{"_id":"5c533a8cbdec2273ac45e075","slug":"111548958348-hathras-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चेयरमैन को मिली जमानत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
चेयरमैन को मिली जमानत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
नगर पंचायत अध्यक्ष विपिन वशिष्ठ तीन महीने 18 दिन बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा हो गए। गौरतलब है कि नगर पंचायत अध्यक्ष विपिन वशिष्ठ को सादाबाद पुलिस ने पिछले साल चार अक्तूबर गिरफ्तार करके जेल भेज था। चेयरमैन, उनके पिता मूलचरण वशिष्ठ, तत्कालीन तहसीलदार अखिलेश गुप्ता, आरके सत्यवीर सिंह और रिटायर्ड लेखपाल छत्रपाल पर सादाबाद कोतवाली में तहसील के अभिलेखों में फर्जी तरीके से कस्बा सहपऊ के जमींदारों के भूखंडों को अपने नाम पट्टे कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज था।
इस मुकदमे में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट मेरठ ने इन सभी के नाम गैर जमानती वारंट जारी किए थे। वारंट जारी होने के बाद सबसे पहले लेखपाल छत्रपाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनको उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद पुलिस ने चेयरमैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद उनके पिता, तत्कालीन तहसीलदार एवं तत्कालीन आरके बाबू ने भी कोर्ट में सरेंडर कर दिया। मेरठ से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद इन तीनों ने भी उच्च न्यायालय की शरण ली।
इनमें से चेयरमैन के पिता को बीमार होने के कारण एक माह पूर्व ही जमानत मिल चुकी थी। तीनों आरोपियों को उच्च न्यायालय ने 22 जनवरी 2019 को जमानत दे दी। जमानत मिलने के बाद तीनों जेल के अभिलेख पूरा करने के बाद 29 जनवरी को जेल से रिहा हो गए। पांचों आरोपियों के विरुद्ध मेरठ के भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर पंचायत अध्यक्ष विपिन वशिष्ठ तीन महीने 18 दिन बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा हो गए। गौरतलब है कि नगर पंचायत अध्यक्ष विपिन वशिष्ठ को सादाबाद पुलिस ने पिछले साल चार अक्तूबर गिरफ्तार करके जेल भेज था। चेयरमैन, उनके पिता मूलचरण वशिष्ठ, तत्कालीन तहसीलदार अखिलेश गुप्ता, आरके सत्यवीर सिंह और रिटायर्ड लेखपाल छत्रपाल पर सादाबाद कोतवाली में तहसील के अभिलेखों में फर्जी तरीके से कस्बा सहपऊ के जमींदारों के भूखंडों को अपने नाम पट्टे कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज था।
इस मुकदमे में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट मेरठ ने इन सभी के नाम गैर जमानती वारंट जारी किए थे। वारंट जारी होने के बाद सबसे पहले लेखपाल छत्रपाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनको उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद पुलिस ने चेयरमैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद उनके पिता, तत्कालीन तहसीलदार एवं तत्कालीन आरके बाबू ने भी कोर्ट में सरेंडर कर दिया। मेरठ से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद इन तीनों ने भी उच्च न्यायालय की शरण ली।
विज्ञापन
इनमें से चेयरमैन के पिता को बीमार होने के कारण एक माह पूर्व ही जमानत मिल चुकी थी। तीनों आरोपियों को उच्च न्यायालय ने 22 जनवरी 2019 को जमानत दे दी। जमानत मिलने के बाद तीनों जेल के अभिलेख पूरा करने के बाद 29 जनवरी को जेल से रिहा हो गए। पांचों आरोपियों के विरुद्ध मेरठ के भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है।
विज्ञापन