अव्यवस्थाएं रहीं हावी, अफसरों ने भी खाए धक्के
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डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आगमन पर प्रशासनिक अधिकारियों के इंतजाम नाकाफी दिखाई दिए। बड़ी संख्या में भाजपाई पुलिस लाइन के मीटिंग हॉल के बाहर जमा हो गए। छोटे मीटिंग हॉल में घुसने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। भाजपाइयों को रोकने में डीएम-एसपी के पसीने छूट गए। यही नहीं मेले के उद्घाटन, पूजन और दंगल के शुभारंभ अवसर पर भी जबर्दस्त धक्का-मुक्की देखी गई। धक्का-मुक्की में कई लोगों के तो कपड़े तक फट गए तो कुछ अखाड़े से नीचे आ गिरे। भाजपा नेता तो दूर, डीएम, एसपी, एएसपी और सीओ जैसे अधिकारी भी धक्का-मुक्की का शिकार होते नजर आए। दंगल पंडाल में तो हालात इतने बिगड़े कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षा घेरा बनाकर डिप्टी सीएम और प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी को उनकी गाड़ियों तक ले जाना पड़ा।
बदइंतजामी और अव्यवस्थाओं के कारण भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताआें को परेशानी झेलनी पड़ी। डिप्टी सीएम रविवार को मेला श्री दाऊजी महाराज का शुभारंभ करने यहां आए थे। उनके आगमन को लेकर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी कई दिनों से तैयारियों में जुटे थे। रविवार को मेले के शुभारंभ से पहले मौर्य को पुलिस लाइन में भाजपा सांसद, विधायक के अलावा पार्टी के नेता और कार्यकर्ताआें के साथ बैठक करनी थी। प्रशासनिक अधिकारियों की चूक यह रही कि उन्होंने भाजपा नेताओं की बड़ी संख्या को नजरअंदाज कर दिया। कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के लिए एसपी कार्यालय का मीटिंग हॉल उपलब्ध कराया गया जबकि इस हॉल की क्षमता महज 60 लोगों के बैठने की है।
केशव प्रसाद मौर्य के आने से पहले ही तमाम भाजपाई पुलिस लाइन पहुंच चुके थे। ऐसा कोई सक्रिय भाजपा नेता और कार्यकर्ता नहीं बचा जो प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की बैठक में शामिल होने पुलिस लाइन नहीं पहुंचा। मौर्य तय कार्यक्रम से एक घंटा देरी से पुलिस लाइन पहुंचे। तब तक सैकड़ाें भाजपा कार्यकर्ता पुलिस लाइन पहुंच चुके थे। सभी की कोशिश मीटिंग हॉल तक पहुंचने की थी। मीटिंग हॉल का हाल यह था कि वहां सांसद और विधायकों के बैठने की जगह भी नहीं बची थी। डीएम अमित कुमार सिंह और एसपी घुले सुशील को डिप्टी सीएम को मीटिंग हॉल तक ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। काफी नेता और कार्यकर्ता मीटिंग हॉल के बाहर जमा थे और अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे। डीएम ने मीटिंग हॉल के दरवाजों के बाहर पुलिस लगा दी।
मीटिंग हॉल में सांसद, विधायक और जिलाध्यक्ष को बमुश्किल जगह दिलाई गई। कार्यकर्ता मीटिंग हॉल में घुसने को पुलिस अधिकारियों से जोर-जबरदस्ती करने लगे। खुद डीएम और एसपी को मीटिंग हॉल के गेट के बाहर तैनात होना पड़ा। कार्यकर्ताओं की संख्या देख दोनों अधिकारियों के पसीने छूट गए। कार्यकर्ताओं को हटाने के लिए अधिकारियों को धक्का-मुक्की भी करनी पड़ी। पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं की संख्या को देखने के बाद उनके लिए मंगाए गए लंच पैकेट बांटे नहीं गए और उन्हें रखवा दिया गया। गर्मी ज्यादा होने के कारण मीटिंग हॉल के बाहर खड़े कार्यकर्ता बार-बार प्रशासन के इंतजामों को कोसते नजर आए। सभी ने यही कहा कि अगर मीटिंग के लिए किसी बड़ी जगह का इंतजाम किया जाता तो ज्यादा बेहतर रहता।
मीटिंग हॉल में ज्यादा भीड़ होने के कारण पार्टी पदाधिकारियों के साथ डिप्टी सीएम की बैठक ज्यादा देर नहीं चल सकी। बदइंतजामी से परेशान डिप्टी सीएम ने अधिकारियाें के साथ होने वाली समीक्षा बैठक में भी ज्यादा समय नहीं लगाया। ऐसा नहीं कि केवल पुलिस लाइन में अव्यवस्थाएं हावी रहीं बल्कि मेले के उद्घाटन, मंदिर में पूजन के दौरान भी डिप्टी सीएम से कार्यकर्ताओं को दूर रखने में अधिकारियों को धक्का-मुक्की करनी पड़ी। रिसीवर कैंप के उद्घाटन समारोह और दंगल के उद्घाटन के दौरान भी यही हाल देखने को मिला। बदइंतजामों के कारण व्यवस्था बनाने में जुटे अधिकारियों को भी इस दौरान धक्के खाने पड़े और परेशानी का सामना करना पड़ा।