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ग्राम पंचायत में 667 सफाई कर्मी, फिर भी गंदगी का अंबार
Thu, 13 Jun 2019 12:03 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Thu, 13 Jun 2019 12:03 AM IST
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प्रतीकात्मक
- फोटो : अमर उजाला
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हाथरस। ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था के लिए 667 सफाई कर्मियों के होने के बावजूद गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जिले में तैनात 667 सफाईकर्मियों में 120 कर्मी अफसरों की जी-हजूरी में लगे हैं। विकास विभाग में बने कार्यालयों में लगभग 3 दर्जन से अधिक सफाई कर्मी लगे हुए हैं।
हैरानी की बात तो यह है कि ग्रामीण ग्राम पंचायतों में सफाई न होने की शिकायतें कार्यालय में लगातार कर रहे हैं, लेकिन इन कर्मियों को कार्यालयों से हटाने के लिए उच्चाधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस कारण ग्राम पंचायतों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इतना ही नहीं एक-एक कार्यालय में 4 से लेकर 5 कर्मचारी तक संबद्ध किए गए हैं। यहीं नहीं ज्यादातर कर्मचारियों का संबद्धिकरण डीपीआरओ कार्यालय से नहीं किया गया है।
खुद ही विभागाध्यक्षों ने अपने हिसाब से सफाई कर्मी को अटैच कर रखा है। यह सफाई कर्मी गांवों में सफाई कार्य करने की बजाय कार्यालयों अधिकारियों की जी-हजूरी में लगे हुए हैं।
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डीपीआरओ बनवारी सिंह ने बताया कि कुछ कार्यालयों में तो कर्मचारी अपने स्तर से संबद्ध हो गए हैं, हमारे कार्यालय को कोई सूचना नहीं है। कुछ कर्मचारियों को विभागाध्यक्षों की डिमांड के आधार पर स्टाफ की कमी के चलते भेजा गया है।
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हैरानी की बात तो यह है कि ग्रामीण ग्राम पंचायतों में सफाई न होने की शिकायतें कार्यालय में लगातार कर रहे हैं, लेकिन इन कर्मियों को कार्यालयों से हटाने के लिए उच्चाधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस कारण ग्राम पंचायतों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इतना ही नहीं एक-एक कार्यालय में 4 से लेकर 5 कर्मचारी तक संबद्ध किए गए हैं। यहीं नहीं ज्यादातर कर्मचारियों का संबद्धिकरण डीपीआरओ कार्यालय से नहीं किया गया है।
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खुद ही विभागाध्यक्षों ने अपने हिसाब से सफाई कर्मी को अटैच कर रखा है। यह सफाई कर्मी गांवों में सफाई कार्य करने की बजाय कार्यालयों अधिकारियों की जी-हजूरी में लगे हुए हैं।
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डीपीआरओ बनवारी सिंह ने बताया कि कुछ कार्यालयों में तो कर्मचारी अपने स्तर से संबद्ध हो गए हैं, हमारे कार्यालय को कोई सूचना नहीं है। कुछ कर्मचारियों को विभागाध्यक्षों की डिमांड के आधार पर स्टाफ की कमी के चलते भेजा गया है।