हत्या के मामलों में सात को उम्रकैद
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हाथरस। अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने हत्या के दो अलग-अलग मामलों में सात लोगों को दोषी ठहराते हुए उन्हें सश्रम आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। सहपऊ के गांव महरारा के मामले में न्यायालय ने अर्थदंड अदा नहीं करने पर 10-10 माह का अतिरिक्त कारावास भोगने की भी व्यवस्था दी है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक मुस्ताक अली निवासी महरारा ने कोतवाली सहपऊ पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाए थे कि 28 सितंबर, 2001 को सुबह साढे़ सात बजे उसे फोन पर सूचना मिली कि उसके पुत्र इस्तियाक अली की हत्या बीती 27-28 सितंबर को केएस इंटर कॉलेज महरारा के पीछे हो गई है। लाश मौके पर पड़ी है। वह अपने परिजनों के साथ मौके पर पहुंचा तो उसके दूसरे लड़के इशफाक अली ने बताया कि मृतक इस्तियाक अली और मनोज गौतम व बल्लभ गौतम निवासी महरारा कोतवाली सहपऊ के बीच 25 सितंबर, 2001 को कहासुनी और हाथापाई हुई थी। इन दोनों ने इस्तियाक को जान से मारने की धमकी दी थी, जिससे उस शक है कि इस्तियाक की हत्या में इन्हीं लोगों का हाथ है। पुलिस ने आरोपी बल्लभ को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर आला कत्ल बरामद किया। हत्या में बलवीर सिंह, धीरा, मनोज कुमार और राधाबल्लभ के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने के बाद चारों आरोपियों को दोषी करार दिया और चारों को सश्रम आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह भी व्यवस्था दी है कि अर्थदंड अदा नहीं करने पर दोषियों को 10-10 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जुर्माने की धनराशि का 70 प्रतिशत मृतक के माता-पिता को दिया जाएगा। न्यायालय ने आरोपियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को भी सजा में शामिल करने का भी निर्णय दिया है।
जैतपुर हत्याकांड में भी तीन को उम्रकैद हाथरस। अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने प्राणघातक हमले में घायल की उपचार के दौरान मौत के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। तीनों को सश्रम आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। उच्च न्यायालय ने छह माह में सुनवाई पूर्ण करने के आदेश दिए थे, जिससे न्यायालय ने निर्णय सुनाने के बाद अपनी अनुपालन आख्या उच्च न्यायालय को भेज दी है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक चमनेश सिंह निवासी जैतपुर ने कोतवाली हाथरस जंक्शन में 19 सितंबर, 2012 को तहरीर दी, जिसमें आरोप था कि उसके चाचा रामबाबू के खेत से पेड़ काट लाए थे। जब उसके चाचा ने विनोद कुमार से पेड़ काटने के बारे में पूछा तो विनोद और उसके पुत्र रवि, दीपक, छोटू गाली-गलौज करने लगे। रामबाबू अपने घर आ गए। इस दौरान यह चारों पिता-पुत्र लाठी-डंडों, फरसा और तमंचों से लैस होकर आए और दरवाजे के सामने खडे़ उसके चाचा रामबाबू के सिर में वार करने लगे। रवि ने उसके हाथ में लगे फरसे से रामबाबू के सिर में प्राण घातक हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने घटना की जांच के बाद विनोद कुमार, रवि, दीपक और छोटू के विरुद्ध धारा 307,302,223,324, 504,506 आईपीसी के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद न्यायालय ने तीनों को धारा 324 में दो-दो वर्ष का कारावास, दो-दो हजार रुपये एवं धारा 323 में छह-छह माह का कारावास एवं एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा होने पर 70 प्रतिशत धनराशि मृतक की पत्नी को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का निर्णय दिया है। जेल में बिताई गई अवधि भी सजा में शामिल होगी।