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जनगणना : ड्यूटी से पहले ही बीमार हुए शिक्षक, दस्तावेज मांगे तो छूटे पसीने

Wed, 06 May 2026 02:29 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 06 May 2026 02:29 AM IST
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Census: Teacher Falls Ill Even Before Duty; Breaks into a Sweat When Documents Are Requested
कलेक्ट्रेट का गेट। - फोटो : Samvad
एसआईआर की ड्यूटी से मुक्त हुए शिक्षक अब जनगणना से घबरा रहे हैं। भीषण गर्मी में फील्ड वर्क के डर से शिक्षकों ने इससे बचने के लिए बीमारियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
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बड़ी संख्या में शिक्षकों ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए ड्यूटी से नाम कटवाने के लिए आवेदन किए हैं। जब प्रशासन ने बीमारी के दस्तावेज मांगे तो पसीने छूट गए। प्रशासन नरमी बरतने के मूड में नहीं है और सख्त रुख अपनाते हुए सभी से पुख्ता चिकित्सकीय दस्तावेज मांग लिए हैं।
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जनगणना के लिए जनपद में 3,660 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें लगभग 3100 प्रगणक और 560 सुपरवाइजर हैं। चिलचिलाती धूप में घर-घर जाकर ब्योरा एकत्र करना शारीरिक रूप से थकाऊ होगा। ऐसे में खुद को अनफिट बताकर जनगणना से किनारा करने की होड़ मच गई है।
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यह है व्यवस्था

विषम परिस्थिति में प्रशासन ने ड्यूटी काटने की व्यवस्था की है, लेकिन काम से बचने के लिए कुछ लोग ड्यूटी कटवाने की जुगत में लगे हैं। प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित एसडीएम व शहर क्षेत्र में नगर पालिका/पंचायत के ईओ को जिम्मेदारी दी है।





114 शिक्षकों ने दिए आवेदन

ड्यूटी कटवाने के लिए लगातार अधिकारियों के पास आवेदन पहुंच रहे हैं। अब तक 114 आवेदन आ चुके हैं। सासनी में 17 में से छह की ड्यूटी काटी गई है। हाथरस में 22 आवेदन आए हैं, जिनमें से 11 की ड्यूटी काटी गई है। सादाबाद में 55 आवेदन आए थे, इनमें से 35 ड्यूटी काटी गई हैं। सिकंदराराऊ में 20 आवेदन आ चुके हैं, जिनमें से 8 की ड्यूटी काटी गई है।



ड्यूटी कटवाने के तर्क
:




केस-1
पत्नी हृदय रोगी हैं साहब
शहर के एक शिक्षक ने एसडीएम को प्रार्थना पत्र दिया कि उनकी पत्नी दिल की मरीज हैं। अकेले छोड़ने पर उन्हें अटैक आ सकता है। जनगणना की भागदौड़ में वे अपनी पत्नी को समय नहीं दे पाएंगे, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। प्रशासन ने शिक्षक से तीन साल के ईसीजी और मेडिकल हिस्ट्री मांग ली। साथ ही यह भी पूछ लिया कि जब आप स्कूल जाते हैं, तब पत्नी को कौन संभालता है ? शिक्षक के पास इसका कोई जवाब नहीं था।

-केस 2



अचानक उभरी माइग्रेन की बीमारी

सादाबाद क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका ने प्रार्थना पत्र में कहा कि उन्हें फोटोफोबिया यानी धूप से डर और क्रोनिक माइग्रेन है। प्रशासन ने फाइल चेक की, साथ ही छानबीन भी कराई। पता चला कि शिक्षिका कुछ दिन पहले ही अपने परिवार के साथ छुट्टियों से लौटी हैं। प्रशासन ने उनसे पिछले दो साल के इलाज का रिकॉर्ड मांग लिया। वे कोई जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकीं, जिससे बीमारी की पुष्टि हो। बाद में बच्चों की देखभाल का भी हवाला दिया, लेकिन अब दबी जुबान में निकट का वार्ड मांग रहीं हैं।



केस-तीन
स्लिप डिस्क से चल नहीं पा रहा हूं
सासनी में एक शिक्षक ने आवेदन दिया कि उन्हें गंभीर स्लिप डिस्क है और चिकित्सकों ने बेड रेस्ट की सलाह दी है। वो धूप में पैदल नहीं चल सकते। एसडीएम ने एक्स-रे और एमआरआई रिपोर्ट के साथ पेश होने को कहा, तो अगले ही दिन शिक्षक ने आवेदन वापस ले लिया। उन्होंने लिखित में जवाब दिया कि दवा खाने के बाद अब वे ठीक हैं।





विषम परिस्थितियों में ही ड्यूटी काटने के निर्देश हैं। यदि इस तरह के आवेदनों की संख्या बढ़ती है तो मेडिकल बोर्ड स्थापित किया जाएगा। अकारण ड्यूटी से बचने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।

अतुल वत्स, डीएम।
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