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35 खाताधारकों के खाते से 10.92 लाख साफ
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ(हाथरस)।
Updated Thu, 12 Apr 2018 11:35 PM IST
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क्षेत्र के गांव पोरा स्थित ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त में तैनात रह चुके एक प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और कार्यालय सहायक पर बैंक के साथ धोखाधड़ी करके 35 खातों से फरवरी 2013 से मई 2014 तक कूटरचित तरीके से रकम ट्रांसफर व डेबिट कर 10,92,851 रुपयों का बंदरबांट करने का आरोप लगा है। खातों की पड़ताल के पश्चात तीनों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।
वर्तमान बैंक प्रबंधक गिरधरगोपाल गुप्ता ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा है कि बैंक में तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्रीनिवास पुत्र सीताराम निवासी खोंड़ा, नारायण सिंह अलीगढ़, सहायक प्रबंधक जहारी सिंह पुत्र सोनपाल निवासी नौरंगाबाद पूर्वी सिकंदराराऊ और कार्यालय सहायक रामशरन परमार पुत्र साहब सिंह निवासी पूरनगंज सिकंदराराऊ ने आपस में साठगांठ कर बैंक के खातादारों से 16 माह के दौरान रकम ट्रांसफर की। जहारी सिंह सेवानिवृत्त हो चुका है जबकि श्रीनिवास का तबादला हो चुका है। रकम को ट्रांसफर करने के बाद कई खातों को डेबिट कर रकम उड़ाई गई।
रकम ट्रांसफर करने के पश्चात ये तीनों खुद मिल कर विड्रॉल वाउचर भरकर पैसा निकालते रहे। कुछ खातेदारों ने जब विड्रॉल और डेबिट एंट्री देखी तो बैंक को बताया। इस पर तमाम खातों की पड़ताल की गई। वाउचर भी चेक किए गए तो पूरा गोलमाल सामने आया। इस गोलमाल में लिप्त दो कर्मी अभी भी बैंक में कार्यरत हैं, जबकि इनमें से जहारी सिंह 31 जुलाई 2017 को रिटायर हो गए। 16 माह में तीनों ने कुल दस लाख बानवे हजार आठ सौ इक्यावन रुपये का घपला किया। बैंक प्रबंधक द्वारा उल्लेख किया गया है कि मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने को 11 माह पूर्व 11 मई 2017 को तहरीर दी गई थी, लेकिन कोतवाली पुलिस यह कह कर मामला टालती रही कि जांच चल रही है। जांच के बाद रिपोर्ट होगी। रिपोर्ट भी एसपी हाथरस के 10 मई को तहरीर पर आदेश के पश्चात की गई है।
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वर्तमान बैंक प्रबंधक गिरधरगोपाल गुप्ता ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा है कि बैंक में तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्रीनिवास पुत्र सीताराम निवासी खोंड़ा, नारायण सिंह अलीगढ़, सहायक प्रबंधक जहारी सिंह पुत्र सोनपाल निवासी नौरंगाबाद पूर्वी सिकंदराराऊ और कार्यालय सहायक रामशरन परमार पुत्र साहब सिंह निवासी पूरनगंज सिकंदराराऊ ने आपस में साठगांठ कर बैंक के खातादारों से 16 माह के दौरान रकम ट्रांसफर की। जहारी सिंह सेवानिवृत्त हो चुका है जबकि श्रीनिवास का तबादला हो चुका है। रकम को ट्रांसफर करने के बाद कई खातों को डेबिट कर रकम उड़ाई गई।
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रकम ट्रांसफर करने के पश्चात ये तीनों खुद मिल कर विड्रॉल वाउचर भरकर पैसा निकालते रहे। कुछ खातेदारों ने जब विड्रॉल और डेबिट एंट्री देखी तो बैंक को बताया। इस पर तमाम खातों की पड़ताल की गई। वाउचर भी चेक किए गए तो पूरा गोलमाल सामने आया। इस गोलमाल में लिप्त दो कर्मी अभी भी बैंक में कार्यरत हैं, जबकि इनमें से जहारी सिंह 31 जुलाई 2017 को रिटायर हो गए। 16 माह में तीनों ने कुल दस लाख बानवे हजार आठ सौ इक्यावन रुपये का घपला किया। बैंक प्रबंधक द्वारा उल्लेख किया गया है कि मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने को 11 माह पूर्व 11 मई 2017 को तहरीर दी गई थी, लेकिन कोतवाली पुलिस यह कह कर मामला टालती रही कि जांच चल रही है। जांच के बाद रिपोर्ट होगी। रिपोर्ट भी एसपी हाथरस के 10 मई को तहरीर पर आदेश के पश्चात की गई है।
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