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फर्जी टिकट घोटाला: जांच टीम के समक्ष पेश नहीं किए जरूरी दस्तावेज

Thu, 06 Sep 2018 12:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस। Updated Thu, 06 Sep 2018 12:14 AM IST
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Fake ticket scam: documents not submitted before the investigation team
bus ticket
 रोडवेज के फर्जी टिकट घोटाले में बुधवार को शिकायतकर्ताओं ने लखनऊ में जांच टीम के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए और लंबे समय से चल रहे रैकेट की करतूतों को बताया। शिकायतकर्ताओं ने कई अधिकारियों के नाम भी उजागर किए, जिनकी कृपा गिरोह पर बरसती थी।
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बताते हैं कि जांच टीम ने यहां से जो पत्रावलियां मंगवाई गई थीं, अलीगढ़ और हाथरस से उन्हें आधी अधूरी पत्रावलियां दी र्गइं। इस पर टीम ने नाराजगी जताते हुए अगली पेशी पर पूरी पत्रावलियों के साथ आने को कहा है। इससे यह भी स्पष्ट है कि रोडवेज के कुछ अधिकारी जांच टीम के समक्ष जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर रहे और दागियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।  
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उल्लेखनीय है कि पिछले माह एसटीएफ ने इगलास के निकट रोडवेज की फर्जी टिकट बनाने वाला रैकेट पकड़ा था। उस समय एसटीएफ ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस गिरोह का सरगना हाथरस डिपो का परिचालक देवेंद्र और मास्टर माइंड यहां का बुकिंग क्लर्क देवेंद्र था। यह तथ्य भी उल्लेखनीय है इस रैकेट के रोेडवेज के कई वरिष्ठ अधिकारियों से काफी घनिष्ठ संबंध थे। रोडवेज कर्मचारी संघ की स्थानीय शाखा के मंत्री पंकज लवानिया ने काफी पहले ही इस गिरोह की करतूतों की शिकायत अधिकारियों से की थी, लेकिन अधिकारी जानबूझकर इन शिकायतों को छिपा गए थे।
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यही नहीं पिछले साल इस रैकेट ने पंकज लवानिया की संविदा भी झूठे आरोप और साजिश रचकर समाप्त करा दी थी। इस पर भी पंकज ने हार नहीं मानी थी और उच्च स्तर पर शिकायतों का सिलसिला जारी रखा था। अब रैकेट के पकड़ में आने के बाद रोडवेज की लखनऊ की विभागीय टीम इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। टीम ने यहां आकर दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया था और कुछ और जरूरी दस्तावेज मंगाए थे। इसी क्रम में बुधवार को पंकज की सुनवाई जांच टीम के समक्ष थी। उनके अलावा मथुरा के ही एक परिचालक की भी सुनवाई थी। दोनों ने अपने बयान दर्ज कराए।


पंकज ने शिकायत में यह भी कहा था कि टीम ने कुछ जरूरी दस्तावेज मंगाए, लेकिन स्थानीय कर्मचारी यह दस्तावेज लेकर ही नहीं पहुंचे। जांच टीम के समक्ष यहां रैकेट में शामिल परिचालकों के दस्तखत पेश नहीं किए गए। साथ ही वह जिस बस पर ड्यूटी करते थे, उनका चक्कर के हिसाब से लोड फैक्टर भी टीम के समक्ष पेश नहीं किया गया। पंकज की मानें तो जांच टीम ने इस पर काफी नाराजगी जताई और अगली बार इन दस्तावेजों को साथ लेकर आने को कहा है।
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