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किसानों को ब्याजमुक्त कर्ज देने पर विचार : बालियान
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Tue, 29 Aug 2017 11:47 PM IST
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बालियान
- फोटो : Amar Ujala
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केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान का कहना है कि कर्जमाफी किसानों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। किसानों की आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार कृषि नीति तैयार कर रही है। भविष्य में किसानों को बिना ब्याज का फसली ऋण मुहैया कराया जाएगा।
आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने पर विचार चल रहा है। बालियान सोमवार रात को मेला श्रीदाऊजी महाराज के पंडाल में आयोजित देवी जागरण में बतौर मुख्य अतिथि आए थे और पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
बालियान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। इस गंभीरता का ही प्रतिफल है कि किसानों को देश भर की कृषि मंडियों में अपने उत्पाद बेचने के लिए ई-ऑक्शन प्रक्रिया शुरू की है, जिससे देश भर में किसान उत्पादों को ऑन लाइन बिक्री की जा सके। इस प्रक्रिया के माध्यम से कृषि उत्पादों की बिक्री एवं खरीद की प्रक्रिया को बिचौलियों से भी मुक्ति मिल सकेगी।
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उन्होंने कहा कि आलू किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने आलू का जो दाम तय किया था, वह काफी नहीं था। इस बार भारत सरकार आलू किसान को ऐसी स्थिति से बचाने के लिए आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने पर विचार कर रही है। आलू निर्यात को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि किसान को आलू का वाजिब मूल्य नहीं मिलने की एक वजह आवश्यकता से अधिक आलू की पैदावार होना भी है। कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए शीतगृहों पर अनुदान बढ़ाया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक भंडारण कर किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य प्रदान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास से दालों की कीमतों में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ है। अब दालों पर पहले जैसी महंगाई नहीं रही। आने वाले दिनों में इसका और असर देखने को मिलेगा। वार्ता के दौरान सांसद राजेश दिवाकर, सांसद प्रतिनिधि मुकेश पौरुष, एफसीआई के सदस्य डॉ.अविन शर्मा आदि थे।
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आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने पर विचार चल रहा है। बालियान सोमवार रात को मेला श्रीदाऊजी महाराज के पंडाल में आयोजित देवी जागरण में बतौर मुख्य अतिथि आए थे और पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
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बालियान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। इस गंभीरता का ही प्रतिफल है कि किसानों को देश भर की कृषि मंडियों में अपने उत्पाद बेचने के लिए ई-ऑक्शन प्रक्रिया शुरू की है, जिससे देश भर में किसान उत्पादों को ऑन लाइन बिक्री की जा सके। इस प्रक्रिया के माध्यम से कृषि उत्पादों की बिक्री एवं खरीद की प्रक्रिया को बिचौलियों से भी मुक्ति मिल सकेगी।
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उन्होंने कहा कि आलू किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने आलू का जो दाम तय किया था, वह काफी नहीं था। इस बार भारत सरकार आलू किसान को ऐसी स्थिति से बचाने के लिए आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने पर विचार कर रही है। आलू निर्यात को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि किसान को आलू का वाजिब मूल्य नहीं मिलने की एक वजह आवश्यकता से अधिक आलू की पैदावार होना भी है। कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए शीतगृहों पर अनुदान बढ़ाया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक भंडारण कर किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य प्रदान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास से दालों की कीमतों में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ है। अब दालों पर पहले जैसी महंगाई नहीं रही। आने वाले दिनों में इसका और असर देखने को मिलेगा। वार्ता के दौरान सांसद राजेश दिवाकर, सांसद प्रतिनिधि मुकेश पौरुष, एफसीआई के सदस्य डॉ.अविन शर्मा आदि थे।