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Hathras News: सेवाओं से बनाई पहचान, इंस्टा-स्नैपचैट के दौर में भी डाकघर का जलवा बरकरार
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मुख्य डाकघर हाथरस। संवाद
- फोटो : Samvad
इंस्टाग्राम और स्नैपचैट के दौर में भले ही चिट्ठियों का चलन कम हो गया हो, लेकिन डाकघर ने समय के साथ खुद को बदलकर अपना महत्व बरकरार रखा है। अब यह सिर्फ चिट्ठियां और पार्सल पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि बैंकिंग, बीमा, आधार कार्ड, बचत योजनाओं और पासपोर्ट संबंधी सेवाओं का भी अहम केंद्र बन गया है।
एक समय था, जब लोग अपनी खुशियां, भावनाएं और संदेश चिट्ठियों के जरिये अपनों तक पहुंचाते थे। अब मोबाइल फोन, वीडियो कॉल और इंटरनेट ने संवाद का तरीका बदल दिया है। इसके बावजूद डाक विभाग लोगों तक जरूरी दस्तावेज और पार्सल पहुंचाने के साथ वित्तीय एवं अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रहा है।
बैंकिंग से आधार तक मिल रहीं सुविधाएं
हाथरस मुख्य डाकघर के माध्यम से डाक सेवाओं के साथ बचत योजनाओं, बैंकिंग, बीमा, आधार संबंधी सुविधाओं, पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं और अन्य कार्यों में लोगों को मदद मिल रही है। ऑनलाइन खरीदारी और ई-कॉमर्स के बढ़ते चलन से पार्सल बुकिंग एवं वितरण का महत्व भी बढ़ा है। डाक विभाग डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सरकारी योजनाओं को लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में भी योगदान दे रहा है।
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रोजाना हजारों डाक का वितरण
डाक विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हाथरस जिले में 23 डाकघर संचालित हैं। यहां करीब 25 पोस्टमैन रोजाना डाक और पार्सल का वितरण करते हैं। जिले में प्रतिदिन लगभग 2,500 साधारण डाक और 4,000 पंजीकृत डाक वितरित की जाती हैं। करीब 4,000 पंजीकृत डाक की रोजाना बुकिंग होती है। डाकघरों के माध्यम से प्रतिदिन 100 से अधिक पार्सल बुक किए जाते हैं।
विदेशों तक पहुंच रहे हाथरस के हस्तशिल्प
हाथरस से विदेशों में भी पार्सल भेजे जा रहे हैं। प्रतिदिन करीब पांच पार्सल निर्यात के लिए बुक होते हैं। इनमें हस्तशिल्प से जुड़े उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में भेजा जाता है। इससे डाक विभाग की सेवाएं स्थानीय कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में भी सहायक बन रही हैं।
- हर वर्ष नौ अक्तूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डाक सेवाओं के महत्व और सामाजिक-आर्थिक विकास में उनकी भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। चिट्ठियों की संख्या घटने के बावजूद डाक विभाग ने सेवाओं का दायरा बढ़ाकर बदलते दौर में अपनी उपयोगिता बनाए रखी है। - मनोज कुमार राजपूत, पोस्टमास्टर, मुख्य डाकघर हाथरस
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एक समय था, जब लोग अपनी खुशियां, भावनाएं और संदेश चिट्ठियों के जरिये अपनों तक पहुंचाते थे। अब मोबाइल फोन, वीडियो कॉल और इंटरनेट ने संवाद का तरीका बदल दिया है। इसके बावजूद डाक विभाग लोगों तक जरूरी दस्तावेज और पार्सल पहुंचाने के साथ वित्तीय एवं अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रहा है।
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बैंकिंग से आधार तक मिल रहीं सुविधाएं
हाथरस मुख्य डाकघर के माध्यम से डाक सेवाओं के साथ बचत योजनाओं, बैंकिंग, बीमा, आधार संबंधी सुविधाओं, पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं और अन्य कार्यों में लोगों को मदद मिल रही है। ऑनलाइन खरीदारी और ई-कॉमर्स के बढ़ते चलन से पार्सल बुकिंग एवं वितरण का महत्व भी बढ़ा है। डाक विभाग डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सरकारी योजनाओं को लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में भी योगदान दे रहा है।
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रोजाना हजारों डाक का वितरण
डाक विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हाथरस जिले में 23 डाकघर संचालित हैं। यहां करीब 25 पोस्टमैन रोजाना डाक और पार्सल का वितरण करते हैं। जिले में प्रतिदिन लगभग 2,500 साधारण डाक और 4,000 पंजीकृत डाक वितरित की जाती हैं। करीब 4,000 पंजीकृत डाक की रोजाना बुकिंग होती है। डाकघरों के माध्यम से प्रतिदिन 100 से अधिक पार्सल बुक किए जाते हैं।
विदेशों तक पहुंच रहे हाथरस के हस्तशिल्प
हाथरस से विदेशों में भी पार्सल भेजे जा रहे हैं। प्रतिदिन करीब पांच पार्सल निर्यात के लिए बुक होते हैं। इनमें हस्तशिल्प से जुड़े उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में भेजा जाता है। इससे डाक विभाग की सेवाएं स्थानीय कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में भी सहायक बन रही हैं।
- हर वर्ष नौ अक्तूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डाक सेवाओं के महत्व और सामाजिक-आर्थिक विकास में उनकी भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। चिट्ठियों की संख्या घटने के बावजूद डाक विभाग ने सेवाओं का दायरा बढ़ाकर बदलते दौर में अपनी उपयोगिता बनाए रखी है। - मनोज कुमार राजपूत, पोस्टमास्टर, मुख्य डाकघर हाथरस