{"_id":"58c445754f1c1be618dc4b0e","slug":"bjp-s-gale-left-elephant","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाजपा की आंधी, बचा एक हाथी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाजपा की आंधी, बचा एक हाथी
ब्यूूराे अमर उजाला/ हाथरस।
Updated Sun, 12 Mar 2017 12:21 AM IST
विज्ञापन
प्रदेश में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने पर हाथरस में जश्न मनाते भाजपाई।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश में चली भाजपा की आंधी से हाथरस भी अछूता नहीं रहा। तीन में से दो (हाथरस शहर, सिकंदराराऊ) सीटों पर कब्जा कर भाजपा ने अपना डेढ़ दशक पुराना बनवास खत्म कर लिया। सूबे में प्रचंड बहुमत से भाजपा नेताओं और समर्थकों में जश्न का माहौल है। मोदी लहर के बावजूद बसपा के पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय अपनी प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने सादाबाद सीट पर जीत दर्ज की।
वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में पूर्व विधायक राजवीर पहलवान हारे थे। इनके बाद वर्ष 2002 में रालोद-भाजपा गठबंधन प्रत्याशी देवस्वरूप शर्मा भी हार गए। वर्ष 2007 में भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह भैया जी भी हारे और इनके बाद वर्ष 2012 भाजपा प्रत्याशी राजेश दिवाकर भी हाथरस विधानसभा क्षेत्र से हार गए। लंबे समय से भाजपा की जीत न होने से कार्यकर्ता भी मायूस थे। इस बार के चुनाव में सभी कार्यकर्ताओं ने जोश के साथ काम किया और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्व विधायक हरीशंकर माहौर ने ऐतिहासिक जीत दिलाकर भाजपा का वनवास खत्म कर दिया।
विज्ञापन
वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में पूर्व विधायक राजवीर पहलवान हारे थे। इनके बाद वर्ष 2002 में रालोद-भाजपा गठबंधन प्रत्याशी देवस्वरूप शर्मा भी हार गए। वर्ष 2007 में भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह भैया जी भी हारे और इनके बाद वर्ष 2012 भाजपा प्रत्याशी राजेश दिवाकर भी हाथरस विधानसभा क्षेत्र से हार गए। लंबे समय से भाजपा की जीत न होने से कार्यकर्ता भी मायूस थे। इस बार के चुनाव में सभी कार्यकर्ताओं ने जोश के साथ काम किया और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्व विधायक हरीशंकर माहौर ने ऐतिहासिक जीत दिलाकर भाजपा का वनवास खत्म कर दिया।
विज्ञापन