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क्रिसमस के जश्न के लिए सज गए चर्च
hathras
Updated Wed, 23 Dec 2015 11:51 PM IST
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हाथरस। क्रिसमस-डे का पर्व शुक्रवार को हार्षोल्लास से मनाया जाएगा। पर्व के सेलीब्रेसन से पहले बुधवार को चर्चों में साफ सफाई की गई। रंगाई पुताई कर सजावट करने का दौर भी चलता रहा। उन्हें इलेक्ट्रॉनिक झालरों से आकर्षक रूप दिया गया।
क्रिसमस डे को लेकर बड़े बुजुर्ग से लेकर बच्चों, महिलाओं में विशेष उत्साह रहा। क्रिसमस के लिए चर्चों को विशेष तौर से सजाया गया। विद्युत झालरों से चर्चों को सजाए जाने की तैयारी बुधवार को पूरे दिन चलती रहीं। इलेक्ट्रॉनिक झालरें भी लगाई गईं। शाम तक चर्च सज-धज कर तैयार हो गए।
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार क्रिसमस प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन को बड़ा दिन भी कहते हैं। हिंदू धर्म में जो स्थान दिवाली और दशहरा जैसे त्योहारों का है, वही स्थान ईसाई धर्म में क्रिसमस का है।
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आठवीं शताब्दी में बोनिफेस नामक एक अंगरेज धर्म प्रचारक ने इसे प्रचलित किया था। सदाबहार फर को क्रिसमस वृक्ष के रुप में सजाया जाता है।
बताया जाता है कि जब ईसा का जन्म हुआ था तो देवता उनके माता पिता को बधाई देने पहुंचे। इन देवताओं ने एक सदाबहार वृक्ष को सजाकर प्रसन्नता व्यक्त की। इसके बाद यह वृक्ष क्रिसमस का प्रतीक बन गया।
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क्रिसमस डे को लेकर बड़े बुजुर्ग से लेकर बच्चों, महिलाओं में विशेष उत्साह रहा। क्रिसमस के लिए चर्चों को विशेष तौर से सजाया गया। विद्युत झालरों से चर्चों को सजाए जाने की तैयारी बुधवार को पूरे दिन चलती रहीं। इलेक्ट्रॉनिक झालरें भी लगाई गईं। शाम तक चर्च सज-धज कर तैयार हो गए।
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प्राचीन मान्यताओं के अनुसार क्रिसमस प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन को बड़ा दिन भी कहते हैं। हिंदू धर्म में जो स्थान दिवाली और दशहरा जैसे त्योहारों का है, वही स्थान ईसाई धर्म में क्रिसमस का है।
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आठवीं शताब्दी में बोनिफेस नामक एक अंगरेज धर्म प्रचारक ने इसे प्रचलित किया था। सदाबहार फर को क्रिसमस वृक्ष के रुप में सजाया जाता है।
बताया जाता है कि जब ईसा का जन्म हुआ था तो देवता उनके माता पिता को बधाई देने पहुंचे। इन देवताओं ने एक सदाबहार वृक्ष को सजाकर प्रसन्नता व्यक्त की। इसके बाद यह वृक्ष क्रिसमस का प्रतीक बन गया।