मौसम का बदला मिजाज: बारिश से गिरा तापमान, सर्दी-जुकाम की चपेट में आ रहे बच्चे, बरतें ये सावधानियां
बच्चों में इम्युनिटी कमजोर होने से सबसे ज्यादा असर है। सर्द गर्म के प्रभाव से प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। डॉक्टरों की सलाह है कि सुबह शाम बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं। ठंडा पानी व बासी खाने से परहेज करें। गुनगुना पानी दें। खुद से एंटीबायोटिक या कोई दवा न लें, केवल डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं लें।
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मौसम के बदले मिजाज और तापमान में आई अचानक गिरावट से हवा में ठंडक घुल गई है। इस बदलाव के बीच सर्दी, जुकाम और खांसी के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण वे सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आ रहे हैं।
हालात यह हैं कि हाथरस जिला अस्पताल में पहले से ही वायरल के मरीजों की भरमार बनी हुई है। शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में रिकॉर्ड 1895 मरीज इलाज कराने पहुंचे, जिनमें से 600 से अधिक मरीज सिर्फ वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और खांसी से पीड़ित दर्ज किए गए।
मरीजों की भीड़ के चलते पर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कक्ष और दवा वितरण केंद्र तक लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। फिजिशियन व बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष पर मरीज व तीमारदारों की लाइन लगी रही। बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रमोद कुमार ने बताया कि अचानक मौसम बदलने और बारिश के बाद तापमान गिरने से हवा में नमी बढ़ी है। दिन में हल्की गर्माहट और सुबह-शाम ठंडक के कारण शरीर का तापमान संतुलित नहीं रह पाता।
ये हैं कारण
- कमजोर इम्युनिटी : वयस्कों की तुलना में बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस आसानी से हमला कर देते हैं।
- सर्द-गर्म का प्रभाव : अचानक ठंडे से गर्म या गर्म से ठंडे माहौल में जाने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है।
चिकित्सकों की सलाह : बरतें ये सावधानियां
- सुबह-शाम ढंके शरीर : बच्चों को सुबह और देर शाम पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं, ताकि अचानक ठंड न लगे।
- खान-पान पर ध्यान : ठंडा पानी, फ्रीज की रखी चीजें और बासी खाने से परहेज करें। बच्चों को गुनगुना पानी दें।
- खुद से दवा न लें : केवल डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं लें। खुद से एंटीबायोटिक या कोई भी दवा देना नुकसानदेह हो सकता है।