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चुनाव में हर खेमा जूझ रहा भितरघात से
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
जैसे-जैसे चुनाव की तिथि नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे ज्यादातर दलों में भितरघात चरम पर पहुंच गया है। स्थिति यह है कि बड़े नेताओं के साथ मंच पर दिखने वाले स्थानीय नेता ही अपने प्रत्याशी की लुटिया डुबोने में लगे हैं। इन नेताओं के कई रूप सामने आ रहे हैं। एक तरफ तो यह अपने प्रत्याशी के साथ जाकर वोट मांग रहे हैं। वहीं दूसरे खेमे से संपर्क कर अपने समर्थकों को उनके पक्ष में मतदान करने और कराने के लिए कह रहे हैं।
यहां हर खेमा इस स्थिति से जूझ रहा है। प्रत्याशियों को यह भितरघात महंगा भी पड़ सकता है और चुनाव में उनकी स्थिति बिगाड़ सकती है। हर दल यहां अंदरूनी कलह से जूझ रहा है। शुरू में टिकट मिलने पर यह कलह सामने आई और अब यह कलह चुनाव के ऐन वक्त पर सामने आ रही है। कुछ नेताओं ने खुलकर बगावत कर दी है तो कुछ अंदरखाने अपने प्रत्याशी को हराने की पूरी रूपरेखा तैयार कर चुके हैं।
पार्टी आलाकमान कहीं अनुशासन की कार्रवाई नहीं कर दें, इसलिए इस डर से यह नेता मंच से लेकर प्रत्याशियों के साथ संपर्क में भी उनके साथ जा रहे हैं, लेकिन उनका दूसरा रूप भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने अपने समर्थकों को दूसरे खेमे में उतार दिया है। कोई खुलकर दूसरे खेमे का समर्थन कर रहा है तो कोई अंदरखाने यह काम कर रहा है।
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यही नहीं एक पार्टी की रणनीति दूसरे खेमे तक पहुंचाने का काम भी कुछ नेता कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एक पार्टी में अंदरखाने अपने साथ भितरघात करने वाले नेताओं को चिन्हित भी करने में लगे हैं, लेकिन उन्हें सजा वह चुनाव के बाद ही दिलवाना चाहते हैं। वैसे कुछ प्रत्याशियों को उनकी पार्टी की अंदरूनी कलह चुनाव में भारी पड़ सकती है।
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जैसे-जैसे चुनाव की तिथि नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे ज्यादातर दलों में भितरघात चरम पर पहुंच गया है। स्थिति यह है कि बड़े नेताओं के साथ मंच पर दिखने वाले स्थानीय नेता ही अपने प्रत्याशी की लुटिया डुबोने में लगे हैं। इन नेताओं के कई रूप सामने आ रहे हैं। एक तरफ तो यह अपने प्रत्याशी के साथ जाकर वोट मांग रहे हैं। वहीं दूसरे खेमे से संपर्क कर अपने समर्थकों को उनके पक्ष में मतदान करने और कराने के लिए कह रहे हैं।
यहां हर खेमा इस स्थिति से जूझ रहा है। प्रत्याशियों को यह भितरघात महंगा भी पड़ सकता है और चुनाव में उनकी स्थिति बिगाड़ सकती है। हर दल यहां अंदरूनी कलह से जूझ रहा है। शुरू में टिकट मिलने पर यह कलह सामने आई और अब यह कलह चुनाव के ऐन वक्त पर सामने आ रही है। कुछ नेताओं ने खुलकर बगावत कर दी है तो कुछ अंदरखाने अपने प्रत्याशी को हराने की पूरी रूपरेखा तैयार कर चुके हैं।
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पार्टी आलाकमान कहीं अनुशासन की कार्रवाई नहीं कर दें, इसलिए इस डर से यह नेता मंच से लेकर प्रत्याशियों के साथ संपर्क में भी उनके साथ जा रहे हैं, लेकिन उनका दूसरा रूप भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने अपने समर्थकों को दूसरे खेमे में उतार दिया है। कोई खुलकर दूसरे खेमे का समर्थन कर रहा है तो कोई अंदरखाने यह काम कर रहा है।
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यही नहीं एक पार्टी की रणनीति दूसरे खेमे तक पहुंचाने का काम भी कुछ नेता कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एक पार्टी में अंदरखाने अपने साथ भितरघात करने वाले नेताओं को चिन्हित भी करने में लगे हैं, लेकिन उन्हें सजा वह चुनाव के बाद ही दिलवाना चाहते हैं। वैसे कुछ प्रत्याशियों को उनकी पार्टी की अंदरूनी कलह चुनाव में भारी पड़ सकती है।