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हाथरस : उठो देव, जागो देव के आह्वान से गूंजे घर-आंगन
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हाथरस : देवोत्थान एकादशी पर पूजा का सामान खरीदते लोग। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
देव प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर रविवार को घर-घर देवों की पूजा की गई। पूजा-अर्चना कर देवताओं को शयन से उठाया गया। घर आंगन में उठो देव, जागो देव के आह्वान की गूंज रही। लोगों ने उपवास रखकर भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि और धन धान्य में वृद्धि की कामना की। गेरू और खड़िया से रंगोली सजाई गईं और देवताओं की आकृतियां घरों के आंगन व दहलीज पर काढ़ी गईं। पर्व के लिए बाजारों में दिनभर खरीदारी का दौर भी चलता रहा। पूजा के लिए लोगों ने मौसमी फल और सब्जियों के अलावा गन्नों की खरीदारी की।
देवोत्थान या देव प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर देवों को जगाने से पहले गन्ना, सिंघाड़ा और शकरकंद से भोग लगाने की परंपरा है। बाद में घर के सभी लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। उपवास रखकर भगवान विष्णु से घर-परिवार में शांति-समृद्धि और मांगलिक कार्यों की कामना करते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु के क्षीरसागर से बाहर आने के बाद जो कोई निष्ठा भाव से उनकी स्तुति करता है, उसके हर तरह के दुख दूर हो जाते हैं। इसके अलावा तुलसी और सालिग्राम का विवाह भी कराया गया।
देवोत्थान के बाद से मंगल कार्यों और आयोजनों का क्रम भी शुरू हो गया। देवोत्थान एकादशी की पूजन सामग्री की अधिक खरीदारी की वजह से इस पर महंगाई का असर भी साफ दिखा। अन्य दिनों की अपेक्षा सिंघाड़े के दाम भी उछल गए तो शकरकंद 20 रुपये किलो और गन्ना बीस रुपये प्रति किलो में बिका। फल और सब्जियों के दाम लगभग दोगुने हो गए। संवाद
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देव प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर रविवार को घर-घर देवों की पूजा की गई। पूजा-अर्चना कर देवताओं को शयन से उठाया गया। घर आंगन में उठो देव, जागो देव के आह्वान की गूंज रही। लोगों ने उपवास रखकर भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि और धन धान्य में वृद्धि की कामना की। गेरू और खड़िया से रंगोली सजाई गईं और देवताओं की आकृतियां घरों के आंगन व दहलीज पर काढ़ी गईं। पर्व के लिए बाजारों में दिनभर खरीदारी का दौर भी चलता रहा। पूजा के लिए लोगों ने मौसमी फल और सब्जियों के अलावा गन्नों की खरीदारी की।
देवोत्थान या देव प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर देवों को जगाने से पहले गन्ना, सिंघाड़ा और शकरकंद से भोग लगाने की परंपरा है। बाद में घर के सभी लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। उपवास रखकर भगवान विष्णु से घर-परिवार में शांति-समृद्धि और मांगलिक कार्यों की कामना करते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु के क्षीरसागर से बाहर आने के बाद जो कोई निष्ठा भाव से उनकी स्तुति करता है, उसके हर तरह के दुख दूर हो जाते हैं। इसके अलावा तुलसी और सालिग्राम का विवाह भी कराया गया।
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देवोत्थान के बाद से मंगल कार्यों और आयोजनों का क्रम भी शुरू हो गया। देवोत्थान एकादशी की पूजन सामग्री की अधिक खरीदारी की वजह से इस पर महंगाई का असर भी साफ दिखा। अन्य दिनों की अपेक्षा सिंघाड़े के दाम भी उछल गए तो शकरकंद 20 रुपये किलो और गन्ना बीस रुपये प्रति किलो में बिका। फल और सब्जियों के दाम लगभग दोगुने हो गए। संवाद
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