{"_id":"580e4d604f1c1bcf75bc2aab","slug":"dalit-woman-in-the-rape-and-murder-of-life-imprisonment","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुष्कर्म के बाद दलित युवती की हत्या में उम्रकैद","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दुष्कर्म के बाद दलित युवती की हत्या में उम्रकैद
अमर उजाला, हाथरस
Updated Mon, 24 Oct 2016 11:35 PM IST
विज्ञापन
sdf
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने दुष्कर्म के बाद दलित युवती की हत्या के एक मामले में अभियुक्त को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियुक्त् पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी नहीं लगाया है। नहीं देने पर उसे दस महीने का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
थाना सादाबाद क्षेत्र के एक गांव निवासी दलित व्यक्ति ने 26 मई 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा कि उनकी 18 वर्षीय बेटी 25 मई 2014 की शाम अपनी सहेली के साथ शौच करने गई थी। रात्रि में उनकी सहेली तो अपने घर वापस आ गई, लेकिन उनकी बेटी नहीं आई। जब उन्होंने सहेली से अपनी बेटी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह स्कूल की तरफ शौच करने गई थी।
तभी उसके गांव के लड़के का फोन आया था। फोन पर उनकी बेटी आगे खेत की तरफ चली गई और सहेली वापस आ गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि अभियुक्त गांव का आवारा लड़का है। उनकी लड़की को पहले से भी आते-जाते परेशान करता था। सुबह करीब 10 बजे उनके गांव के लड़के ने उन्हें बताया कि उनकी लड़की चरी के खेत में मृत पड़ी है।
विज्ञापन
पिता ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि उनकी लड़की की अभियुक्त ने ही अपने अन्य साथी के साथ मिलकर हत्या कर दी है।
मामला धारा 302, 376, 376ए और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ। सत्र परीक्षण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा किया गया और उसके बाद सेशन ट्रायल के लिए एडीजे न्यायालय में ट्रांसफर हुआ।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद सभी धाराओं में अभियुक्त को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को भी सजा की अवधि में समायोजित करने का आदेश न्यायालय ने दिया। अभियोजन पक्ष्ा की पैरवी एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय ने की।
विज्ञापन
थाना सादाबाद क्षेत्र के एक गांव निवासी दलित व्यक्ति ने 26 मई 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा कि उनकी 18 वर्षीय बेटी 25 मई 2014 की शाम अपनी सहेली के साथ शौच करने गई थी। रात्रि में उनकी सहेली तो अपने घर वापस आ गई, लेकिन उनकी बेटी नहीं आई। जब उन्होंने सहेली से अपनी बेटी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह स्कूल की तरफ शौच करने गई थी।
विज्ञापन
तभी उसके गांव के लड़के का फोन आया था। फोन पर उनकी बेटी आगे खेत की तरफ चली गई और सहेली वापस आ गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि अभियुक्त गांव का आवारा लड़का है। उनकी लड़की को पहले से भी आते-जाते परेशान करता था। सुबह करीब 10 बजे उनके गांव के लड़के ने उन्हें बताया कि उनकी लड़की चरी के खेत में मृत पड़ी है।
विज्ञापन
पिता ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि उनकी लड़की की अभियुक्त ने ही अपने अन्य साथी के साथ मिलकर हत्या कर दी है।
मामला धारा 302, 376, 376ए और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ। सत्र परीक्षण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा किया गया और उसके बाद सेशन ट्रायल के लिए एडीजे न्यायालय में ट्रांसफर हुआ।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद सभी धाराओं में अभियुक्त को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को भी सजा की अवधि में समायोजित करने का आदेश न्यायालय ने दिया। अभियोजन पक्ष्ा की पैरवी एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय ने की।