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Hathras News: राज्य जीएसटी में भी फेसलेस स्क्रूटनी की शुरुआत
Fri, 09 Oct 2026 02:16 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 09 Oct 2026 02:16 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
विनीत चौरसिया
हाथरस। आयकर और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर विभाग की तर्ज पर अब राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग में भी अब फेसलेस स्क्रूटनी व्यवस्था की शुरुआत हो गई है। कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के रिटर्न की स्क्रूटनी से इस डिजिटल व्यवस्था को धरातल पर उतार दिया है।
नई व्यवस्था के लागू होने से अब व्यापारियों और कर अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत संपर्क और आमना-सामना खत्म करने की शुरूआत हो गई है। राज्य जीएसटी विभाग द्वारा शुरू की गई रेंडमाइज्ड एनुअल स्क्रूटनी के तहत मुख्यालय स्तर से कंप्यूटर प्रणाली द्वारा पूरी तरह रेंडम तरीके से मामलों का आवंटन किया गया है।
इसके तहत एजुकेटिंग ऑफिसर यानि न्याय निर्णयन अधिकारी के रूप में तैनात उपायुक्त एवं सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारियों को 10-10 केस जांच के लिए आवंटित किए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे अहम खासियत दोनों पक्षों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रहना है। न तो कारोबारी को यह जानकारी होगी कि उसके मामले की स्क्रूटनी किस जिले का कौन सा अधिकारी कर रहा है, और न ही जांच करने वाले अधिकारी को यह पता चल सकेगा कि जिस फाइल या फर्म की वह जांच कर रहे हैं, वह किस जिले के किस कारोबारी से संबंधित है। संवाद
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ऐसे काम करेगी राज्य जीएसटी की फेसलेस व्यवस्था
डिजिटल नोटिस व जवाब : स्क्रूटनी के दौरान यदि किसी रिटर्न में विसंगति पाई जाती है, तो सिस्टम जनरेटेड नोटिस सीधे व्यापारी के जीएसटी पोर्टल पर पहुंचेगा। व्यापारी को अपना स्पष्टीकरण व दस्तावेज भी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ही अपलोड करने होंगे।
-भौतिक उपस्थिति से मुक्ति : किसी भी व्यापारी या कर सलाहकार को फाइल लेकर विभाग के दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि किसी विशेष परिस्थिति में मौखिक सुनवाई की जरूरत पड़ती है, तो वह भी फेसलेस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होगी।
-उत्पीड़न और मनमानी पर रोक : स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और व्यापारियों के सीधे संपर्क में न आने से अनावश्यक दबाव, अनुचित सौदेबाजी और करदाताओं के उत्पीड़न की शिकायतों पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
तय समय में होगा निस्तारण
राज्य कर विभाग के उपायुक्त पीके गुप्ता ने बताया कि फेसलेस व्यवस्था से कर निर्धारण की प्रक्रिया में तेजी आएगी और व्यापारियों का विश्वास प्रणाली पर बढ़ेगा। पहले स्थानीय स्तर पर स्क्रूटनी के बारे में व्यापारियों को पक्षपात या अनावश्यक आपत्तियों की आशंका रहती थी, लेकिन अब सिस्टम-ड्रिवन और केंद्रीयकृत रेंडम आवंटन होने से केवल आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर ही निष्पक्ष निर्णय हो सकेगा। वित्तीय वर्ष 2024-25 से शुरू हुआ यह कदम वाणिज्य कर प्रशासन में एक बड़े डिजिटल सुधार के रूप में देखा जा सकता है।
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हाथरस। आयकर और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर विभाग की तर्ज पर अब राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग में भी अब फेसलेस स्क्रूटनी व्यवस्था की शुरुआत हो गई है। कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के रिटर्न की स्क्रूटनी से इस डिजिटल व्यवस्था को धरातल पर उतार दिया है।
नई व्यवस्था के लागू होने से अब व्यापारियों और कर अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत संपर्क और आमना-सामना खत्म करने की शुरूआत हो गई है। राज्य जीएसटी विभाग द्वारा शुरू की गई रेंडमाइज्ड एनुअल स्क्रूटनी के तहत मुख्यालय स्तर से कंप्यूटर प्रणाली द्वारा पूरी तरह रेंडम तरीके से मामलों का आवंटन किया गया है।
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इसके तहत एजुकेटिंग ऑफिसर यानि न्याय निर्णयन अधिकारी के रूप में तैनात उपायुक्त एवं सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारियों को 10-10 केस जांच के लिए आवंटित किए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे अहम खासियत दोनों पक्षों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रहना है। न तो कारोबारी को यह जानकारी होगी कि उसके मामले की स्क्रूटनी किस जिले का कौन सा अधिकारी कर रहा है, और न ही जांच करने वाले अधिकारी को यह पता चल सकेगा कि जिस फाइल या फर्म की वह जांच कर रहे हैं, वह किस जिले के किस कारोबारी से संबंधित है। संवाद
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ऐसे काम करेगी राज्य जीएसटी की फेसलेस व्यवस्था
डिजिटल नोटिस व जवाब : स्क्रूटनी के दौरान यदि किसी रिटर्न में विसंगति पाई जाती है, तो सिस्टम जनरेटेड नोटिस सीधे व्यापारी के जीएसटी पोर्टल पर पहुंचेगा। व्यापारी को अपना स्पष्टीकरण व दस्तावेज भी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ही अपलोड करने होंगे।
-भौतिक उपस्थिति से मुक्ति : किसी भी व्यापारी या कर सलाहकार को फाइल लेकर विभाग के दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि किसी विशेष परिस्थिति में मौखिक सुनवाई की जरूरत पड़ती है, तो वह भी फेसलेस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होगी।
-उत्पीड़न और मनमानी पर रोक : स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और व्यापारियों के सीधे संपर्क में न आने से अनावश्यक दबाव, अनुचित सौदेबाजी और करदाताओं के उत्पीड़न की शिकायतों पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
तय समय में होगा निस्तारण
राज्य कर विभाग के उपायुक्त पीके गुप्ता ने बताया कि फेसलेस व्यवस्था से कर निर्धारण की प्रक्रिया में तेजी आएगी और व्यापारियों का विश्वास प्रणाली पर बढ़ेगा। पहले स्थानीय स्तर पर स्क्रूटनी के बारे में व्यापारियों को पक्षपात या अनावश्यक आपत्तियों की आशंका रहती थी, लेकिन अब सिस्टम-ड्रिवन और केंद्रीयकृत रेंडम आवंटन होने से केवल आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर ही निष्पक्ष निर्णय हो सकेगा। वित्तीय वर्ष 2024-25 से शुरू हुआ यह कदम वाणिज्य कर प्रशासन में एक बड़े डिजिटल सुधार के रूप में देखा जा सकता है।