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हाथरस: दाऊजी मेला शुरू होने में 12 दिन शेष, धीमी गति से हो रहीं तैयारियां, मंदिर में सबमर्सिबल पंप पड़ी खराब
Thu, 03 Sep 2026 04:45 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Thu, 03 Sep 2026 04:45 PM IST
सार
मेला सिर पर होने के बावजूद मंदिर में अब तक रंगाई-पुताई का कार्य भी प्रारंभ नहीं कराया जा सका है। इसके अलावा पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त बनी हुई है। मंदिर परिसर में स्थापित सबमर्सिबल पंप लंबे समय से खराब पड़ी।
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हाथरस का दाऊजी मंदिर
- फोटो : संवाद
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विस्तार
ब्रज क्षेत्र के प्रसिद्ध लक्खी मेला श्री दाऊजी महाराज मेले के शुरू होने में महज 12 दिन का समय शेष रह गया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों की रफ्तार बेहद सुस्त पड़ी हुई है। मेले के मुख्य केंद्र बिंदु दाऊजी मंदिर परिसर में ही अव्यवस्थाओं का बोलबाला है, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
मेला सिर पर होने के बावजूद मंदिर में अब तक रंगाई-पुताई का कार्य भी प्रारंभ नहीं कराया जा सका है। इसके अलावा पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त बनी हुई है। मंदिर परिसर में स्थापित सबमर्सिबल पंप लंबे समय से खराब पड़ी है, जबकि बाहरी क्षेत्र में लगी दूसरी सबमर्सिबल भी बार-बार तकनीकी खराबी के कारण जवाब दे रही हैं।
आमजन और श्रद्धालुओं के लिए लगाई गई प्याऊ की टोंटियों में लीकेज होने से पानी की टंकी बार-बार खाली हो जाती हैं, जिससे मंदिर आने वाले लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं। तैयारियों में हो रही इस लापरवाही से मंदिर के पुजारियों और स्थानीय नागरिकों में रोष है। उन्हें डर सता रहा है कि हर बार की तरह इस बार भी अंतिम समय में आनन-फानन में काम कराकर केवल खानापूर्ति और इतिश्री कर दी जाएगी, जिससे मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बदहाली से जूझना पड़ेगा।
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मेला सिर पर होने के बावजूद मंदिर में अब तक रंगाई-पुताई का कार्य भी प्रारंभ नहीं कराया जा सका है। इसके अलावा पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त बनी हुई है। मंदिर परिसर में स्थापित सबमर्सिबल पंप लंबे समय से खराब पड़ी है, जबकि बाहरी क्षेत्र में लगी दूसरी सबमर्सिबल भी बार-बार तकनीकी खराबी के कारण जवाब दे रही हैं।
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आमजन और श्रद्धालुओं के लिए लगाई गई प्याऊ की टोंटियों में लीकेज होने से पानी की टंकी बार-बार खाली हो जाती हैं, जिससे मंदिर आने वाले लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं। तैयारियों में हो रही इस लापरवाही से मंदिर के पुजारियों और स्थानीय नागरिकों में रोष है। उन्हें डर सता रहा है कि हर बार की तरह इस बार भी अंतिम समय में आनन-फानन में काम कराकर केवल खानापूर्ति और इतिश्री कर दी जाएगी, जिससे मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बदहाली से जूझना पड़ेगा।
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