{"_id":"631506b1bad2cc2edd52e8dc","slug":"everything-is-a-deal-the-shrouds-of-the-dead-are-sold-hathras-news-ali2996637168","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर चीज का सौदा होता है, मुर्दों के कफन बिक जाते हैं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर चीज का सौदा होता है, मुर्दों के कफन बिक जाते हैं
Mon, 05 Sep 2022 01:42 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Sep 2022 01:42 AM IST
विज्ञापन
ख्याल लावनी सम्मेलन में ख्याल प्रस्तुत करते ख्यालगो। संवाद
- फोटो : HATHRAS
मेला श्री दाऊजी महाराज के पंडाल में शनिवार की रात्रि में अखिल भारतीय ख्याल लावनी साहित्य सम्मेलन का आयोजन बासम काव्य कला मंच के तत्वावधान में हुआ। इसका उद्घाटन नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा ने किया। इस मौके पर तुर्रा और कलगी पक्ष के कलाकारों के मध्य ख्यालगोई का मुकाबला कई घंटे तक चला। कलगी पक्ष के मुरारीलाल चंचल फिरोजाबादी ने अपनी यह रचना प्रस्तुत की...
चांदी के चंद टुकड़ों के लिए यहां चाल-ओ-चलन बिक जाते हैं।
हर चीज का सौदा होता है, मुर्दों के कफन बिक जाते हैं।।
कलगी पक्ष के ही अनवार अहमद कुरैशी की यह ख्याल भी बेहद सराहा गया
खंजर को खूं में रंग दे, कोई अरमान न रह जाए।
कातिल का मुझ पे कोई अहसान न रह जाए।।
वहीं, तुर्रा पक्ष के ख्यालगो चुन्नू पंडित ने यह ख्याल गाया
देश भक्तों को अब गद्दार कहा जाता है, देशद्रोहियों को वफादार कहा जाता है।
इस मौके पर कलगी पक्ष के ख्यालगो संपतलाल जोशी मथुरा, पं.दिनेश कुमार शर्मा लखनऊ, रईस अहमद खुर्जा के अलावा तुर्रा पक्ष के चुन्नू पंडित फरुर्खाबादी, वीरेंद्र कश्यप मथुरा, कमलेश केला करौली, बह्मदेव तिवारी आदि ख्यालगो ने भी अपने ख्याल सुनाए।
कार्यक्रम संचालक वरिष्ठ अधिवक्ता शिव कुमार शर्मा ने बताया कि बासम जी का पूरा नाम श्रीमान पंडित बासुदेव उपनाम बासम कवि था। उन्होंने शहर में ख्यालगोई व स्वांग विधा को स्थापित किया था।
विज्ञापन
कार्यक्रम में दिवंगत कलाकार ओमप्रकाश अमर फिरोजाबादी, स्वर कोकिला लता मंगेशकर के अलावा पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय, लोकतंत्र रक्षक सेनानी रामनिवास रावत, भाजपा नेता रामकिशोर शर्मा को श्रद्धांजलि दी गई।
मौके पर सुरेंद्र कुमार दीक्षित, सत्यप्रकाश रंगीला, सत्यनारायण सुधाकर, संजय गौतम, नवीन कुमार शर्मा आदि मौजूद थे। सम्मेलन के संयोजक सौरभ शर्मा ने अतिथियों व ख्याल गायकों का स्वागत किया। संयोजक शिव कुमार शर्मा एडवोकेट ने किया।
विज्ञापन
चांदी के चंद टुकड़ों के लिए यहां चाल-ओ-चलन बिक जाते हैं।
हर चीज का सौदा होता है, मुर्दों के कफन बिक जाते हैं।।
कलगी पक्ष के ही अनवार अहमद कुरैशी की यह ख्याल भी बेहद सराहा गया
खंजर को खूं में रंग दे, कोई अरमान न रह जाए।
कातिल का मुझ पे कोई अहसान न रह जाए।।
वहीं, तुर्रा पक्ष के ख्यालगो चुन्नू पंडित ने यह ख्याल गाया
देश भक्तों को अब गद्दार कहा जाता है, देशद्रोहियों को वफादार कहा जाता है।
इस मौके पर कलगी पक्ष के ख्यालगो संपतलाल जोशी मथुरा, पं.दिनेश कुमार शर्मा लखनऊ, रईस अहमद खुर्जा के अलावा तुर्रा पक्ष के चुन्नू पंडित फरुर्खाबादी, वीरेंद्र कश्यप मथुरा, कमलेश केला करौली, बह्मदेव तिवारी आदि ख्यालगो ने भी अपने ख्याल सुनाए।
विज्ञापन
कार्यक्रम संचालक वरिष्ठ अधिवक्ता शिव कुमार शर्मा ने बताया कि बासम जी का पूरा नाम श्रीमान पंडित बासुदेव उपनाम बासम कवि था। उन्होंने शहर में ख्यालगोई व स्वांग विधा को स्थापित किया था।
विज्ञापन
कार्यक्रम में दिवंगत कलाकार ओमप्रकाश अमर फिरोजाबादी, स्वर कोकिला लता मंगेशकर के अलावा पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय, लोकतंत्र रक्षक सेनानी रामनिवास रावत, भाजपा नेता रामकिशोर शर्मा को श्रद्धांजलि दी गई।
मौके पर सुरेंद्र कुमार दीक्षित, सत्यप्रकाश रंगीला, सत्यनारायण सुधाकर, संजय गौतम, नवीन कुमार शर्मा आदि मौजूद थे। सम्मेलन के संयोजक सौरभ शर्मा ने अतिथियों व ख्याल गायकों का स्वागत किया। संयोजक शिव कुमार शर्मा एडवोकेट ने किया।