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Hathras News: जिले के उद्यमी भी विकसित कर सकेंगे निजी औद्योगिक पार्क
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ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में रखे गए प्रस्तावों को अब अमली जामा पहनाया जाने लगा है। इसके तहत जनपद में भी निजी औद्योगिक पार्क भी विकसित किया जाएगा। इसकी योजना तैयार कर ली गई है और उद्यमियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। निजी औद्योगिक विकास विकसित करने वाले उद्यमी को बहुत ही कम ब्याज दर पर ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा।
निजी औद्योगिक पार्क विकसित करने वाले उद्यमी के पास दस से 50 एकड़ भूमि होनी चाहिए। इसमें एक प्लाट कम से कम एक एकड़ का होना चाहिए। यानी निजी औद्योगिक पार्क में दस से लेकर 50 प्लाट होंगे। उद्यमी को भूमि के स्वामित्व के कागजात एवं आगंणन सहित जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र को उपलब्ध कराएगा। कुल विकसित औद्योगिक प्रयोजन की भूमि में से 75 प्रतिशत भूखंड सूक्ष्म, लधु एवं मध्यम उद्योग इकाइयों के लिए आरक्षित रखे जाएंगे। पार्क तैयार होने के बाद प्रवर्तक सीधे तौर पर उद्यमियों को उपलब्ध करा सकेगा। इन भूखंडों की कीमत का निर्धारण प्रवर्तक द्वारा लगाई गई लागत आदि के आधार पर किया जाएगा।
विकसित करने से लेकर रखरखाव
तक निजी प्रवर्तक को ही करना होगा
इस योजना के तहत विकसित किए जा रहे निजी औद्योगिक पार्क के भूखंडों के आवंटन, सचांलन और मूलभत सुविधाओं के रख-रखाव का सम्पूर्ण दायित्व निजी प्रवर्तक का होगा। यहां चहारदीवारी, फेन्सिंग, आंतरिक मार्ग (कंक्रीट रोड) नाली, विद्युत संयोजन मय ट्रांसफार्मर, पेय जल सुविधा एवं सीवेज इत्यादि सुविधाओं का विकास मानक के अनुरूप करना होगा।
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छह वर्ष में वापस करनी होगी ऋण की राशि
प्रवर्तकों को जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित दर पर भूमि के मूल्य का 90 प्रतिशत अथवा औद्योगिक पार्क को विकसित करने के लिए आवश्यक धनराशि में जो भी कम होगी, उसे कम ब्याज दर पर ऋण के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। शेष पूंजी की व्यवस्था निजी प्रवर्तक को स्वयं के श्रोतों से अथवा बैंक से ऋण लेकर करनी होगी। प्रथम तीन वर्षों तक प्रवर्तक को दी गई धनराशि पर एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज लिया जायेगा। चौथे वर्ष से कारपस फंड से दी गई धनराशि पर छह प्रतिशत की दर से साधारण वार्षिक ब्याज लिया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा दी गई पूंजी को वापस करने की अधिकतम अवधि छह वर्ष होगी। धनराशि वापस न किये जाने की स्थिति में निजी प्रवर्तक द्वारा राज्य सरकार के पक्ष में बधंक रखी भूमि राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन हो जाएगी।
उद्यमियों को था सरकारी दरों पर भूमि आवंटन का इंतजार
ग्लोबल इंवेस्टर समिट आयोजित होने के बाद जनपद के उद्यमियों को सरकारी दरों पर सरकार से भूखंड उपलब्ध होने का इंतजार था। उन्हें उम्मीद थी कि पूर्व की भांति सरकारी महकमा जनपद में कुछ और इंड्रस्ट्रीयल एरिया का सृजन करेगा और यहां सरकारी दरों पर भूमि का आवंटन परंपरागत लॉटरी सिस्टम आदि से किया जाएगा, लेकिन इस बार इस तरह की कोई व्यवस्था न होने पर जनपद के उद्यमी अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
