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कीट का प्रकोप: आम पकने से पहले रस चूस रहा चेपा, फसल में 50 फीसदी तक नुकसान की आशंका

Sat, 03 May 2025 06:07 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 03 May 2025 06:07 PM IST
सार

समय से ज्यादा गर्मी और बारिश होने से आम में चेपा नामक कीट लग गया है। इस कारण करीब 40 से 50 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। बागवानों कहना है कि फसल पर दो-तीन बार कीटनाशक का छिड़काव होने के बाद भी चेपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। इस कारण उनकी चिंता और बढ़ गई है।

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Chepa is harmful for mango
आम पर चेपा कीट का प्रकोप - फोटो : संवाद

विस्तार

आम का नाम आते ही जुबां पर खट्टा-मीठा स्वाद स्वत: ही घुल जाता है, लेकिन इस बार यह स्वाद महंगा हो सकता है। मौसम में लगातार बदलाव के चलते आम की पैदावार पिछले वर्ष के मुकाबले कमजोर है। साथ ही आम में चेपा नामक कीट का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे आम की फसल में खासा नुकसान हुआ है।

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अलीगढ़ और हाथरस के सिकंदराराऊ क्षेत्र में आम के बाग बड़ी संख्या में हैं। यहां लंगड़ा, दशहरी, चौसा, देसी, मुंबइया और मिट्ठा आदि किस्म के आमों के बाग हैं। बागवानों ने बताया कि इस बार बौर तो अच्छा आया था, लेकिन मौसम में बदलाव के कारण फसल कमजोर हो गई। 
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समय से ज्यादा गर्मी और बारिश होने से आम में चेपा नामक कीट लग गया है। इस कारण करीब 40 से 50 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। बागवानों कहना है कि फसल पर दो-तीन बार कीटनाशक का छिड़काव होने के बाद भी चेपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। इस कारण उनकी चिंता और बढ़ गई है।

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महंगा हो सकता है लोकल आम

बागवानों के मुताबिक 10 जून तक लोकल आम बाजार में आ जाएगा। कम पैदावार के चलते आम के दाम महंगे हो सकते हैं, क्योंकि सस्ते में बेचने पर मुनाफा नहीं मिलेगा।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र भेज जाता है यहां से आम 
हाथरस और अलीगढ़ के बड़े बागवान राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के लिए भी आम भेजते हैं, जहां से उन्हें ज्यादा मुनाफा मिलता है। उनका कहना है कि इस बार फसल में चेपा लगने की वजह से बाहर भेजने के लिए उनके पास ज्यादा आम ही नहीं होगा, क्योंकि बाहर के लिए अच्छी क्वालिटी का आम भेजा जाता है।

आम में कैसे नुकसान पहुंचाता है चेपा 
चेपा कीट पेड़ की पत्ती और फल की डंडी से आम के रस को चूसता है। उसके बाद कच्चा आम पकने से पहले नीचे से काला पड़ जाता है। बाद में वह फटकर पेड़ से नीचे जमीन पर गिर जाता है।

आम के पेड़ों पर बौर देखकर इस बार भरपूर आम होने की उम्मीद थी, लेकिन फंगस रोग लगने से पेड़ों पर आया बौर काला पड़कर झड़ गया। इस कारण अधिकतर पेड़ रोग की चपेट में आ चुके हैं। बढ़ते तापमान के कारण अब चेपा भी लग गया है, जिससे करीब 40 से 50 फीसदी फसल प्रभावित हुई है।- नितिन पुंडीर, बागवान, कपसिया, सिकंदराराऊ
करीब पांच सौ बीघा क्षेत्रफल में आम के बाग हैं। चेपा लग जाने से करीब 40 से 50 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। कीटनाशक का छिड़काव करने पर भी कोई फायदा नहीं मिला। कम पैदावार के चलते इस बार आम के दाम महंगे हो सकते हैं।-इकराम कुरैशी, मटकोटा, सिकंदराराऊ
जिन-जिन क्षेत्रों में आम के बागों में चेपा का प्रकोप है, वहां उद्यान निरीक्षक को भेजकर निरीक्षण कराया जाएगा। चेपा से आम की फसल को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।-अनीता सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, हाथरस


करीब एक हजार एकड़ में हैं आम के बाग
सिकंदराराऊ क्षेत्र में करीब एक हजार एकड़ भूमि में आम के बाग फैले हैं। सिकंदराराऊ से कासगंज, एटा, अलीगढ़ और हाथरस चारों मार्गाें पर आम के बाग हैं।

सासनी में खत्म हो गए आम के बाग
सासनी में एक हजार बीघा में फैले चंपा बाग की अलग ही पहचान थी। खेड़ा फिरोजपुर, रुदायन, धीमरपुरा, लहौर्रा, भोजगढी, तिलौठी, भूतपुरा, नहलोई, अजरोई, विघैपुर सहित कई गांवों में आम के बाग थे। यहां होने वाले चौसा, अल्फासो, लंगड़ा, दशहरी, फजली आदि प्रजाति के आम की मिठास के लोग मुरीद थे। रोग व कीटों के प्रकोप और गिरते भूजल स्तर ने आम के बागों को खत्म कर दिया। आज यहां एक भी बाग नहीं बचा है।

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