Kids Wear: दिल्ली के बाजार में है हाथरस का जलवा, बच्चों के कपड़ों की है अलग पहचान
वैसे तो हाथरस में कोट पेंट, शर्ट, नाइटी के साथ कुछ एक अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं, लेकिन विशेष पहचान बच्चों के कपड़ों को लेकर है। लड़कों के बाबा सूट, लड़कियों की फ्राक की अलग पहचान हैं। गांधीनगर से पूरे देश में यहां के वस्त्र पहुंच रहे हैं।
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दिल्ली की थोक कपड़ा बाजार गांधीनगर में लुधियाना, अहमदाबाद और सूरत के बाद हाथरस में निर्मित रेडीमेड कपड़े भी जगह बना रहे हैं। बच्चों के कपड़ों की इस बाजार में हाथरस आपूर्ति की जा रही है।
हींग के बाद रेडीमेड गारमेंट के क्षेत्र में हाथरस ने पिछले 35 सालों में अलग पहचान बनाई है। वैसे तो हाथरस में कोट पेंट, शर्ट, नाइटी के साथ कुछ एक अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं, लेकिन विशेष पहचान बच्चों के कपड़ों को लेकर है। लड़कों के बाबा सूट, लड़कियों की फ्राक की अलग पहचान हैं। गांधीनगर से पूरे देश में यहां के वस्त्र पहुंच रहे हैं। शहर के चक्की बाजार में कारोबारियों के यहां त्योहारी सीजन को लेकर दिन रात काम हो रहा है। दिल्ली के गांधी नगर के साथ ही अन्य प्रदेश से भी आर्डर मिल रहे हैं।
शहर में हैं 250 से अधिक इकाई, पांच हजार को मिला रोजगार
हाथरस में लगभग 250 इकाई कार्यरत हैं। इनमें लगभग 150 पंजीकृत हैं और 100 इकाई मांग पर माल तैयार कर रही है। अब यह कारोबार चक्की बाजार से आगे बढ़ते हुए नयागंज, मस्जिद वाला चौराहा, चामण गेट, बिछुआ गली, हनुमान गली आदि तक पहुंच गया है। यहां अहम है कि इस कारोबार से लगभग पांच हजार परिवारों को रोजगार मिला हुआ है।
ओडीओपी से लगे रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग को पंख
लगभग दो साल पहले एक जनपद एक उत्पाद योजना में हींग के साथ रेडीमेड गारमेंट्स को भी शामिल किया गया था। तब से इस कारोबार को पंख लग रहे हैं। पिछले दो सालों में योजना में 20 इकाई की स्थापना हो चुकी हैं। सरकार ने अनुदान पर ऋण उपलब्ध कराया गया है। तांकि कारोबार देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सके।
हाथरस का रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार ने विशेष कुछ ऑयटम में अपनी पहचान बनाई है। जिस तरह सरकार इस कारोबार को प्रोत्साहन दे रही है। उससे बच्चों के साथ ही कोट पेंट आदि अन्य में भी कारोबार आगे बढ़ रहा है। दिल्ली के बाजार में हाथरस के उत्पादनों की बड़ी मांग है। -रोबिन अग्रवाल, संचालक, एसएस गारमेंट्स।
दिल्ली का थोक कपड़ा बाजार पूरे देश में आपूर्ति देता है। इसमें हाथरस के उत्पादों की अपनी अलग पहचान है। बच्चों की फ्राक सहित तमाम ड्रेस के नए-नए डिजायन हाथरस में बनाए जाते हैं, जो यूनीक होते हैं। जिनकी मांग व आपूर्ति दिल्ली सहित 300 किमी के दायरे में होती है। -ब्रजेश पोद्वार, संचालक, न्यू पोद्वार गारमेंट्स।