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नील गायों के कहर ने उड़ाई किसान की नींद
Updated Wed, 14 Jun 2017 11:43 PM IST
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ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस।
किसान दिन-रात मेहनत कर खेत में अपनी फसल को तैयार करता है। फसल लगाने से लेकर तैयार होने तक किसान कड़ी मेहनत करता है। प्राकृतिक आपदा आ जाए तो किसानों की पूरी फसल नष्ट हो जाती है, लेकिन इन-दिनों किसान प्राकृतिक आपदा के साथ नील गायों के प्रकोप से भी जूझ रहे हैं।
जिले के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में इस जंगली गायों का प्रकोप जोरों पर है। यह गायें किसानों की मेहनत से उपजाई गई फसल को अपने कदमों तले बेरहमी से रौंद रही हैं। किसान चाहते हुए भी इनका मुकाबला नहीं कर पा रहे। वन्य जीव होने के नाते किसान इन पर असलहों से भी हमला नहीं कर सकते। ऐसे में उनके पास सिवाय अपनी फसल की बर्बादी का तमाशा देखने के दूसरा कोई चारा भी नहीं है।
जिले के किसान दिन-रात एक कर फसल तैयार कर रहे हैं, लेकिन आवारा पशु और नील गायों के झुंड फसल को बर्बाद कर रहे हैं। किसानों ने अपने खेतों में मक्का, ज्वार, चरी और अरहर की फसल की है। गांव लहरा के किसान बनवारीलाल का कहना है कि नील गाय व अन्य आवारा पशुओं के प्रकोप से फसल नष्ट हो रही हैं।
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नीलगाय के झुंड फसल को खा जाते हैं और खेत में घूम कर फसल नष्ट कर देते हैं। खेतों की कितनी भी रखवाली की जाए, फिर भी फसल नष्ट हो रही हैं। एक बार 100 से 150 तक नीलगाय के झुंड एक साथ घूमते हैं। यही स्थिति जंगली सुअरों की भी है।
कई जगहों पर जंगली सुअरों के झुंड निर्द्वंद रूप से घूम रहे हैं और फसलों के साथ ग्रामीणों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। लगातार फसल नष्ट होने से उत्पादन कम हो रहा है। वन विभाग के अधिकारियों से भी कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायत की गई है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
किसानों की फसल को नष्ट कर रही नीलगायों को मारने के लिए किसानों द्वारा विधिवत रूप से कृषि विभाग के माध्यम से आवेदन भेजना चाहिए, जिसके बाद इनकों मारने की परमीशन दी जाती है। अभी तक जिले में किसी भी किसान का आवेदन उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है।
- मधुकर दयाल, प्रभागीय वनाधिकारी हाथरस
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किसान दिन-रात मेहनत कर खेत में अपनी फसल को तैयार करता है। फसल लगाने से लेकर तैयार होने तक किसान कड़ी मेहनत करता है। प्राकृतिक आपदा आ जाए तो किसानों की पूरी फसल नष्ट हो जाती है, लेकिन इन-दिनों किसान प्राकृतिक आपदा के साथ नील गायों के प्रकोप से भी जूझ रहे हैं।
जिले के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में इस जंगली गायों का प्रकोप जोरों पर है। यह गायें किसानों की मेहनत से उपजाई गई फसल को अपने कदमों तले बेरहमी से रौंद रही हैं। किसान चाहते हुए भी इनका मुकाबला नहीं कर पा रहे। वन्य जीव होने के नाते किसान इन पर असलहों से भी हमला नहीं कर सकते। ऐसे में उनके पास सिवाय अपनी फसल की बर्बादी का तमाशा देखने के दूसरा कोई चारा भी नहीं है।
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जिले के किसान दिन-रात एक कर फसल तैयार कर रहे हैं, लेकिन आवारा पशु और नील गायों के झुंड फसल को बर्बाद कर रहे हैं। किसानों ने अपने खेतों में मक्का, ज्वार, चरी और अरहर की फसल की है। गांव लहरा के किसान बनवारीलाल का कहना है कि नील गाय व अन्य आवारा पशुओं के प्रकोप से फसल नष्ट हो रही हैं।
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नीलगाय के झुंड फसल को खा जाते हैं और खेत में घूम कर फसल नष्ट कर देते हैं। खेतों की कितनी भी रखवाली की जाए, फिर भी फसल नष्ट हो रही हैं। एक बार 100 से 150 तक नीलगाय के झुंड एक साथ घूमते हैं। यही स्थिति जंगली सुअरों की भी है।
कई जगहों पर जंगली सुअरों के झुंड निर्द्वंद रूप से घूम रहे हैं और फसलों के साथ ग्रामीणों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। लगातार फसल नष्ट होने से उत्पादन कम हो रहा है। वन विभाग के अधिकारियों से भी कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायत की गई है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
किसानों की फसल को नष्ट कर रही नीलगायों को मारने के लिए किसानों द्वारा विधिवत रूप से कृषि विभाग के माध्यम से आवेदन भेजना चाहिए, जिसके बाद इनकों मारने की परमीशन दी जाती है। अभी तक जिले में किसी भी किसान का आवेदन उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है।
- मधुकर दयाल, प्रभागीय वनाधिकारी हाथरस