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महाभारत काल में बना था भद्रकाली का मंदिर
Hathras
Updated Wed, 01 Oct 2014 05:30 AM IST
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सहपऊ। कस्बे में मां भद्रकाली का मंदिर चमत्कारों का साक्षी है। मंदिर का इतिहास महाभारत से मिलता है। श्रीमद्भागवत में भी मां भद्रकाली का दो बार उल्लेख आया है। कस्बे से लगभग 18 किमी दूर जलेसर सिटी को महाभारत कालीन जरासंध की राजधानी कहा जाता है।
मान्यता है कि मथुरा और जलेसर के मध्य इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने इस मंदिर का निर्माण कराया और योगमाया को प्रकट कर उनकी पूजा-अर्चना की थी। मुगल काल में यह मंदिर भी औरंगजेब का कोप भाजन बना। इस मंदिर के मूर्तियों को तोड़ कर अपने साथ ले जाते हुए रास्ते में फें कता गया। जो बाद में स्थान-स्थान पर खुदाई करते समय पाषाण खंडों के रूप में निकलते गए । जिस गांव में मां के मंदिर के पत्थर निकले वहां के ग्रामीणों ने उस पत्थर को एक स्थान पर रखकर मंदिर का निर्माण करवा दिया। दोनों नवरात्र में इस मंदिर में मेला लगा रहता है। नवरात्र में इस मंदिर में भंडारा करने वालों की भीड़ लगी रहती है। मान्यता है कि मां भद्रकाली के दरबार में जो भी भक्त सच्चे मन से मुराद लेकर आता है, मां उसकी मुराद अवश्य पूरी करती है। यही कारण है कि देवी के दरबार में देश के कोने-कोने से भक्त आते रहते हैं। पुराने समय में असम के राजा का साल के दोनों नवरात्र में आना कई बुजुर्गों को याद है। असम के राजा के लिए कस्बे के सिसौदिया जमीदार परिवार की लड़की ब्याही थी। उसी परिवार के कुछ सदस्य आज भी असम में जाकर रह रहे हैं। यह भी किवदंती है कि एक पंडित की लड़की, जो मंदिर में पूजा करने आई थी, उसे एक बारात के कुछ लोगाें द्वारा छेड़ने और उसके मना करने पर भी न मानने पर पर उसके श्राप से पूरी बारात पत्थरों में तब्दील हो गई थी। उस बारात के पाषाण खंड आज भी मंदिर में मौजूद हैं।
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मान्यता है कि मथुरा और जलेसर के मध्य इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने इस मंदिर का निर्माण कराया और योगमाया को प्रकट कर उनकी पूजा-अर्चना की थी। मुगल काल में यह मंदिर भी औरंगजेब का कोप भाजन बना। इस मंदिर के मूर्तियों को तोड़ कर अपने साथ ले जाते हुए रास्ते में फें कता गया। जो बाद में स्थान-स्थान पर खुदाई करते समय पाषाण खंडों के रूप में निकलते गए । जिस गांव में मां के मंदिर के पत्थर निकले वहां के ग्रामीणों ने उस पत्थर को एक स्थान पर रखकर मंदिर का निर्माण करवा दिया। दोनों नवरात्र में इस मंदिर में मेला लगा रहता है। नवरात्र में इस मंदिर में भंडारा करने वालों की भीड़ लगी रहती है। मान्यता है कि मां भद्रकाली के दरबार में जो भी भक्त सच्चे मन से मुराद लेकर आता है, मां उसकी मुराद अवश्य पूरी करती है। यही कारण है कि देवी के दरबार में देश के कोने-कोने से भक्त आते रहते हैं। पुराने समय में असम के राजा का साल के दोनों नवरात्र में आना कई बुजुर्गों को याद है। असम के राजा के लिए कस्बे के सिसौदिया जमीदार परिवार की लड़की ब्याही थी। उसी परिवार के कुछ सदस्य आज भी असम में जाकर रह रहे हैं। यह भी किवदंती है कि एक पंडित की लड़की, जो मंदिर में पूजा करने आई थी, उसे एक बारात के कुछ लोगाें द्वारा छेड़ने और उसके मना करने पर भी न मानने पर पर उसके श्राप से पूरी बारात पत्थरों में तब्दील हो गई थी। उस बारात के पाषाण खंड आज भी मंदिर में मौजूद हैं।
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