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Hathras News: सीएमओ के फर्जी हस्ताक्षर से चार महीने तक पेट्रोल पंप से आता रहा डीजल, जांच कमेटी गठित

Fri, 31 Oct 2025 05:29 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 31 Oct 2025 05:29 PM IST
सार

मामला तूल पकड़ता देख आनन-फानन सीएमओ ने एसीएमओ मधुर कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी में डीआईओ डा. एमआई आलम व डॉ. अनिल शर्मा को सदस्य बनाया है।

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Diesel supplied from the petrol pump for four months with fake signature of CMO
कोल्ड चैन कक्ष में लगा जनरेटर - फोटो : संवाद

विस्तार

हाथरस स्वास्थ्य विभाग में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) व जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डीआईओ) के फर्जी हस्ताक्षर से पांच लाख रुपये का डीजल खपा देने का मामला सामने आया है। यह डीजल टीकों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल और फील्ड में ले जाने वाली गाड़ी में इस्तेमाल दिखाया गया है। फर्जी हस्ताक्षर के जरिए पंट्रोल पंप से डीजल लेने का यह मामला वर्ष 2022-23 का बताया जा रहा है। जब पंप संचालक का भुगतान रुका तो सीएमओ के सेवानिवृत्ति से दो दिन बुधवार को वह सीएमओ कार्यालय पहुंच गए। मामले के तूल पकडऩे पर सीएमओ ने जांच कमेटी गठित कर दी है।

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नेशनल हेल्थ मिशन के तहत रूटीन इम्यूनाइजेशन (आरआई) योजना में पांच साल तक के बच्चों व गर्भवती महिलाओं को 12 तरह के टीके लगते हैं। इन टीकों को सुरक्षित रखने के लिए जिला अस्पताल परिसर में ही कोल्ड चेन बना है। साथ में इन टीकों को लाने ले जाने के लिए गाड़ी भी है। यहां जेनरेटर व गाड़ी में डीजल की आपूर्ति पूर्व चेयरमैन आशीष शर्मा के मेंडू रोड स्थित पेट्रोल पंप से होती थी। इसके लिए पेट्रोप पंप के मैनेजर ने बिल बुक कोल्ड चेन के प्रभारी धर्म सिंह को दे रखी थी। धर्म सिंह की जिम्मेदारी थी कि वह बिल पर सीएमओ की मुहर लगवा कर उनके या फिर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी के हस्ताक्षर कराकर कर्मचारी को पर्ची देंगे। तभी पंप से उस पर्ची से डीजल मिलेगा। 
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मगर 2022-23 में चार माह के बिलों के करीब पांच लाख रुपये का भुगतान सीएमओ कार्यालय ने रोक दिया। अब तक तो पंप प्रबंधन शांत रहा। मगर अब सीएमओ शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसलिए बुधवार को आशीष शर्मा सीएमओ से मिले। भुगतान कराने को कहा। उन्होंने बताया कि उन बिलों पर उनके व डीआईओ के फर्जी हस्ताक्षर हैं। इसलिए भुगतान नहीं हो सकता। ऐसा लग रहा है कि किसी कर्मचारी ने फर्जी हस्ताक्षर कर डीजल मंगवाया है। प्रारंभिक जांच में कोल्ड चेन प्रभारी शक के दायरे में आ रहे हैं। अब तक पंप स्वामी के जागरूक न होने पर मामला दबा था। मगर बुधवार को उनके पहुंचने पर प्रकरण ने तूल पकड़ा।

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मामला स्वास्थ्य विभाग का नहीं है। बिल यहां प्रस्तुत नहीं हो सके थे। धर्म सिंह व पेट्रोल पंप संचालक के बीच का प्रकरण था। फिर भी मामले की तह तक जाने के लिए जांच कमेटी गठित कर दी है। रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।-डा. मंजीत सिंह, सीएमओ

अब जांच कमेठी गठित

मामला तूल पकड़ता देख आनन-फानन सीएमओ ने एसीएमओ मधुर कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी में डीआईओ डा. एमआई आलम व डॉ. अनिल शर्मा को सदस्य बनाया है।

अब अंदरखाने भुगतान कर मामला निपटाने का प्रयास
डीजल घोटाला सामने आने के बाद से सीएमओ कार्यालय में गहमा-गहमी बनी हुई है। पेट्रोल पंप संचालक को भुगतान का आश्वासन देकर कई महीने से टरकाया जा रहा था। मगर अब पंप संचालक ने जब जोर दिया तो अंदरखाने मामला निपटाने का भी प्रयास हो रहा है। सूत्रों के अनुसार पांच लाख रुपये में से लगभग एक लाख रुपये का भुगतान छह माह पहले कोल्ड चेन प्रभारी के जरिए हो चुका था। शेष चार लाख रुपये के भुगतान के प्रयास में पंप संचालक लगे थे। सही आश्वासन न मिलने पर सीएमओ व अन्य अधिकारियों से बुधवार को नोकझोंक हो गई थी। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारी यही कहते रहे कि यह प्रकरण पंप संचालक व कोल्ड चेन प्रभारी धर्म सिंह के बीच का है। बृहस्पतिवार को पंप संचालक व धर्म सिंह दोनों पक्ष के लोग सीएमओ कार्यालय पर एकत्रित हुए। जहां अंदरखाने मामला निपटाने का प्रयास हुआ। चुपचाप भुगतान भी हुआ है। मगर किसी ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

ऑडिट नहीं कराया
विभागीय जानकारी के अनुसार जब एक पेट्रोल पंप का मामला सामने आया तो सीएमओ ने लगभग सभी गाडिय़ों का ऑडिट किया था। सभी विभागों ने ऑडिट करा लिया था, लेकिन धर्म सिंह अपनी लॉग बुक लेकर नहीं पहुंचे। इन्हें इस संबंध में नोटिस भी गया था।

एक और पंप का रुका भुगतान
इसी तरह एक अन्य पेट्रोल पंप से भी कोल्ड चेन को डीजल जाता है। इस पंप के भी लगभग 54 हजार रुपये फंसे हुए हैं। यहां भी बिल वाउचर पर फर्जी हस्ताक्षर की संभावना है, लेकिन पंप संचालक आगे व्यापार चलाने की खातिर शांत हैं।

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