोटबंदी की घोषणा की। इसी के साथ जिले की बैंकों व एटीएम पर उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
लोग पुराने पैसे को बदलने में जुट गए। नोटबंदी के तीन साल पूरे होने के बाद भी जिले में नकदी निकासी की व्यवस्था सुधर नहीं पाई है। इस कारण लोग आज भी नकदी के लिए इधर से उधर घूम रहे हैं।
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जिले में करीब दो लाख एटीएम कार्ड धारक
जिले में वर्तमान में 143 बैंक शाखाओं के लिए 91 एटीएम हैं। करीब दो लाख उपभोक्ता एटीएम कार्ड धारक हैं। कार्ड धारकों की संख्या के हिसाब से एटीएम कम है। इसमें भी अधिकांश एटीएम तकनीकी खामियों के चलते शोपीस बने रहते हैं। क्योंकि एटीएम की खामियों को दूर करने के लिए जिला स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है। एटीएम को सही करने के लिए कानपुर आगरा से कर्मी आते हैं। इस कारण कई दिनों तक एटीएम शोपीस बने रहते हैं। जो एटीएम सही कार्य करते हैं उन पर लोगों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।
वाहनपुर भी पूरी तरह नहीं है कैशलेश
केंद्र सरकार ने कैशलेश को बढ़वा देने के लिए प्रत्येक जिले के एक गांव को कैशलेश करने के लिए चयनित किया। जिले के बैंक अधिकारियों ने हाथरस जंक्शन क्षेत्र वाहनपुर गांव का चयन किया। जिसमें बैंक का यह लक्ष्य था कि प्रत्येक घर के व्यक्ति का खाता हो। लोगों को एटीएम कार्ड दिए जाए। पॉश मशीन लगाई जाए। ताकि लोग कैशलेस हो सकें। लेकिन इस गांव में इंटरनेट कनेक्टिविटी रोड़ा बनी हुई है। इस कारण यह गांव पूरी तरह से कैशलेस नहीं हो सका।
एलडीएम कार्तिक कुमार का कहना है कि लोगों में अभी जागरूकता की कमी है। रही बात एटीएम की तो जिला स्तर पर एटीएम को सही करने के इंतजाम नहीं है। कानपुर व आगरा से एटीएम को सही करने के लिए कर्मी आते हैं। इस कारण एटीएम में नकदी निकासी की दिक्कत रहती है।
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नकदी निकासी की व्यवस्था आज भी बेहाल
नकदी के लिए इधर उधर घूम रहे लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। नोटबंदी के शुक्रवार को तीन साल पूरे हो गए। लेकिन अभी बैंक व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। एटीएम ने नकदी निकासी की व्यवस्था अभी तक बेहाल है। इस कारण नकदी के लिए लोग इधर उधर भटकते रहते हैं। वहीं जिले में कैशलेश गांव की डगर भी धीमी है। बैंक अधिकारी इंटरनेट कनेक्टिविटी का रोड़ा होने की बात कह रहे हैं।
उल्लेखनीय है आठ नवंबर 2016 की रात को पीएम ने अचानक रात 12 बजे नोटबंदी की घोषणा की। इसी के साथ जिले की बैंकों व एटीएम पर उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
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लोग पुराने पैसे को बदलने में जुट गए। नोटबंदी के तीन साल पूरे होने के बाद भी जिले में नकदी निकासी की व्यवस्था सुधर नहीं पाई है। इस कारण लोग आज भी नकदी के लिए इधर से उधर घूम रहे हैं।
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जिले में करीब दो लाख एटीएम कार्ड धारक
जिले में वर्तमान में 143 बैंक शाखाओं के लिए 91 एटीएम हैं। करीब दो लाख उपभोक्ता एटीएम कार्ड धारक हैं। कार्ड धारकों की संख्या के हिसाब से एटीएम कम है। इसमें भी अधिकांश एटीएम तकनीकी खामियों के चलते शोपीस बने रहते हैं। क्योंकि एटीएम की खामियों को दूर करने के लिए जिला स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है। एटीएम को सही करने के लिए कानपुर आगरा से कर्मी आते हैं। इस कारण कई दिनों तक एटीएम शोपीस बने रहते हैं। जो एटीएम सही कार्य करते हैं उन पर लोगों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।
वाहनपुर भी पूरी तरह नहीं है कैशलेश
केंद्र सरकार ने कैशलेश को बढ़वा देने के लिए प्रत्येक जिले के एक गांव को कैशलेश करने के लिए चयनित किया। जिले के बैंक अधिकारियों ने हाथरस जंक्शन क्षेत्र वाहनपुर गांव का चयन किया। जिसमें बैंक का यह लक्ष्य था कि प्रत्येक घर के व्यक्ति का खाता हो। लोगों को एटीएम कार्ड दिए जाए। पॉश मशीन लगाई जाए। ताकि लोग कैशलेस हो सकें। लेकिन इस गांव में इंटरनेट कनेक्टिविटी रोड़ा बनी हुई है। इस कारण यह गांव पूरी तरह से कैशलेस नहीं हो सका।
एलडीएम कार्तिक कुमार का कहना है कि लोगों में अभी जागरूकता की कमी है। रही बात एटीएम की तो जिला स्तर पर एटीएम को सही करने के इंतजाम नहीं है। कानपुर व आगरा से एटीएम को सही करने के लिए कर्मी आते हैं। इस कारण एटीएम में नकदी निकासी की दिक्कत रहती है।