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Hathras News: शहद बनाकर जिंदगी में घोली तरक्की की मिठास
Wed, 10 Jun 2026 02:15 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:15 AM IST
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गांव नगला वाद अठवरिया में मधुमक्खी पालन करतीं महिलाएं। स्रोत : स्वयं
- फोटो : Self
गांव नगला वाद अठवरिया की महिलाओं ने मधुमक्खी पालन को रोजगार का माध्यम बनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि महिला सशक्तीकरण की मिसाल भी पेश की है। गांव की प्रेमवती की प्रेरणा से करीब 10 महिलाओं ने मधुमक्खी पालन शुरू किया और आज शहद उत्पादन के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
महिलाओं द्वारा तैयार किया गया शुद्ध शहद स्थानीय बाजार के साथ-साथ अन्य जनपदों में भी भेजा जा रहा है। पैकिंग और विपणन का कार्य भी महिलाएं स्वयं कर रही हैं। इससे उन्हें उत्पादन के साथ-साथ व्यवसाय संचालन का अनुभव भी मिल रहा है। प्रेमवती बताती हैं कि शुरुआत में महिलाओं को इस कार्य के प्रति जागरूक करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन प्रशिक्षण और मेहनत के बल पर धीरे-धीरे समूह तैयार हुआ।
आज सभी महिलाएं मिलकर मधुमक्खी पालन का कार्य कर रही हैं और नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। महिलाओं का कहना है कि मधुमक्खी पालन एक अतिरिक्त आय का अच्छा साधन बन गया है। कम लागत में शुरू होने वाले इस व्यवसाय से उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है।
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साथ ही फसलों में परागण बढ़ने से कृषि उत्पादन को भी लाभ पहुंच रहा है। ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी इनकी सफलता से प्रेरित होकर स्वरोजगार अपनाने के लिए आगे आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह पहल महिला आत्मनिर्भरता और ग्रामीण उद्यमिता का सफल उदाहरण बनती जा रही है। संवाद
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महिलाओं द्वारा तैयार किया गया शुद्ध शहद स्थानीय बाजार के साथ-साथ अन्य जनपदों में भी भेजा जा रहा है। पैकिंग और विपणन का कार्य भी महिलाएं स्वयं कर रही हैं। इससे उन्हें उत्पादन के साथ-साथ व्यवसाय संचालन का अनुभव भी मिल रहा है। प्रेमवती बताती हैं कि शुरुआत में महिलाओं को इस कार्य के प्रति जागरूक करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन प्रशिक्षण और मेहनत के बल पर धीरे-धीरे समूह तैयार हुआ।
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आज सभी महिलाएं मिलकर मधुमक्खी पालन का कार्य कर रही हैं और नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। महिलाओं का कहना है कि मधुमक्खी पालन एक अतिरिक्त आय का अच्छा साधन बन गया है। कम लागत में शुरू होने वाले इस व्यवसाय से उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है।
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साथ ही फसलों में परागण बढ़ने से कृषि उत्पादन को भी लाभ पहुंच रहा है। ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी इनकी सफलता से प्रेरित होकर स्वरोजगार अपनाने के लिए आगे आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह पहल महिला आत्मनिर्भरता और ग्रामीण उद्यमिता का सफल उदाहरण बनती जा रही है। संवाद