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तीन घंटे उपद्रवियों के कब्जे में रहा हाइवे 

Fri, 04 Aug 2017 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, सादाबाद (हाथरस)। 
अमर उजाला ब्यूरो, सादाबाद (हाथरस)।  Updated Fri, 04 Aug 2017 12:08 AM IST
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Mob hijacked highway till Three hour
mob on highway - फोटो : amar ujala
बढ़ार चौराहे पर हादसे में युवक की मौत के बाद करीब तीन घंटे तक आगरा-अलीगढ़ रोड पर आक्रोशित भीड़ का कब्जा रहा। भीड़ और पुलिस के बीच काफी देर तक गुरिल्ला युद्ध जैसे हालात नजर आए। एक तरफ से भीड़ पुलिस पर पत्थर फेंक रही थी, दूसरी तरफ भीड़ को साधने के लिए पुलिस कर्मियों को फायरिंग करनी पड़ी। पुलिस ने जैसे तैसे भीड़ पर काबू पाया। 
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जवाब में भीड़ की तरफ से फायरिंग होने की जानकारी मिली है। फायरिंग के बावजूद काफी देर तक वहां भीड़ की तरफ से पथराव होता रहा और वाहनों में तोड़फोड़ की जाती रही। रोडवेज बसों में सवार यात्री दहशत में आ गए और बसों में से उतरकर भाग छूटे।  जिले के अन्य थानों की फोर्स और पीएसी के पहुंचने के बाद ही भीड़ काबू में आ सकी।  
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आक्रोशित लोगों ने रोडवेज की नरौरा डिपो और हाथरस डिपो की एक-एक बस के शीशे तोड़ दिए। वहां से गुजर रही सरकारी एंबुलेंस को भी नही बख्शा। मवेशियों के भरे एक लोडर के भी शीशे तोड़ दिए। आक्रोशित लोगों ने वाहनों में सवार लोगों से अभद्रता की, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गई।
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दोपहर करीब डेढ़ बजे हुई दुर्घटना के बाद लगा यह जाम शाम को करीब साढ़े चार बजे जाकर उस समय खुला, जब आक्रोशित लोगों को समझाने और क्षेत्रीय विधायक रामवीर उपाध्याय ने पीड़ित को पक्ष को अपनी तरफ से पूरी मदद दिलाने का आश्वासन दिया। तब जाकर सड़क से मृतक सतेंद्र का शव लोगों ने उठने दिया। मौके से मृतक के शव को पुलिस सीधे हाथरस ले गई। 

वक्त पर मदद मिल जाती तो बच सकती थी जान
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो कैंटर के नीचे दबे युवक की मौत के लिए कहीं न कहीं पुलिस की लापरवाही जिम्मेदार रही है। काफी देर तक यह युवक कैंटर के नीचे दबकर छटपटाता रहा, लेकिन मौके पर उसे कैंटर के नीचे से निकालने का कोई साधन नहीं था और न हीं उसे पुलिस की मदद मिली। कैंटर पलटने के बाद पीछा कर रही पुलिस की पीआरवी भी उल्टे पांव लौट गई। लोगों का गुस्सा भड़कने की एक वजह यह भी रही। 

लोगों का कहना था कि यदि उस वक्त पुलिस की गाड़ी मौके पर होती और क्रेन आदि मंगवाकर कैंटर को सीधा करा दिया गया होता तो उसके नीचे दबे युवक की जान बचाई जा सकती थी। युवक का एक हाथ और एक पांव ही इसकी चपेट में आया था। वह काफी देर तक मौके पर तड़पता रहा और भीड़ के सामने ही उसने दम तोड़ दिया। पुलिस के प्रति लोगों की नाराजगी का यह आलम था कि कुछ पुलिस कर्मी उनके कोप के शिकार बन गए।  घायल सिपाही मानवेंद्र का कहना है कि उस पर 50-60 की संख्या में लोग टूट पड़े और उसे सड़क पर डालकर उसके साथ लात-घूंसों से मारपीट की। उसकी रायफल छीन ली गई। बाद में रायफल तो किसी प्रकार मिल गई, लेकिन उसकी मैगजीन गायब थी। 

उगाही के लिए कैंटर का पीछा कर रही थी पीआरवी
सादाबाद में हुए हादसे के संबंध में गुरुवार की देर शाम मृतक के पिता ताराचंद्र पुत्र रामजीत की तरफ से दो अलग-अलग तहरीर पुलिस को दी गईं। पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रही थी। 

पहली तहरीर में कहा गया है कि गुरुवार दोपहर को डेढ़ बजे उनका पुत्र सतेंद्र (22 वर्ष) आपनी साइकिल से एसएन कोल्ड स्टोर से बढ़ार की तरफ आ रहा था। पीछे से वह और उनका दूसरा बेटा रामकुमार भी साइकिल से आ रहे थे। तभी बढ़ार चौराहे पर पीछे से आ रहे कैंटर संख्या यूपी 80 बीटी-9621 ने तेजी और लापरवाही से गाड़ी चलाकर सतेंद्र को टक्कर मार दी और कैंटर के चालक ने अपने बचाव के लिए कैंटर को पलट दिया और कैंटर को छोड़कर भाग गया। इस मामले में पुलिस ने कैंटर के अज्ञात चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। 


दूसरी तहरीर में कहा गया है कि उसका बेटा सतेंद्र एसएन कोल्ड स्टोर में पल्लेदारी का काम करता है। गुुरुवार की दोपहर को वह करीब डेढ़ बजे वह बढ़ार चौराहे पर कुछ सामान खरीदने के लिए गया था। सादाबाद की तरफ से आ रहे कैंटर, जिसमें अवैध पशु लदे थे, तेज गति से आ रहा था। इसका पीछा पुलिस की पीआरवी उगाही के चक्कर में कर रही थी। कैंटर चालक ने हडबड़ाहट में मेरे पुत्र को टक्कर मार दी और कैंटर पलट गया। इसके नीचे मेरा पुत्र दब गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हादसे के बारे में मेरे परिवार और गांव के लोगों को पता चला तो सभी लोग मौके पर पहुंच गए और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से नोक-झोंक हो गई, जिससे बौखलाकर पुलिस कर्मियों ने मेरे परिवार और गांव के लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें कई लोग बाल-बाल बच गए। 
 
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