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बायोडाटा लेकर लखनऊ, आगरा की चक्कर लगा रहे दावेदार
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संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। अध्यक्ष पद के लिए सभी जातियों के संभावित प्रत्याशी जुगाड़ लगाने में जुट गए हैं। सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा के खेमे में हैं। 12 से ज्यादा संभावित अपना अपना बायोडाटा लेकर लखनऊ, आगरा कासंगज हाथरस के चक्कर लगा चुके हैं। हालांकि, आरक्षण की घोषणा नहीं होने की वजह से अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं हो सका है।
बता दें कि पालिका चेयरमैन का पद हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। नगर पालिका के लिए लगभग 38 हजार लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आरक्षण को लेकर अभी से ही अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। गत चुनाव एससी पद के लिए था तो सरोज देवी जीती थी। इससे पहले बीसी महिला के रूप में निर्दलीय फानूस इकराम जीती थी। उससे पहले सामान्य महिला सीट से वर्षा वार्ष्णेय भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीती थी।
इस बार आकलन किया जा रहा है कि सीट अनारक्षित रह सकती है। हालांकि, कुछ जानकारों का कहना है कि बीसी महिला सीट हो चुकी हे इस लिए बीसी पुरुष हो सकती है। अगर सीट अनारक्षित रहती है तो बड़े-बड़े सूरमा विभिन्न दलों से मैदान में ताल ठोंकेंगे।
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दावेदार अभी से ही गोटी फिट करने में लगे हुए हैं। भाजपा भी ऐसे प्रत्याशी का चयन करना चाहेगी जो कि हर हाल में जीत हासिल करे। इसके पीछे 2024 का लोकसभा चुनाव है जिसको लेकर भाजपा हर जगह चाक चौबंद होना चाहती है। इस चुनाव में संबंधित विधायक व सांसद की प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी।
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निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। अध्यक्ष पद के लिए सभी जातियों के संभावित प्रत्याशी जुगाड़ लगाने में जुट गए हैं। सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा के खेमे में हैं। 12 से ज्यादा संभावित अपना अपना बायोडाटा लेकर लखनऊ, आगरा कासंगज हाथरस के चक्कर लगा चुके हैं। हालांकि, आरक्षण की घोषणा नहीं होने की वजह से अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं हो सका है।
बता दें कि पालिका चेयरमैन का पद हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। नगर पालिका के लिए लगभग 38 हजार लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आरक्षण को लेकर अभी से ही अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। गत चुनाव एससी पद के लिए था तो सरोज देवी जीती थी। इससे पहले बीसी महिला के रूप में निर्दलीय फानूस इकराम जीती थी। उससे पहले सामान्य महिला सीट से वर्षा वार्ष्णेय भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीती थी।
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इस बार आकलन किया जा रहा है कि सीट अनारक्षित रह सकती है। हालांकि, कुछ जानकारों का कहना है कि बीसी महिला सीट हो चुकी हे इस लिए बीसी पुरुष हो सकती है। अगर सीट अनारक्षित रहती है तो बड़े-बड़े सूरमा विभिन्न दलों से मैदान में ताल ठोंकेंगे।
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दावेदार अभी से ही गोटी फिट करने में लगे हुए हैं। भाजपा भी ऐसे प्रत्याशी का चयन करना चाहेगी जो कि हर हाल में जीत हासिल करे। इसके पीछे 2024 का लोकसभा चुनाव है जिसको लेकर भाजपा हर जगह चाक चौबंद होना चाहती है। इस चुनाव में संबंधित विधायक व सांसद की प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी।