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बच्चों का वजन कम मिलने पर बिफरे कमिश्नर
अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
Updated Sat, 29 Jul 2017 12:11 AM IST
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दयानतपुर प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से पढ़ाई के संबंध में जानकारी करते कमिश्नर।
- फोटो : amar ujala
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कमिश्नर सुभाषचंद्र शर्मा शुक्रवार सुबह राज्य कुपोषण मिशन के तहत गोद लिए गांव दयानतपुर पहुंचे। सासनी ब्लॉक के इस गांव में कमिश्नर ने करीब दो घंटे का वक्त बिताया। उन्होंने स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर वहां कुपोषित बच्चों की देखभाल का जायजा।
स्कूल में बच्चों से संवाद कर पढ़ाई-लिखाई का स्तर भी जांचा। कमियां मिलने पर शिक्षकों को डांट पिलाई और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार लाने की नसीहत दी। जब तक कमिश्नर इस गांव में रहे, अफसरों में खलबली मची रही।
कमिश्नर तयशुदा कार्यक्रम के तहत इस गांव में पहुंचे। एसडीएम सासनी अंजुम बी, जिला कार्यक्रम अधिकारी और अन्य अफसर भी उनके साथ थे। कमिश्नर ने इस गांव को राज्य पोषण मिशन के तहत गोद ले रखा है।
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उन्होंने स्कूल पहुंचकर कुपोषण के लिए चिह्नित बच्चों का वजन कराया। कुछ बच्चों का वजन कुपोषण के मानक से कम मिला। इस पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई और साफ कहा कि इन बच्चों की देखभाल सही तरह से नहीं हो रही।
शिक्षकों ने बताया कि इन बच्चों की तबियत खराब होने की वजह से इनके वजन में गिरावट आई है, जबकि इससे पहले इनका वजन सही हो गया था। ग्रामीणों ने कमिश्नर से पंजीरी नहीं आने की शिकायत की तो जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि अभी पूरे प्रदेश में ही पंजीरी की सप्लाई शासन स्तर से नहीं हो पा रही, इसलिए इसका वितरण नहीं हो पा रहा। कमिश्नर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि जैसे ही शासन से सप्लाई मिलेगी, वैसे ही गांव में पंजीरी का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
स्कूलों में बच्चों से पढ़ाई-लिखाई से जुड़े सवाल भी किए। बच्चे कई प्रश्नों का जवाब नहीं दे पाए तो शिक्षकों से कहा कि शिक्षण कार्य की गुणवत्ता सुधारें। शिक्षकों को उनकी भूमिका समझाई और कहा कि अगर वह ईमानदारी से इन बच्चों को शिक्षित करेंगे तो यही बच्चे आगे चलकर उनका नाम रोशन करेंगे, इसलिए वह इसे नियमित ड्यूटी नहीं मानकर पूरी मेहनत और लगन से इन बच्चों को पढ़ाएं। स्कूल चलो अभियान के तहत गांव में हुए नए नामांकन की स्थिति भी जानी। इसमें और सुधार लाने की हिदायत दी।
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स्कूल में बच्चों से संवाद कर पढ़ाई-लिखाई का स्तर भी जांचा। कमियां मिलने पर शिक्षकों को डांट पिलाई और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार लाने की नसीहत दी। जब तक कमिश्नर इस गांव में रहे, अफसरों में खलबली मची रही।
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कमिश्नर तयशुदा कार्यक्रम के तहत इस गांव में पहुंचे। एसडीएम सासनी अंजुम बी, जिला कार्यक्रम अधिकारी और अन्य अफसर भी उनके साथ थे। कमिश्नर ने इस गांव को राज्य पोषण मिशन के तहत गोद ले रखा है।
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उन्होंने स्कूल पहुंचकर कुपोषण के लिए चिह्नित बच्चों का वजन कराया। कुछ बच्चों का वजन कुपोषण के मानक से कम मिला। इस पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई और साफ कहा कि इन बच्चों की देखभाल सही तरह से नहीं हो रही।
शिक्षकों ने बताया कि इन बच्चों की तबियत खराब होने की वजह से इनके वजन में गिरावट आई है, जबकि इससे पहले इनका वजन सही हो गया था। ग्रामीणों ने कमिश्नर से पंजीरी नहीं आने की शिकायत की तो जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि अभी पूरे प्रदेश में ही पंजीरी की सप्लाई शासन स्तर से नहीं हो पा रही, इसलिए इसका वितरण नहीं हो पा रहा। कमिश्नर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि जैसे ही शासन से सप्लाई मिलेगी, वैसे ही गांव में पंजीरी का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
स्कूलों में बच्चों से पढ़ाई-लिखाई से जुड़े सवाल भी किए। बच्चे कई प्रश्नों का जवाब नहीं दे पाए तो शिक्षकों से कहा कि शिक्षण कार्य की गुणवत्ता सुधारें। शिक्षकों को उनकी भूमिका समझाई और कहा कि अगर वह ईमानदारी से इन बच्चों को शिक्षित करेंगे तो यही बच्चे आगे चलकर उनका नाम रोशन करेंगे, इसलिए वह इसे नियमित ड्यूटी नहीं मानकर पूरी मेहनत और लगन से इन बच्चों को पढ़ाएं। स्कूल चलो अभियान के तहत गांव में हुए नए नामांकन की स्थिति भी जानी। इसमें और सुधार लाने की हिदायत दी।