महाभारत और रामायण काल की ऐतिहासिक नदियों को किया जा रहा जीवित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस। Updated Fri, 28 Sep 2018 12:13 AM IST
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प्रेसवार्ता करते सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह।
प्रेसवार्ता करते सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह। - फोटो : Amar Ujala

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 सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री धर्मपाल सिंह का कहना है कि महाभारत व रामायण काल की 6 ऐतिहासिक नदियों को जीवित करने का काम किया जा रहा है। इसके लिए नदी संरक्षण एवं पुनर्जीविकरण सेल का गठन किया गया है। हमारा विभाग अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम चल रहा है। 22 फीसदी पानी अब बुंदेलखंड को मिलेगा। वह यहां पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।  
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उन्होंने कहा कि अब टेल तक नहीं किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाएगा। अगर इस दौरान कोई भी किसान नदी काटेगा तो जेई को निलंबित किया जाएगा और किसान के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। सिंचाई विभाग की जमीन पर कब्जा करने वालों को नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।  
उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि चाइना के पास जो तकनीक है, उसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल करते हुए महोबा में अगले वर्ष जरूरत पड़ने पर कृत्रिम बारिश कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने अपनी स्वदेशी तकनीक तैयार की और जो कृत्रिम वर्षा चाइना साढ़े दस करोड़ रुपये में करा रहा था, उसे हमारे वैज्ञानिक साढ़े पांच करोड़ रुपये में एक बरसात होगी। सरकार ने इसका प्रेजेंटेशन देख लिया है। अब जरूरत पड़ने पर कृत्रिम वर्षा कराई जाएगी। जिस क्षेत्र में यह बरसात कराई जाएगी उस क्षेत्र में रासायनिक पदार्थ पहले लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इजरायल की पानी पद्धति को यहां इस्तेमाल किया जा रहा है।  
 उन्होंने बताया कि 75 जिलों में नदियों को जीवित करने का काम किया जा रहा है। 25 साल से लंबित चार राष्ट्रीय परियोजनाओं को पूरा किया जा रहा है। 2019 तक सभी परियोजनाओं को पूरा कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पानी के उचित प्रबंध के लिए रजवाह, कुलावा, अलपिका समितियां बनाई जा रही है। मतदान के जरिए इनका चुनाव कराया जाएगा।

एक सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि एससी-एसटी मामले पुलिस एफआईआर दर्ज करेगी और पुलिस जांच करेगी। इसके बाद अगर दोषी है तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि हाथरस में जितनी भी नहरें पुरानी है, सभी नहरों में पानी भिजवाने का प्रबंध करेंगे। अटल जी की अस्थियों को विलुप्त हो गई नदियों में बहा देने के सवाल पर उन्होंने बताया कि उन नदियों को उनकी अस्थियों के विसर्जन से पहले चिह्नित कर लिया गया था। उन नदियों में विसर्जन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि 2020 में दिल्ली, बंगलौर, महोबा (उत्तरप्रदेश) में ग्राउंड वाटर    समाप्त हो जाएगा। इस मौके पर विधायक सदर हरीशंकर माहौर, सिकंदराराऊ विधायक वीरेंद्र सिंह राणा, गौरव आर्य, अजय रावत, आदि मौजूद थे।
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