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शीतगृहों के अग्नि सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

Mon, 20 Feb 2017 11:37 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
अमर उजाला, हाथरस Updated Mon, 20 Feb 2017 11:37 PM IST
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A question of cold storages for fire safety arrangements
सादाबाद स्थित कोल्ड स्टोर में लगी आग से उठता हुआ धुआं। - फोटो : अमर उजाला
तीन दिन के भीतर सादाबाद में हुए दूसरे भीषण अग्निकांड ने कोल्ड स्टोरों में अग्नि सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर बार-बार इस तरह के अग्निकांडों की पुनरावृत्ति कैसे हो रही है।
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सादाबाद क्षेत्र में कोल्ड स्टोर में अग्निकांड की यह आठवीं घटना है। इससे पूर्व पांच-छह साल पूर्व शेरपुर से आगे कोल्ड स्टोर में बॉयलर फट गया था, जिसमें कुछ लोगों की मौत हो गई थी और करोड़ों का नुकसान हुआ था।
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पिछले साल सादाबाद में ही मुरसान रोड पर एसआर कोल्ड स्टोर में आग लगी थी। हालांकि आग तो बुझा ली गई थी, लेकिन इसमें भी काफी नुकसान हुआ था। पिछले साल ही बिलारा में भी एक कोल्ड स्टोर में आग से काफी नुकसान हुआ था। कुछ महीने पर मुरसान रोड पर कोल्ड स्टोर में फिर अग्निकांड हुआ और भारी नुकसान हुआ।
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लगातार आग लगने की इन घटनाओं से यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिर क्यों कोल्ड स्टोर मालिकान अग्नि सुरक्षा इंतजामों की खामियां दूर कराने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते। क्यों कोल्ड स्टोर जैसी संवेदनशील जगहों पर फूलप्रूफ इलेक्ट्रिकल्स उपकरणों का प्रयोग नहीं किया जाता।

कड़ी मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू 
सादाबाद में मथुरा रोड पर जय हरी नमो नारायण कोल्ड स्टोर में हुए भीषण अग्निकांड को काबू करने में भी अग्निशमन विभाग और प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही थी। करीब साढ़े सात घंटे की मशक्‍कत के बाद करीब साढ़े सात बजे आग पर काबू पा लिया गया।  

हाथरस और सादाबाद की गाड़ियां मिलकर आग पर काबू नहीं पा सकीं तो मजबूरी में प्रशासन को दो दिन पहले की तरह आगरा और मथुरा की दमकलों को भी बुलावा भेजना पड़ा। मौके पर देर शाम तक करीब एक दर्जन गाड़ियां आग बुझाने की कोशिश में जुटी थीं। यहां भी रेशमी देवी कोल्ड स्टोर की तरह बड़ी संख्या में दूध के टैंकरों से भी आग बुझाने के लिए पानी मौके पर पहुंचाया जा रहा था। बावजूद इसके आग काबू में नहीं आ रही थी। किसी भी अनहोनी की आशंका से प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए थे। आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोल्ड स्टोर के दो बड़े चैंबर आग से पूरी तरह बर्बाद हो गए। करोड़ों की मशीनरी भी आग की चपेट से बच नहीं सकी। 


 यहां भी यह चिंता अधिकारियों को परेशान कर रही थी कि अगर कुछ घंटे में आग पर काबू नहीं हुआ तो शीतगृह की दीवारें अधिक तापमान के चलते फट सकती हैं, जिससे और ज्यादा हो सकता है। आसपास रहने वाली आबादी को भी नुकसान पहुंच सकता है। एहतियान पुलिस और प्रशासन ने आसपास के इलाकों को खाली कराना भी शुरू कर दिया था। मौके पर अफरा-तफरी और बदहवासी का माहौल था। कोल्ड स्टोर मालिकानों के भी हाथ-पांव फूले हुए थे और वह अपनी बर्बादी का तमाशा देखकर सदमे की हालत में पहुंच चुके थे। सभी दुआ कर रहे थे कि कोल्ड स्टोर की आग शांत हो जाए करीब साढ़े सात घंटे आग बुझी तो लोगों ने चैन की सांस लीं।
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