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मारपीट, रूपये छीनने के मामले में तीन साल के कारावास की सजा
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सादाबाद (हाथरस)
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सादाबाद के न्यायालय ने 1996 के मारपीट और रूपये छीनने के मामले में एक अभियुक्त को तीन साल के कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी राजवीर सिंह के चाचा के लड़के रमेश चंद्र पुत्र भगवान सिंह 17 मई 1996 को मथुरा से ड्यूटी कर साढ़े आठ बजे बस से अपने गांव के सामने सड़क से उतरकर कुछ कदम आगे बढ़े, कि झाडिय़ों में से दो बदमाश डंडा और तमंचा लिए निकले और उसे मारा पीटा और 460 रूपये छीन लिए और गोली मारने की धमकी दी।
ग्रामीणों की मदद से इन बदमाशों को पकड़ा गया। इन बदमाशों ने अपने नाम ओमी पुत्र गोपीचंद्र निवासी गढ़ तसींगा व गिर्राज पुत्र रूमाल सिंह निवासी टीकैत अरौठा बताया था। इस मामले में धारा 394 के तहत मुकद्मा भी दर्ज किया गया था। घटना में एक आरोपी गिर्राज सिंह की मौत हो चुकी है।
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इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सादाबाद अबुल कैश ने 23 जनवरी 2019 को आदेश देते हुए अभियुक्त ओमी को दफा 394 के आरोप में तीन साल के कठोर कारावास की सजा और एक हजार रूपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भी भुगतनी होगी।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सादाबाद के न्यायालय ने 1996 के मारपीट और रूपये छीनने के मामले में एक अभियुक्त को तीन साल के कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी राजवीर सिंह के चाचा के लड़के रमेश चंद्र पुत्र भगवान सिंह 17 मई 1996 को मथुरा से ड्यूटी कर साढ़े आठ बजे बस से अपने गांव के सामने सड़क से उतरकर कुछ कदम आगे बढ़े, कि झाडिय़ों में से दो बदमाश डंडा और तमंचा लिए निकले और उसे मारा पीटा और 460 रूपये छीन लिए और गोली मारने की धमकी दी।
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ग्रामीणों की मदद से इन बदमाशों को पकड़ा गया। इन बदमाशों ने अपने नाम ओमी पुत्र गोपीचंद्र निवासी गढ़ तसींगा व गिर्राज पुत्र रूमाल सिंह निवासी टीकैत अरौठा बताया था। इस मामले में धारा 394 के तहत मुकद्मा भी दर्ज किया गया था। घटना में एक आरोपी गिर्राज सिंह की मौत हो चुकी है।
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इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सादाबाद अबुल कैश ने 23 जनवरी 2019 को आदेश देते हुए अभियुक्त ओमी को दफा 394 के आरोप में तीन साल के कठोर कारावास की सजा और एक हजार रूपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भी भुगतनी होगी।