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Hathras News: जिले में 5339 महिलाओं को मिली आयरन सुक्रोज की खुराक
Tue, 25 Aug 2026 02:41 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 25 Aug 2026 02:41 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
गर्भावस्था के दौरान खून की कमी यानी एनीमिया से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को आयरन सुक्रोज देकर शरीर में आयरन की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में दिसंबर 2025 से अब तक 5339 पीड़ित महिलाओं को आयरन सुक्रोज दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में इन महिलाओं में से 544 महिलाओं के सुरक्षित सामान्य प्रसव हुए हैं, जबकि 95 महिलाओं को सिजेरियन प्रसव कराना पड़ा। आंकड़ों के मुताबिक आयरन सुक्रोज पाने वाली महिलाओं में करीब 10.2 प्रतिशत के सामान्य प्रसव, जबकि करीब 1.8 प्रतिशत के सिजेरियन प्रसव हुए हैं। शेष महिलाओं की गर्भावस्था और स्वास्थ्य की स्थिति पर विभाग की टीमें लगातार नजर रख रही हैं।
एसीएमओ डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि गर्भावस्था में आयरन की जरूरत बढ़ जाती है। शरीर में पर्याप्त आयरन न होने पर हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है और महिला एनीमिया की चपेट में आ जाती है। गंभीर एनीमिया की स्थिति में कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना और प्रसव के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के साथ हीमोग्लोबिन स्तर की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।
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मुरसान में सबसे अधिक पीड़ित
आठ महीनों के आंकड़ों में सबसे अधिक एनीमिया पीड़ित महिलाएं मुरसान ब्लॉक में मिली हैं, जिनमें इनकी संख्या 979 है। सादाबाद में 914 व सिकंदराराऊ में 899 महिलाएं पीड़ित हैं। सबसे कम हाथरस शहर में 88 महिलाएं एनीमिया पीड़ित मिली हैं।
आंकड़ों में स्थिति
5339 एनीमिया पीड़ित महिलाओं को आयरन सुक्रोज दिया गया
544 महिलाओं के सामान्य प्रसव हुए
95 महिलाओं के सिजेरियन प्रसव हुए
10.2% आयरन सुक्रोज पाने वाली महिलाओं में सामान्य प्रसव
1.8% आयरन सुक्रोज पाने वाली महिलाओं में सिजेरियन प्रसव
मातृ व शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। आयरन सुक्रोज के साथ नियमित जांच और फॉलोअप पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि प्रसव के समय किसी तरह की गंभीर स्थिति उत्पन्न न हो।
-डॉ. वेदप्रकाश, सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में इन महिलाओं में से 544 महिलाओं के सुरक्षित सामान्य प्रसव हुए हैं, जबकि 95 महिलाओं को सिजेरियन प्रसव कराना पड़ा। आंकड़ों के मुताबिक आयरन सुक्रोज पाने वाली महिलाओं में करीब 10.2 प्रतिशत के सामान्य प्रसव, जबकि करीब 1.8 प्रतिशत के सिजेरियन प्रसव हुए हैं। शेष महिलाओं की गर्भावस्था और स्वास्थ्य की स्थिति पर विभाग की टीमें लगातार नजर रख रही हैं।
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एसीएमओ डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि गर्भावस्था में आयरन की जरूरत बढ़ जाती है। शरीर में पर्याप्त आयरन न होने पर हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है और महिला एनीमिया की चपेट में आ जाती है। गंभीर एनीमिया की स्थिति में कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना और प्रसव के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के साथ हीमोग्लोबिन स्तर की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।
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मुरसान में सबसे अधिक पीड़ित
आठ महीनों के आंकड़ों में सबसे अधिक एनीमिया पीड़ित महिलाएं मुरसान ब्लॉक में मिली हैं, जिनमें इनकी संख्या 979 है। सादाबाद में 914 व सिकंदराराऊ में 899 महिलाएं पीड़ित हैं। सबसे कम हाथरस शहर में 88 महिलाएं एनीमिया पीड़ित मिली हैं।
आंकड़ों में स्थिति
5339 एनीमिया पीड़ित महिलाओं को आयरन सुक्रोज दिया गया
544 महिलाओं के सामान्य प्रसव हुए
95 महिलाओं के सिजेरियन प्रसव हुए
10.2% आयरन सुक्रोज पाने वाली महिलाओं में सामान्य प्रसव
1.8% आयरन सुक्रोज पाने वाली महिलाओं में सिजेरियन प्रसव
मातृ व शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। आयरन सुक्रोज के साथ नियमित जांच और फॉलोअप पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि प्रसव के समय किसी तरह की गंभीर स्थिति उत्पन्न न हो।
-डॉ. वेदप्रकाश, सीएमओ