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गोवंश की संख्या घटने पर जताई नाराजगी
Sun, 26 May 2019 12:12 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Sun, 26 May 2019 12:12 AM IST
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अस्थायी गोशाला में लगा ताला।
- फोटो : अमर उजाला
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सासनी। पराग डेयरी में बनी अस्थायी गोशाला का शनिवार को डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने औचक निरीक्षण किया। उन्होंने पशुशाला में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने एवं नर-मादा पशुओं को प्रथक करने के निर्देश दिए। हैरत की बात यह है कि पराग डेयरी में पशुओं की संख्या निरंतर घटती जा रही है। नाराजगी इस बात पर भी जताई कि प्रमुख सचिव पशुधन एवं जिला स्तरीय कमेटी के अनुमोदन के बाद भी कर्मियों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। हालांकि प्रशासन ने पराग डेयरी में मीडिया कर्मियों के आने पर पाबंदी लगा दी है।
आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए शासन ने अस्थायी गोशालाओं के निर्माण की अनुमति तो जिला प्रशासन को दे दी थी। संसाधनों के आभाव में गोशाला में पशुओं की संख्या निरंतर घटती चली गई। इसका प्रमुख कारण पशुओं की मौत या पशुओं का छोड़ा जाना हो सकता है। हालांकि चर्चा है कि पराग डेयरी में बनी अस्थायी गोशाला में करीब तीन हजार गोवंश थे, लेकिन संसाधनों के अभाव में यहां कैद गोवंश की संख्या लगातार घटती चली गई। हालांकि वर्तमान जिला प्रशासन ने इस गोशाला में बिजली, पानी और टिन शेड की व्यवस्था कराई है, जो पशुओं की संख्या के हिसाब से नाकाफी साबित हो रही है।
प्रशासन की मानें तो वर्तमान में 300 नर और 240 मादा गोवंश है। दूसरी तरफ प्रशासन टैगिंग कराने के निर्देश दे रहा है। हालांकि शनिवार को डीएम द्वारा किए गए निरीक्षण में शत प्रतिशत टैगिंग कराने और पांच नए टिन शेड बनाने के निर्देश दिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भस्थ गोवंश दिन रोज शिथिल होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण गर्भावस्था में मानक के अनुरूप दाना, पानी और चारा नहीं मिलना है।
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आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए शासन ने अस्थायी गोशालाओं के निर्माण की अनुमति तो जिला प्रशासन को दे दी थी। संसाधनों के आभाव में गोशाला में पशुओं की संख्या निरंतर घटती चली गई। इसका प्रमुख कारण पशुओं की मौत या पशुओं का छोड़ा जाना हो सकता है। हालांकि चर्चा है कि पराग डेयरी में बनी अस्थायी गोशाला में करीब तीन हजार गोवंश थे, लेकिन संसाधनों के अभाव में यहां कैद गोवंश की संख्या लगातार घटती चली गई। हालांकि वर्तमान जिला प्रशासन ने इस गोशाला में बिजली, पानी और टिन शेड की व्यवस्था कराई है, जो पशुओं की संख्या के हिसाब से नाकाफी साबित हो रही है।
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प्रशासन की मानें तो वर्तमान में 300 नर और 240 मादा गोवंश है। दूसरी तरफ प्रशासन टैगिंग कराने के निर्देश दे रहा है। हालांकि शनिवार को डीएम द्वारा किए गए निरीक्षण में शत प्रतिशत टैगिंग कराने और पांच नए टिन शेड बनाने के निर्देश दिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भस्थ गोवंश दिन रोज शिथिल होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण गर्भावस्था में मानक के अनुरूप दाना, पानी और चारा नहीं मिलना है।
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