-शासन की ओर से जनपद में निजी औद्योगिक पार्क के सृजन कराए जाने के निर्देश मिले हैं। इस पर जनपद के उद्यमियों से संपर्क किया जा रहा है। पहली बार है, जब उद्यमियों को बेहद कम ब्याज दर पर प्रदेश सरकार ऋण उपलब्ध करा रही है।
अजलेश कुमार, उपायुक्त, जिला उद्योग केन्द्र हाथरस।
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निजी औद्योगिक पार्क विकसित करने वाले उद्यमी के पास दस से 50 एकड़ भूमि होनी चाहिए। इसमें एक प्लाट कम से कम एक एकड़ का होना चाहिए। यानी निजी औद्योगिक पार्क में दस से लेकर 50 प्लाट होंगे। उद्यमी को भूमि के स्वामित्व के कागजात एवं आगंणन सहित जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र को उपलब्ध कराएगा। कुल विकसित औद्योगिक प्रयोजन की भूमि में से 75 प्रतिशत भूखंड सूक्ष्म, लधु एवं मध्यम उद्योग इकाइयों के लिए आरक्षित रखे जाएंगे। पार्क तैयार होने के बाद प्रवर्तक सीधे तौर पर उद्यमियों को उपलब्ध करा सकेगा। इन भूखंडों की कीमत का निर्धारण प्रवर्तक द्वारा लगाई गई लागत आदि के आधार पर किया जाएगा।
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विकसित करने से लेकर रखरखाव
तक निजी प्रवर्तक को ही करना होगा
इस योजना के तहत विकसित किए जा रहे निजी औद्योगिक पार्क के भूखंडों के आवंटन, सचांलन और मूलभत सुविधाओं के रख-रखाव का सम्पूर्ण दायित्व निजी प्रवर्तक का होगा। यहां चहारदीवारी, फेन्सिंग, आंतरिक मार्ग (कंक्रीट रोड) नाली, विद्युत संयोजन मय ट्रांसफार्मर, पेय जल सुविधा एवं सीवेज इत्यादि सुविधाओं का विकास मानक के अनुरूप करना होगा।
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छह वर्ष में वापस करनी होगी ऋण की राशि
प्रवर्तकों को जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित दर पर भूमि के मूल्य का 90 प्रतिशत अथवा औद्योगिक पार्क को विकसित करने के लिए आवश्यक धनराशि में जो भी कम होगी, उसे कम ब्याज दर पर ऋण के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। शेष पूंजी की व्यवस्था निजी प्रवर्तक को स्वयं के श्रोतों से अथवा बैंक से ऋण लेकर करनी होगी। प्रथम तीन वर्षों तक प्रवर्तक को दी गई धनराशि पर एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज लिया जायेगा। चौथे वर्ष से कारपस फंड से दी गई धनराशि पर छह प्रतिशत की दर से साधारण वार्षिक ब्याज लिया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा दी गई पूंजी को वापस करने की अधिकतम अवधि छह वर्ष होगी। धनराशि वापस न किये जाने की स्थिति में निजी प्रवर्तक द्वारा राज्य सरकार के पक्ष में बधंक रखी भूमि राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन हो जाएगी।
उद्यमियों को था सरकारी दरों पर भूमि आवंटन का इंतजार
ग्लोबल इंवेस्टर समिट आयोजित होने के बाद जनपद के उद्यमियों को सरकारी दरों पर सरकार से भूखंड उपलब्ध होने का इंतजार था। उन्हें उम्मीद थी कि पूर्व की भांति सरकारी महकमा जनपद में कुछ और इंड्रस्ट्रीयल एरिया का सृजन करेगा और यहां सरकारी दरों पर भूमि का आवंटन परंपरागत लॉटरी सिस्टम आदि से किया जाएगा, लेकिन इस बार इस तरह की कोई व्यवस्था न होने पर जनपद के उद्यमी अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
-शासन की ओर से जनपद में निजी औद्योगिक पार्क के सृजन कराए जाने के निर्देश मिले हैं। इस पर जनपद के उद्यमियों से संपर्क किया जा रहा है। पहली बार है, जब उद्यमियों को बेहद कम ब्याज दर पर प्रदेश सरकार ऋण उपलब्ध करा रही है।
अजलेश कुमार, उपायुक्त, जिला उद्योग केन्द्र हाथरस।