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दहेज हत्या के चार दोषियों को उम्रकैद
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Sat, 30 Jul 2016 12:10 AM IST
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अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी कोर्ट प्रथम राजकुमार बंसल के न्यायालय ने हत्या के चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने चारों को 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई हैं।
अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में चारों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की 50 प्रतिशत धनराशि प्रतिकर के रूप में वादी को दिए जाने का निर्णय दिया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक वादी सुनील कुमार निवासी नगला खान ने कोतवाली चंदपा में तहरीर देकर आरोप लगाए कि उसने अपनी बहन की शादी एक मई, 2013 को अर्जुन सिंह पुत्र ईश्वरी प्रसाद निवासी ग्राम कैमार थाना चंदपा के साथ हिंदू रीति-रिवाज से की थी, जिसमें उसने सामर्थ्य के हिसाब से दान-दहेज दिया था।
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इस दहेज से उसके ससुरालीजन संतुष्ट नहीं थे। वह 50 हजार रुपये और मांगने की जिद पर अडे़ हुए थे। यह नाजायज मांग पूरी नहीं होने पर 3 मई, 2014 को उसकी बहन के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर पति अर्जुन सिंह, सास अंगूरी देवी, जेठानी अंजली देवी, जेठ बच्चू सिंह और देवर सुखवीर ने एकराय होकर जिंदा जलाने की नीयत से आग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गई। उपचार के दौरान 19 जुलाई, 2014 को उसकी मौत हो गई।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने के बाद आरोपियों को दोषी माना। न्यायालय ने मृतका के मृत्युपूर्ण बयान में शामिल अंगूरी देवी, बच्चू सिंह, अंजली एवं सुखवीर को दोषी माना, जबकि पति अर्जुन सिंह कामृत्युपूर्ण बयान में नाम नहीं होने के कारण दोषमुक्त करार दिया।
वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी एसएस चौहान ने की।
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अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में चारों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की 50 प्रतिशत धनराशि प्रतिकर के रूप में वादी को दिए जाने का निर्णय दिया है।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक वादी सुनील कुमार निवासी नगला खान ने कोतवाली चंदपा में तहरीर देकर आरोप लगाए कि उसने अपनी बहन की शादी एक मई, 2013 को अर्जुन सिंह पुत्र ईश्वरी प्रसाद निवासी ग्राम कैमार थाना चंदपा के साथ हिंदू रीति-रिवाज से की थी, जिसमें उसने सामर्थ्य के हिसाब से दान-दहेज दिया था।
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इस दहेज से उसके ससुरालीजन संतुष्ट नहीं थे। वह 50 हजार रुपये और मांगने की जिद पर अडे़ हुए थे। यह नाजायज मांग पूरी नहीं होने पर 3 मई, 2014 को उसकी बहन के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर पति अर्जुन सिंह, सास अंगूरी देवी, जेठानी अंजली देवी, जेठ बच्चू सिंह और देवर सुखवीर ने एकराय होकर जिंदा जलाने की नीयत से आग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गई। उपचार के दौरान 19 जुलाई, 2014 को उसकी मौत हो गई।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने के बाद आरोपियों को दोषी माना। न्यायालय ने मृतका के मृत्युपूर्ण बयान में शामिल अंगूरी देवी, बच्चू सिंह, अंजली एवं सुखवीर को दोषी माना, जबकि पति अर्जुन सिंह कामृत्युपूर्ण बयान में नाम नहीं होने के कारण दोषमुक्त करार दिया।
वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी एसएस चौहान ने की।