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टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन की समस्या से जूझ रहा हस्तशिल्प उद्योग
Mon, 08 Apr 2019 12:10 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Mon, 08 Apr 2019 12:10 AM IST
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एक फैक्ट्री में हैंडीक्रॉफ्ट का काम करते कारीगर।
- फोटो : अमर उजाला
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हाथरस। शहर का हस्तशिल्प उद्योग भी टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन की समस्या से जूझ रहा है। अगर टैक्स समाप्त कर दिया जाए और ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा उद्यमियों को मिलने लगे तो करीब 30 साल पुराने इस उद्योग को फिर से एक संजीवनी मिल सकती है। उद्यमी लगातार सरकार से इस उद्योग से टैक्स को समाप्त करने की मांग करते आए हैं, लेकिन आज तक शासन-प्रशासन ने उनकी इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया है। पढ़िए घनश्याम सिंह की रिपोर्ट।
घरेलू से लेकर बनते हैं गिफ्ट आयटम तक
हस्तशिल्प उद्योग पर गौर करें तो इस उद्योग के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की मूर्तियां, साज-सज्जा की वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। वस्तुओं के निर्माण में एल्युमिनीयम, पीतल और जस्ता सहित अन्य धातुओं का प्रयोग किया जाता है। हैंडीक्राफ्ट उद्योग शहर में कुटीर उद्योग के रूप में अपनी जड़े जमा चुका है। दीवाली जैसे त्योहारों पर फैक्टरियों में विभिन्न डिजायनों के दीपक, वंदनवार, गणेश लक्ष्मी मूर्तियां आदि बनाए जाने का काम किया जाता है।
सरकार की तरफ से नहीं मिली कोई सहायता
हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े उद्यमियों को हमेशा एक बात का मलाल रहता है कि आज तक सरकार और शासन प्रशासन ने इस उद्योग की तरक्की के लिए कोई काम नहीं किया। उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी कोई सहायता नहीं मिली। यही नहीं शहर के औद्योगिक क्षेत्र में भी कोई भी भूखंड यहां के उद्यमियों को नहीं मिल सका। डीएम से लेकर उच्चाधिकारियों तक संज्ञान में लाए जाने के बाद भी कोई कारगर उपाय नहीं हो सका।
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कुछ प्रदेशों में नहीं लगता है टैक्स
हैंडीक्राफ्ट उद्यमियों से यूपी में चार फीसदी वैट और एक फीसदी सर्विस टैक्स लिया जाता है, लेकिन राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र में यह उद्योग कर मुक्त है। यूपी के उद्यमी कई सालों से इस उद्योग को कर मुक्त करने की मांग कर रहे हैं। अगर यूपी में यह उद्योग कर मुक्त हो जाए तो यह उद्योग भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी डंका बजाएगा। उद्यमियों को भी काफी राहत मिल सकेगी।
ट्रंासपोर्टेशन की नहीं सुविधा
हैंडीक्राफ्ट उद्योग के विकास में सबसे बड़ी बाधा शहर में ट्रंासपोर्टेशन की सुविधा नहीं मिलना है। यहां रेल या ट्रक से माल आने व जाने की कोई सुविधा नहीं है। उद्यमी जब स्वयं माल को ले जाते हैं तो काफी सामान टूट-फूट जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान भी होता है। ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था कर दी जाए तो उद्योग को चार चांद लग सकते हैं।
राजस्थान, गोवा तक भेजा जाता है माल
हैंडीक्राफ्ट का माल बाहरी राज्यों में भी बिकने के लिए जाता है। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली और गोवा में यहां के हैंडीक्राफ्ट आयटमों को काफी पसंद किया जाता है।
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घरेलू से लेकर बनते हैं गिफ्ट आयटम तक
हस्तशिल्प उद्योग पर गौर करें तो इस उद्योग के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की मूर्तियां, साज-सज्जा की वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। वस्तुओं के निर्माण में एल्युमिनीयम, पीतल और जस्ता सहित अन्य धातुओं का प्रयोग किया जाता है। हैंडीक्राफ्ट उद्योग शहर में कुटीर उद्योग के रूप में अपनी जड़े जमा चुका है। दीवाली जैसे त्योहारों पर फैक्टरियों में विभिन्न डिजायनों के दीपक, वंदनवार, गणेश लक्ष्मी मूर्तियां आदि बनाए जाने का काम किया जाता है।
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सरकार की तरफ से नहीं मिली कोई सहायता
हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े उद्यमियों को हमेशा एक बात का मलाल रहता है कि आज तक सरकार और शासन प्रशासन ने इस उद्योग की तरक्की के लिए कोई काम नहीं किया। उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी कोई सहायता नहीं मिली। यही नहीं शहर के औद्योगिक क्षेत्र में भी कोई भी भूखंड यहां के उद्यमियों को नहीं मिल सका। डीएम से लेकर उच्चाधिकारियों तक संज्ञान में लाए जाने के बाद भी कोई कारगर उपाय नहीं हो सका।
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कुछ प्रदेशों में नहीं लगता है टैक्स
हैंडीक्राफ्ट उद्यमियों से यूपी में चार फीसदी वैट और एक फीसदी सर्विस टैक्स लिया जाता है, लेकिन राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र में यह उद्योग कर मुक्त है। यूपी के उद्यमी कई सालों से इस उद्योग को कर मुक्त करने की मांग कर रहे हैं। अगर यूपी में यह उद्योग कर मुक्त हो जाए तो यह उद्योग भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी डंका बजाएगा। उद्यमियों को भी काफी राहत मिल सकेगी।
ट्रंासपोर्टेशन की नहीं सुविधा
हैंडीक्राफ्ट उद्योग के विकास में सबसे बड़ी बाधा शहर में ट्रंासपोर्टेशन की सुविधा नहीं मिलना है। यहां रेल या ट्रक से माल आने व जाने की कोई सुविधा नहीं है। उद्यमी जब स्वयं माल को ले जाते हैं तो काफी सामान टूट-फूट जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान भी होता है। ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था कर दी जाए तो उद्योग को चार चांद लग सकते हैं।
राजस्थान, गोवा तक भेजा जाता है माल
हैंडीक्राफ्ट का माल बाहरी राज्यों में भी बिकने के लिए जाता है। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली और गोवा में यहां के हैंडीक्राफ्ट आयटमों को काफी पसंद किया जाता है।