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हाथरस में डेंगू की रोकथाम के लिए डॉक्टरों ने किया मंथन
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हाथरस में डेंगू की रोकथाम के लिए मंथन करते चिकित्सक।
- फोटो : HATHRAS
डॉक्टरों ने डेंगू की रोकथाम के लिए किया मंथन
एचएमएआई की मासिक समीक्षा बैठक में डेंगू बुखार के इलाज पर सभी ने रखे अपने विचार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। सोमवार को एचएमएआई हाथरस यूनिट की मासिक बैठक आवास विकास कॉलोनी स्थित गुप्ता क्लीनिक पर डॉ.इंद्र वाष्र्णेय की अध्यक्षता में हुई। जिसमें डेंगू बुखार पर विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ.इंद्र वार्ष्णेय ने बताया कि डेंगू के उपचार में होम्योपैथिक दवाएं भी अत्यंत प्रभावी हैं, जो कि मरीजों के अलग-अलग लक्षणों के आधार पर चयनित की जाती हैं। डॉ.आकाश गुप्ता ने बताया कि डेंगू में अचानक तेज बुखार सिर, मांसपेशी व जोड़ों में दर्द, कमजोरी, भूख न लगना, जी मिचलाना आदि डेंगू के प्रारंभिक लक्षण होते हैं।
डॉ.आनंद माहौर ने अपने संबोधन में बताया कि डेंगू के मच्छर व इसके संक्रमण से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग किया जाए। डॉ.हर्ष गर्ग ने अपने संबोधन में कहा डेंगू जांच के लिए एंटीजन टेस्ट आईजीजी, आईजीएम टेस्ट पॉजिटिव होने चाहिए। तब ही डेंगू कन्फर्म माना जाएगा। प्लेटलेट्स की संख्या दस हजार से कम जाने पर ही डेंगू में खतरा होता है। डॉ. कुणाल वार्ष्णेय ने बताया कि डेंगू बुखार के बचाव की दवा एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा साप्ताहिक पिलाई जाएगी।
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सभी चिकित्सक सप्ताह के बुधवार और रविवार को अपने अपने क्लीनिक से दवाई को मरीजों को देंगे और यह क्रम डेंगू एपिडेमिक के चलने तक जारी रहेगा। इस मौके पर डॉ.यूएस गौड़, डॉ.रवि चौधरी, डॉ.शशांक मोहता, डॉ.योगेश गुप्ता, डॉ.नीलम सिंह, डॉ.गोपाल ठेंनुआ आदि मौजूद थे।
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एचएमएआई की मासिक समीक्षा बैठक में डेंगू बुखार के इलाज पर सभी ने रखे अपने विचार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। सोमवार को एचएमएआई हाथरस यूनिट की मासिक बैठक आवास विकास कॉलोनी स्थित गुप्ता क्लीनिक पर डॉ.इंद्र वाष्र्णेय की अध्यक्षता में हुई। जिसमें डेंगू बुखार पर विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ.इंद्र वार्ष्णेय ने बताया कि डेंगू के उपचार में होम्योपैथिक दवाएं भी अत्यंत प्रभावी हैं, जो कि मरीजों के अलग-अलग लक्षणों के आधार पर चयनित की जाती हैं। डॉ.आकाश गुप्ता ने बताया कि डेंगू में अचानक तेज बुखार सिर, मांसपेशी व जोड़ों में दर्द, कमजोरी, भूख न लगना, जी मिचलाना आदि डेंगू के प्रारंभिक लक्षण होते हैं।
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डॉ.आनंद माहौर ने अपने संबोधन में बताया कि डेंगू के मच्छर व इसके संक्रमण से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग किया जाए। डॉ.हर्ष गर्ग ने अपने संबोधन में कहा डेंगू जांच के लिए एंटीजन टेस्ट आईजीजी, आईजीएम टेस्ट पॉजिटिव होने चाहिए। तब ही डेंगू कन्फर्म माना जाएगा। प्लेटलेट्स की संख्या दस हजार से कम जाने पर ही डेंगू में खतरा होता है। डॉ. कुणाल वार्ष्णेय ने बताया कि डेंगू बुखार के बचाव की दवा एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा साप्ताहिक पिलाई जाएगी।
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सभी चिकित्सक सप्ताह के बुधवार और रविवार को अपने अपने क्लीनिक से दवाई को मरीजों को देंगे और यह क्रम डेंगू एपिडेमिक के चलने तक जारी रहेगा। इस मौके पर डॉ.यूएस गौड़, डॉ.रवि चौधरी, डॉ.शशांक मोहता, डॉ.योगेश गुप्ता, डॉ.नीलम सिंह, डॉ.गोपाल ठेंनुआ आदि मौजूद थे।