{"_id":"69792535f4a16fc47d07dfe7","slug":"demand-for-deliberation-on-new-ugc-provisions-zila-panchayat-chairman-sends-letter-hathras-news-c-56-1-sali1016-143751-2026-01-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: यूजीसी के नये प्रावधानों पर मंथन की मांग, जिपं अध्यक्ष ने भेजा पत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: यूजीसी के नये प्रावधानों पर मंथन की मांग, जिपं अध्यक्ष ने भेजा पत्र
Wed, 28 Jan 2026 02:21 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 28 Jan 2026 02:21 AM IST
विज्ञापन
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कुछ नये प्रस्तावों के विरोध के बीच वरिष्ठ भाजपा नेता एवं हाथरस की जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा रामवीर उपाध्याय ने प्रधानमंत्री और यूजीसी अध्यक्ष/सचिव को पत्र भेजकर एक संतुलित नीति बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रावधानों में सुधार की गुंजाइश है, ताकि सभी वर्गों का पूरा सम्मान हो।
उन्होंने कहा कि नये प्रावधानों को लेकर शिक्षित युवाओं और शिक्षकों में योग्यता, अनुभव और परिश्रम के मूल्यांकन को लेकर कुछ आशंकाएं उत्पन्न हो रही हैं। सीमा उपाध्याय ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका निवेदन अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों के विरोध में नहीं है, क्योंकि ये वर्ग समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके उत्थान के प्रयास सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने आग्रह किया कि यूजीसी प्रावधानों पर पुनः व्यापक विचार-विमर्श कर ऐसा संतुलित समाधान निकाला जाए, जिसमें सवर्ण, पिछड़ा, अनुसूचित जाति व जनजाति सभी वर्गों के शिक्षार्थियों एवं शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखा जाए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक सौहार्द और शिक्षा व्यवस्था दोनों मजबूत होंगी। इस पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री की नीति “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालेगी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि नये प्रावधानों को लेकर शिक्षित युवाओं और शिक्षकों में योग्यता, अनुभव और परिश्रम के मूल्यांकन को लेकर कुछ आशंकाएं उत्पन्न हो रही हैं। सीमा उपाध्याय ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका निवेदन अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों के विरोध में नहीं है, क्योंकि ये वर्ग समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके उत्थान के प्रयास सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
विज्ञापन
उन्होंने आग्रह किया कि यूजीसी प्रावधानों पर पुनः व्यापक विचार-विमर्श कर ऐसा संतुलित समाधान निकाला जाए, जिसमें सवर्ण, पिछड़ा, अनुसूचित जाति व जनजाति सभी वर्गों के शिक्षार्थियों एवं शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखा जाए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक सौहार्द और शिक्षा व्यवस्था दोनों मजबूत होंगी। इस पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री की नीति “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालेगी।