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Hathras: सांड़ के हमले में किसान की मौत से बढ़ी दहशत, निराश्रित पशुओं के बढ़ते उत्पात से ग्रामीणों में नाराजगी
Mon, 13 Jul 2026 09:50 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Mon, 13 Jul 2026 09:50 PM IST
सार
जिस छुट्टा सांड़ के हमले में किसान लीलाधर सिंह की मौत हो गई थी, शाम को उसी सांड़ की गांव में घूम रहे काले सांड़ से भिड़ंत हो गई। हमले में लीलाधर पर हमला करने वाले सांड़ की मौत हो गई।
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सांड़ के हमले में किसान लीलाधर सिंह की मौत
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
सादाबाद के मंस्या कलां में किसान लीलाधर सिंह की सांड़ के हमले में मौत के बाद क्षेत्रवासियों में फिर निराश्रित पशुओं की दहशत बढ़ गई है। बीते कुछ वर्षों में सादाबाद और सहपऊ क्षेत्र में छुट्टा सांड़ों के हमलों में दो लोगों की जान जा चुकी है।
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करीब चार वर्ष पूर्व सहपऊ क्षेत्र के गांव बागपुर में छुट्टा सांड़ के हमले में इतवारी और सोवरन की मौत हो गई थी। करीब पांच माह पहले गांव मंस्या में सेवानिवृत्त शिक्षक महावीर मास्टर अपने घर के बाड़े में सो रहे थे। इस दौरान एक छुट्टा सांड़ वहां पहुंच गया और उन पर हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
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इसके अलावा करीब एक वर्ष पूर्व इसी गांव के निवासी कालीचरण पर भी छुट्टा सांड़ ने अचानक हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। स्थानीय लोगों की सूझबूझ से उनकी जान बच सकी। लोगों का कहना है कि छुट्टा सांड़ खेतों में फसलों को बर्बाद करने के साथ-साथ अब लोगों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से छुट्टा पशुओं को तत्काल पकड़कर गोशालाओं में भेजने और इस समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
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हमलावर सांड़ की दूसरे सांड़ के हमले में मौत
ग्राम प्रधान कन्हैयालाल ने बताया कि सोमवार की सुबह जिस छुट्टा सांड़ के हमले में किसान लीलाधर सिंह की मौत हो गई थी, शाम को उसी सांड़ की गांव में घूम रहे काले सांड़ से भिड़ंत हो गई। हमले में लीलाधर पर हमला करने वाले सांड़ की मौत हो गई। ग्राम प्रधान ने बताया कि जेसीबी की सहायता से सांड़ का अंतिम संस्कार कराया जा रहा है।
लंबे समय से है सांड़ों का आतंक
ग्राम प्रधान कन्हैयालाल ने बताया कि इस गंभीर समस्या से प्रशासनिक अधिकारियों को पूर्व में भी कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में घूम रहे निराश्रित पशुओं को जल्द से जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।