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Hathras News: दावों में खाद भरपूर, फिर भी एक-एक बोरी के लिए भटक रहे किसान

Tue, 19 May 2026 02:33 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2026 02:33 AM IST
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Claims abound regarding fertilizer availability, yet farmers are still wandering from pillar to post for a single bag.
सादाबाद की सहकारी समिति मीरपुर पर लगा ताला। संवाद - फोटो : Samvad
एक तरफ कृषि विभाग का दावा है कि जिले में पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है, लेकिन किसान एक-एक बोरी खाद के लिए भटक रहे हैं। सोमवार को कुछ सहकारी समितियों पर ताले लगे थे तो किसी पर खाद नहीं थी। इस समय मक्का मक्का, बाजरा और ज्वार की फसल के लिए किसानों को यूरिया की जरूरत है,लेकिन उन्हें समितियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। दुकानदार खाद के साथ दूसरे उत्पाद भी बेच रहे हैं,जिससे उन्हें खाद महंगा पड़ रहा है।
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बिसावर क्षेत्र की प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति मीरपुर पर सोमवार को ताला लटका हुआ मिला। ग्रामीणों का कहना है कि यहां ताला ही लगा रहता है। खरीफ की फसलों को खाद की जरूरत है, लेकिन समिति बंद पड़ी है। नाई का नगला में रोडवेज बस स्टैंड के पास स्थित समिति पर भी सोमवार को दोपहर एक बजे ताला लगा था।
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गांव कैमार, गंगचौली, गढ़ी जैनी, नयाबांस, तरफरा, गिजरौली, किलवारी, शहजादपुर, हतीसा और कूंवरपुर आदि गांवों के किसान यहां यूरिया के लिए भटकते नजर आए। यही हाल लहरा सहकारी समिति का भी था। यहां सचिव भी इसी गांव का रहने वाला है। लोगों ने बताया कि यहां अक्सर यही स्थिति रहती है।
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रुहेरी समिति पर खाद नहीं, गेहूं से भरा गोदाम

अलीगढ़ रोड पर स्थित रुहेरी सहकारी समिति सोमवार को खुली थी, लेकिन यहां खाद नहीं था।

समिति पर मौजूद लेखाकार आर्यन ने बताया कि यूरिया नहीं है, केवल गेहूं क्रय केंद्र चालू है। गेहूं के अलावा कुछ और रखने की जगह भी नहीं है। यूरिया न होने से रुहेरी, रघनिया, किंदोली, अमरपुर घना, शाहपुर खुर्द, जगीपुर, वीर नगर और नगला गलिया के किसान निराश लौट रहे हैं।

हसायन में ई-पॉस मशीन नहीं कर रही काम

हसायन सहकारी समिति पर यूरिया तो उपलब्ध है, लेकिन ई-पॉस (इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल) मशीन अपडेट न होने से वितरण ठप है। कर्मचारियों का कहना है कि मशीन अपडेट होने के बाद ही किसान किसान आईडी और आधार की कॉपी देकर, अंगूठा लगाकर खाद ले सकेंगे।



वर्जन

सभी समितियों पर यूरिया की उपलब्ध करा दी गई है। किसानों के डाटा को भी मैप कर लिया गया है। प्रति हेक्टेयर सात बोरे की उपलब्धता के हिसाब से जिले में यूरिया उपलब्ध है। सिंगल स्टाफ है, वसूली पर स्टाफ चल रहा है, इस कारण समिति बंद हो सकती है। आरएस श्रीवास्तव, एआर कॉपरेटिव




- 12 बीघा में बाजरा की फसल बोई है। इन दिनों यूरिया खाद की विशेष आवश्यकता है। सरकारी समितियों पर खाद नहीं मिल रहा है।

मनोज कुमार,निवासी पल्हावत।



-16 बीघा जमीन में खरीफ की फसल है। बाजार से मजबूरन यूरिया खाद खरीदना पड़ रहा है, जिसके साथ दुकानदार जबरन अन्य सामान दे रहे हैं। इससे खर्च बढ़ रहा है।

बिजेंद्र सिंह, निवासी पल्हावत।

फोटो-

सहकारी समिति हसायन पर फार्मर रजिस्ट्री मांगी जा रही है। क्षेत्र में चकबंदी चलने के कारण फार्मर रजिस्ट्री नही बन पा रही है। इसी कारण यूरिया भी नहीं मिल पा रहा है। मक्का ,बाजरा, ज्वार व अन्य फसलों में यूरिया की बहुत जरूरत है।

तेज सिंह ,किसान निवासी नगला आम हसायन
विभाग का दावा



3860 मीट्रिक टन यानी 85769 बोरी खाद जिले में उपलब्ध है।
1303 मीट्रिक टन यानी 26060 बोरा फास्फेटिक खाद भी उपलब्ध।
2,52,874 किसान सहकारी समितियों के सदस्य हैं जिले में

खरीफ का क्षेत्रफल
बाजरा: 55,124 हेक्टेयर
मक्का: 17,105 हेक्टेयर
ज्वार: 6.2 हेक्टेयर
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