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Hathras News: हत्या के मामले में आठ दोषियों को आजीवन कारावास, अर्थदंड भी लगाया
Sat, 09 Nov 2024 02:57 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 09 Nov 2024 02:57 AM IST
सार
गांव नगला खिरनी में 17 सितंबर 2010 को आरोपी हाथों में तमंचा और लाठी डंडे लेकर घर में घुस आए। फायरिंग व मारपीट शुरू कर दी। इससे रघुवीर सिंह, उसका पुत्र अनवर सिंह बुरी तरह घायल हो गए। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में रघुवीर सिंह की मौत हो गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
विशेष न्यायाधीश एससी/ एसटी एक्ट रामप्रताप सिंह के न्यायालय ने करीब 14 साल पुराने हत्या के मामले में आठ आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
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अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाली एडीजीसी प्रतिभा सिंह राजपूत ने बताया कि थाना चंदपा क्षेत्र के गांव नगला खिरनी निवासी जगदीश प्रसाद ने 17 सितंबर 2010 को थाने में तहरीर दी थी। इस तहरीर में कहा था कि एक मामले को लेकर 17 सितंबर 2010 को सुबह करीब 10:30 बजे गांव के ही राम प्रकाश उर्फ लंपा पुत्र हरि सिंह, कैलाश पुत्र बच्चू सिंह, छिंगा पुत्र बच्चू सिंह, राजू पुत्र रामफल, रिंकू पुत्र मोहन सिंह, आशिक अली पुत्र शौकत खान, मंगली पुत्र शौकत खान, मन्नी उर्फ मनवीर पुत्र सौराव सिंह, पप्पी पुत्र सौराव सिंह हाथों में तमंचा और लाठी डंडे लेकर घर में घुस आए। फायरिंग व मारपीट शुरू कर दी।
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इससे उसके पिता रघुवीर सिंह, उसका पुत्र अनवर सिंह बुरी तरह घायल हो गए। शोर मचाने पर बहुत से गांव वाले आ गए। हम लोग घायलों को अस्पताल लेकर गए। रास्ते में पिता की मृत्यु हो गई। इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने विवेचना करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इस प्रकरण में एक आरोपी मन्नी उर्फ मनवीर की मृत्यु हो गई और उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त की गई। इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट रामप्रताप सिंह के न्यायालय में हुई।
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अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी प्रतिभा सिंह राजपूत ने न्यायालय में 10 गवाह परीक्षित कराए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी रामप्रसाद उर्फ लम्पा, कैलाश, छिंगा, राजू , रिंकू आशिक अली, मंगली व पप्पी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने इन्हें अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।