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बरामई निवासी एक और कमांडो की हुई थी पैराशूट हादसे में मौत
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शहीद हरवीर की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़। संवाद
- फोटो : SADABAD
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संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
पैरा कमांडो हरवीर सिंह से पहले गांव बरामई निवासी बिजेंद्र सिंह के बेटे रूपेश कुमार की भी जनवरी 2020 में प्रशिक्षण के दौरान पैराशूट हादसे में जान चली गई थी। रूपेश कुमार एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग ले रहे थे।
रूपेश कुमार ने वर्ष 2011 में पीलीभीत में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ज्वाइन किया था। उनकी बहादुरी और निपुणता को देखते हुए वर्ष 2016 में उन्हें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के लिए चयनित किया गया। एनएसजी पांच साल का प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्ष 2021 में रूपेश का प्रशिक्षण पूरा होने वाला था।
छह जनवरी 2020 को हरियाणा के मानेसर में प्रशिक्षण शिविर में रूपेश कुमार शामिल थे। प्रशिक्षण का पहला पर्वतारोहण का पड़ाव रूपेश ने कुशलता से पार कर लिया था। इस दौरान रूपेश आकस्मिक घटनाओं से निपटने का प्रशिक्षण ले रहे थे। इस दौरान वह 20 फीट की दीवार से जंप लगाने का अभ्यास रूपेश कर रहे थे।
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अनहोनी की आशंका के चलते दीवार से कूदने के लिए कमांडो की पीठ पर पैराशूट बांधा जाता है। दीवार पर जंप करते समय रूपेश कुमार का पैर फिसल गया। बदकिस्मती से गिरते समय रूपेश का पैराशूट नहीं खुल पाया। रूपेश कुमार सिर के बल 20 फ़ीट की दीवार से जमीन पर नीचे आ गिरे। आनन-फानन उनको उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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पैरा कमांडो हरवीर सिंह से पहले गांव बरामई निवासी बिजेंद्र सिंह के बेटे रूपेश कुमार की भी जनवरी 2020 में प्रशिक्षण के दौरान पैराशूट हादसे में जान चली गई थी। रूपेश कुमार एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग ले रहे थे।
रूपेश कुमार ने वर्ष 2011 में पीलीभीत में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ज्वाइन किया था। उनकी बहादुरी और निपुणता को देखते हुए वर्ष 2016 में उन्हें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के लिए चयनित किया गया। एनएसजी पांच साल का प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्ष 2021 में रूपेश का प्रशिक्षण पूरा होने वाला था।
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छह जनवरी 2020 को हरियाणा के मानेसर में प्रशिक्षण शिविर में रूपेश कुमार शामिल थे। प्रशिक्षण का पहला पर्वतारोहण का पड़ाव रूपेश ने कुशलता से पार कर लिया था। इस दौरान रूपेश आकस्मिक घटनाओं से निपटने का प्रशिक्षण ले रहे थे। इस दौरान वह 20 फीट की दीवार से जंप लगाने का अभ्यास रूपेश कर रहे थे।
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अनहोनी की आशंका के चलते दीवार से कूदने के लिए कमांडो की पीठ पर पैराशूट बांधा जाता है। दीवार पर जंप करते समय रूपेश कुमार का पैर फिसल गया। बदकिस्मती से गिरते समय रूपेश का पैराशूट नहीं खुल पाया। रूपेश कुमार सिर के बल 20 फ़ीट की दीवार से जमीन पर नीचे आ गिरे। आनन-फानन उनको उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।