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डॉ. गर्ग को मिलेगा संगीत विकास अवार्ड
Hathras
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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हाथरस। भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित संगीत विकास अवार्ड से इस बार हाथरस के डॉ. लक्ष्मीनारायण गर्ग को नवाजा जाएगा। पद्मश्री काका हाथरसी के पुत्र डॉ. गर्ग को यह पुरस्कार 12 दिसंबर को केरल के कालीकट में एक भव्य समारोह में दिया जाएगा। इस लब्ध प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए डॉ. गर्ग के चयन से शहर के साहित्यिक और काव्य जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है। शहर के लिए इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। डॉ. गर्ग को यह पुरस्कार उनकी पुस्तक बृज संस्कृतिक और लोक संगीत पर दिया जाएगा। हर साल यह पुरस्कार शास्त्रीय संगीत की दक्षिण भारतीय पत्रिका समकालिम संगीतम की ओर से दिया जाएगा। इस पुरस्कार के तहत डॉ. गर्ग को 10 हजार रुपये की धनराशि, प्रशस्ति पत्र और केरल के प्रख्यात चित्रकार के. एंटोनी फ्रांसिस की कलाकृति भेंट की जाएगी। दक्षिण भारत की ओर से उत्तर भारत के संगीत विद्वान को दिया जाने वाला यह पुरस्कार देश के एकमात्र महत्वपूर्ण पुरस्कारों में गिना जाता है। डॉ. लक्ष्मीनारायण गर्ग ने संगीत विधा पर डेढ़ सौ से ज्यादा संगीत ग्रंथों का लेखन, संपादन और अनुवाद किया है। पिछले 50 सालों से वह संगीत नाम मासिक पत्र का संपादन कर रहे हैं और अनेक सम्मानों से विभूषित किए जा चुके हैं। उनकी चार पुस्तकें हमारे संगीत रत्न, कथक नृत्य, भारत नाट्यम और संगीत रत्नाकर उत्तर प्रदेश व केंद्र सरकार से पुरस्कृत हो चुकी हैं। साहित्यकारों व कवियों ने इस सम्मान के लिए डॉ.गर्ग को बधाई दी है। संगीत विकास अवार्ड के लिए चुने जाने से काका हाथरसी के बेटे डॉ. लक्ष्मीनारायण गर्ग बेहद खुश हैं। करीब 65 वर्षीय डॉ. गर्ग कहते हैं कि यह सम्मान उनके लिए सौभाग्य की बात है। यह पुरस्कार दक्षिण भारत से उत्तर भारत को मिलने वाला प्यार है। उनके लिए यह फख्र की बात है कि इस पुरस्कार के लिए पूरे उत्तर भारत से उन्हें चुना गया है। पिछले साल उन्हें पश्चिमी बंगाल के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार टैगोर रत्न के लिए चुना गया था। वो उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान था, लेकिन उनका साहित्यिक सफर अविरल रूप से जारी है। पुस्तकें लिखते समय उनका उद्देश्य कोई सम्मान पाना नहीं रहता। उनकी यह पुस्तक दक्षिण तक कैसे पहुंच गई, इस पर वह खुद आश्चर्य चकित हैं, लेकिन बहुत खुश भी हैं। वह आजीवन निस्वार्थ भाव से इस देश को अपनी साहित्यिक कृतियां समर्पित करते रहेंगे।
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