Hathras News: बच्चा तस्करी मामले में बांके बिहारी हॉस्पिटल सील, पुलिस हिरासत में हैं आठ आरोपी
24 अगस्त 2022 को मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से सात माह का एक बच्चा प्लेटफार्म नंबर आठ से उस समय चोरी कर लिया गया था। उस समय उस बच्चे की मां सो रही थी। जीआरपी मथुरा ने बच्चे को रविवार की रात को फिरोजाबाद से सकुशल बरामद कर लिया।
विस्तार
मथुरा में पकड़ा गया बच्चा चोर गैंग का सरगना हाथरस के स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक फार्मासिस्ट निकला। मथुरा जीआरपी द्वारा उस सहित आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद यहां का प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय हो गया। स्वास्थ्य विभाग ने नवल नगर स्थित उसके अस्पताल को सील कर दिया। यह अस्पताल वह और उसकी पत्नी संचालित करते थे। देर रात तक अधिकारी अन्य ठिकानों पर छापेमारी कर रहे थे। पुलिस व प्रशासन इस गैंग से जुड़े कई अन्य लोगों की तलाश में लगा थी।
24 अगस्त 2022 को मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से सात माह का एक बच्चा प्लेटफार्म नंबर आठ से उस समय चोरी कर लिया गया था। उस समय उस बच्चे की मां सो रही थी। जीआरपी मथुरा ने बच्चे को रविवार की रात को फिरोजाबाद से सकुशल बरामद कर लिया।
इस मानव तस्करी में जीआरपी ने आठ लोगों को हिरासत में लिया। जिनमें दंपती डॉ. प्रेम विहारी पुत्र रमेश चंद्र व डॉ. दयावती पत्नी डॉ. प्रेमबिहारी निवासी गोकलधाम कॉलोनी चौबे वाले महादेव के सामने सिकंदराराऊ रोड हाथरस के अलावा दीप कुमार शर्मा पुत्र मुन्नालाल शर्मा निवासी नवल नगर थाना हाथरस गेट, पूनम पत्नी मंजीत सिंह व उसका पति मंजीत निवासी बंका थाना मुरसान और विमलेश पत्नी संतोष निवासी नगला अलगर्जी हाथरस के नाम शामिल है।
प्रेम बिहारी व उसकी पत्नी दयावती द्वारा हाथरस नवल नगर में बांके विहारी चिकित्सालय का संचालन किया जा रहा था। प्रेम बिहारी पुत्र रमेश चंद्र यहां नगरीय स्वास्थ्य इकाई रानी का नगला में फार्मासिस्ट के पद पर तैनात है। इसकी जानकारी स्थानीय स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन को हुई तो टीम नवल नगर स्थित बांके बिहारी हॉस्पिटल पहुंच गई।
सीएमओ मनजीत सिंह ने बताया कि पकड़ा गया बांके बिहारी यहां नगरिया स्वास्थ्य इकाई रानी का नगला में फार्मासिस्ट के पद पर तैनात है। मानव तस्करी के मामले में फार्मासिस्ट प्रेम बिहारी व उसकी पत्नी दयावती सहित आठ लोगों को मथुरा जीआरपी ने गिरफ्तार किया है। बांके बिहारी हॉस्पिटल को सील कर दिया गया है। इस मामले को लेकर अन्य जगहों पर भी छापेमारी की जा रही है।
बीच शहर में चलता रहा मानव तस्करी का खेल लेकिन प्रशासन को नहीं लगी भनक
बच्चा चोर गिरोह एक सुनियोजित तरीके से गैंग चलाता था। निसंतान दंपती से ऊंचे रकम लेकर उन्हें बच्चा बेचना इस गिरोह का मुख्य काम था। सबसे अचरज की बात तो यह है कि पिछले कई साल से यह अस्पताल शहर के बीचोबीच चल रहा था और यहां मानव तस्करी होती थी। दूर-दूर तक इस गिरोह ने अपना जाल फैला रखा था। यह बात भी सामने आ रही है कि इस गैंग में कई आशा कार्यकर्ता भी शामिल थी।
इनमें से कुछ पकड़ी गई हैं और कुछ फरार हैं, लेकिन पुलिस, प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्वास्थ्य विभाग का एक कर्मी तो खुद इसका सरगना निकला। अब इस गिरोह के खुलासे के बाद यहां खलबली मची हुई है। कुछ अधिकारियों को लग रहा है कि यदि पूरा गैंग पकड़ में आया तो वह भी फंस सकते हैं। ऐसे में अंदरखाने उनमें खलबली मची हुई है।