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रुपये और जेवरात के लिए बेटे ने ही की थी पिता की हत्या
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Thu, 24 Aug 2017 11:39 PM IST
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18 मार्च 2017 को मोहल्ला नौखेल की नई बस्ती शाहबुददीनगंज में हुई नत्थू खां की हत्या का आरोप उनके बेटे गोरखा पर लगा है। पुलिस ने दावा किया है कि पिता की गला दबाकर हत्या करने के बाद गोरखा ढाई लाख रुपये और जेवरात लेकर दिल्ली चला गया। उधर आरोपी युवक ने पुलिस पर झूठा फंसाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि पिता की हत्या उसने नहीं की है।
फ्लैश बैकः
नौखेल मोहल्ला निवासी नत्थू (65 वर्ष) का शव 18 मार्च को बंद मकान से बरामद किया गया था। शव से बदबू आने के बार मोहल्ले वालों ने पुलिस को सूचना दी थी। तब जाकर उसकी मौत की जानकारी पुलिस को हुई थी। मृतक की गला घोंट कर हत्या की गई थी। मामले की रिपोर्ट अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी।
पुलिस का खुलासा:
कोतवाल प्रमोद कुमार द्विवेदी ने बताया कि नत्थू सिकंदराराऊ में एक प्लांट खरीदना चाहते थे। उसके लिए उन्होंने ढाई लाख रुपये का इंतजाम किया था। घर में कुछ सोने का जेवरात भी थे। 13 मार्च को गारेखा ने नत्थू को फोन किया था कि वह दिल्ली आ जाएं। गोरखा 14 मार्च को सिकंदराराऊ आया और रात में पिता की हत्या करने के बाद ढाई लाख रुपये और जेवरात लेकर वापस दिल्ली चला गया। नत्थू की मौत के बाद उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। इधर योजना के अनुसार गोरखा लगातार पिता को फोन करता रहा। कई दिन तक फोन से संपर्क न होने के कारण 18 मार्च की रात में गोरखा दिल्ली से सिकंदराराऊ आया। सुबह नत्थू का शव घर में पड़ा मिला।
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बकौल कोतवाल छह माह से पुलिस मामले को खोलने के लिये कॉल डिटेल से लेकर हर पहलू पर विवेचना कर रही थी। पुलिस के अनुसार पूछताछ में गोरखा ने हत्या करने की बात कबूल कर ली है। इधर गोरखा ने कोतवाली में बताया कि पुलिस उसे झूठा फंसा रही है। सही हत्यारे का पता लगाने में असफल रहने पर पुलिस ने उसे ही बलि का बकरा बना दिया है। कुल मिला कर मामले को लेकर नगर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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फ्लैश बैकः
नौखेल मोहल्ला निवासी नत्थू (65 वर्ष) का शव 18 मार्च को बंद मकान से बरामद किया गया था। शव से बदबू आने के बार मोहल्ले वालों ने पुलिस को सूचना दी थी। तब जाकर उसकी मौत की जानकारी पुलिस को हुई थी। मृतक की गला घोंट कर हत्या की गई थी। मामले की रिपोर्ट अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी।
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पुलिस का खुलासा:
कोतवाल प्रमोद कुमार द्विवेदी ने बताया कि नत्थू सिकंदराराऊ में एक प्लांट खरीदना चाहते थे। उसके लिए उन्होंने ढाई लाख रुपये का इंतजाम किया था। घर में कुछ सोने का जेवरात भी थे। 13 मार्च को गारेखा ने नत्थू को फोन किया था कि वह दिल्ली आ जाएं। गोरखा 14 मार्च को सिकंदराराऊ आया और रात में पिता की हत्या करने के बाद ढाई लाख रुपये और जेवरात लेकर वापस दिल्ली चला गया। नत्थू की मौत के बाद उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। इधर योजना के अनुसार गोरखा लगातार पिता को फोन करता रहा। कई दिन तक फोन से संपर्क न होने के कारण 18 मार्च की रात में गोरखा दिल्ली से सिकंदराराऊ आया। सुबह नत्थू का शव घर में पड़ा मिला।
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बकौल कोतवाल छह माह से पुलिस मामले को खोलने के लिये कॉल डिटेल से लेकर हर पहलू पर विवेचना कर रही थी। पुलिस के अनुसार पूछताछ में गोरखा ने हत्या करने की बात कबूल कर ली है। इधर गोरखा ने कोतवाली में बताया कि पुलिस उसे झूठा फंसा रही है। सही हत्यारे का पता लगाने में असफल रहने पर पुलिस ने उसे ही बलि का बकरा बना दिया है। कुल मिला कर मामले को लेकर नगर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।